पुतिन से साइबर अपराध पर बाइडन ने की बात, पर क्या क़ाबू में आएँगे गैंग?

पुतिन की तस्वीर देख रहे हैकर

इमेज स्रोत, Getty Images/ BBC

    • Author, जो टाइडी
    • पदनाम, साइबर मामलों के बीबीसी संवाददाता

इसी सप्ताह जिनेवा में हुई मुलाक़ात में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच रैनसमवेयर के मुद्दे को लेकर चर्चा हुई जिसके बाद इस बात पर सहमति बनी कि दोनों देशों के बीच एक साइबर सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाएगी.

बाइडन ने कहा कि हाल में कुछ बेहद महत्वपूर्ण अमेरिकी कंपनियों पर आपराधिक गैंग्स द्वारा किए साइबर हमले के बाद वो और पुतिन "इस संबध में कोई ठोस व्यवस्था लाने को लेकर" चर्चा करेंगे.

लेकिन माना जा रहा है कि दोनों नेताओं में इस बात को लेकर सहमति नहीं बन पाई है कि बढ़ते रैनसमवेयर हमलों के लिए कौन ज़िम्मेदार है. ऐसे में इस मुद्दे पर चर्चा आगे बढ़ाना दोनों पक्षों के लिए जटिल मामला हो सकता है.

राष्ट्रपति बाइडन का कहना है कि उन्होंने पुतिन से साथ हाल में एक अमेरिकी पाइपलाइन कंपनी पर हुए रैनसमवेयर साइबर हमले को लेकर चर्चा की है. अमेरिका के ईस्ट कोस्ट के राज्यों में डीज़ल, गैस और जेट ईंधन की 45 फीसदी आपूर्ति इसी पाइपलाइन से होती थी.

ये रैनसमवेयर हमला डार्कसाइड नाम के एक साइबर-अपराधी गिरोह ने किया था.

कई साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने संदेह जताया था कि ये साइबर अपराधी रूस के हैं क्योंकि ये ऐसे कंप्यूटर नेटवर्कों पर हमले नहीं करते जिनमें रूसी भाषा होती है.

उस वक्त जो बाइडन ने कहा था कि राष्ट्रपति पुतिन से मुलाक़ात होने पर इस पर चर्चा करेंगे. हलांकि उन्होंने ये भी कहा था कि "हमारे ख़ुफ़िया लोगों के मुताबिक़ अभी तक इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि इसमें रूस का हाथ है."

ये भी पढ़ें-

बाइडन ने कहा कि उन्होंने पुतिन को 16 ऐसे महत्वपूर्ण संस्थाओं की एक सूची दी है जिन्हें 'ऑफ़ लिमिट' समझा जाना चाहिए यानी जिन पर भविष्य में साइबर हमला नहीं होना चाहिए.

हालांकि राष्ट्रपति पुतिन ने संवाददाताओं को बताया कि कोलोनियल पाइपलाइन पर हुए हमले या किसी और हमले से "रूसी अधिकारियों का कोई लेना देना नहीं है."

पुतिन ने ये भी दावा किया कि अमेरिकी सूत्रों ने उन्हें बताया है कि अधिकांश मामलों में साइबर हमले अमेरिका से होते हैं और अमेरिका से होने वाले हमलों के बारे में जानकारी की रूस की गुज़ारिश को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.

वीडियो कैप्शन, रूसी हैकिंग की जांच

रैनसमवेयर हमला करने वाले अधिकतर गैंग्स रूस से है इस बात के क्या सबूत हैं?

साइबर अपराधों में सबसे बड़ी चुनौती ये होती है कि यहां पहचान और पता छिपा कर काम किए जा सकते हैं. ऐसे में हमला कहां से हो रहा है और उसेक पीछे कौन है सही-सही ये जानना मुश्किल है.

हालांकि बीते कुछ सालों में जानकारों ने इन हमलों में एक ख़ास पैटर्न देखा है जो एक निश्चित दिशा में इशारा करती हैं.

पूर्व रूसी हैकर और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ दिमित्री स्मिल्यानेत्स कहते हैं, "इस बारे में ख़ुफ़िया जानकारी और शोध कर रहे लोगों का मानना है कि ये हमले पहले सोवियत संघ का हिस्सा रहे देशों से किए जा रहे हैं, जैसे रूस, यूक्रेन और अन्य देश."

अपने इस तर्क से समर्थन में दिमित्री स्मिल्यानेत्स और अन्य विशेषज्ञ चार सबूतों की तरफ इशारा करते हैं.

  • अधिकतर हैकर समूह अपने हैकिंग सॉफ्टवेयर का विज्ञापन डार्क वेब में रूसी बोलने वाले हैकर फोरम्स में देते हैं.
  • इन हैकर समूहों के काम करने का वक्त मॉस्को के समय के अनुसार होता है. जिन दिनों रूस में सार्वजनिक छुट्टियां होती हैं उन दिनों डार्कवेब पर इन हैकर्स की हरकतें नहीं होतीं.
  • कई मामलों में रैनसमवेयर सॉफ्टवेयर में इस तरह के ख़ास कोड को शामिल किया गया होता है जिससे ऑटोमैटिक तौर पर ये सॉफ्टवेयर उन कंप्यूटर्स पर हमला नहीं करता जिनमें रूसी कीबोर्ड कन्फिगर होता है.
  • पश्चिमी देशों के मुक़ाबले पूर्व सोवियत संघ या फिर रूस में रैनसमवेयर हमलों के अधिक मामले हैं.
वीडियो कैप्शन, पोर्न हैकिंग के ज़रिए कैसे वसूली कर रहे हैं वायरस?

साइबर डिफेन्डर्स रिकॉर्डेड फ्यूचर में काम करने वाले स्मिल्यानेत्स कहते हैं, "रैनसमवेयर हमले करने वालों और उनके सहयोगियों को निशाना बना कर किए जा रहे ख़ुफ़िया अभियान भी इस संबंध में असाधारण जानकारी देते हैं."

वो कहते हैं, "उनकी जानकारी बेहद सटीक है और वो इस मामले में शोध कर रहे साइबर रिसर्चरों की जानकारी की तस्दीक करते हैं."

साल 2019 में अमेरिका और यूके के अधिकारियों ने एविल कॉर्प रैनसमवेयर गैंग चलाने के लिए दो रूसी नागरिकों पर आरोप लगाया था. ये दोनों फिलहाल रूस में हैं और आज़ाद हैं.

रूसी नागरिक माक्सिम याकुबेत्सऔर इगोर तुराशेव

इमेज स्रोत, US Department of Justice

इमेज कैप्शन, रूसी नागरिक माक्सिम याकुबेत्सऔर इगोर तुराशेव पर एविल कॉर्प रैनसमवेयर गैंग चलाने का आरोप है

रूस का कहना है कि दूसरे देशों की तरह रूस भी रैनसमवेयरस साइबर हमलों का सामना कर रहा है.

बाइडन के साथ हुई मुलाक़ात के बाद राष्ट्रपति पुतिन ने संवाददाताओं से कहा रूस पर बीच-बीच में रैनसमवेयरस साइबर हमले होते हैं. उन्होंने रूसी स्वास्थ्य सेवा पर हुए साइबर हमले का उदाहरण दिया और इसके लिए अमेरिकी हैकर्स को ज़िम्मेदार ठहराया.

हालांकि दिमित्री स्मिल्यानेत्स इस बात पर संदेह जताते हैं कि रूसी स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कंप्यूटर्स की हैंकिंग रैनसमवेयर हमला था. वो कहते हैं कि अगर ऐसा होता तो इससे हुए नुक़सान की कोई ख़बर तो सुनने-पढ़ने को मिलती.

रूस और पहले सोवियत संघ में शामिल देशों पर कम रैनसमवेयर हमले होने का कारण रूसी हैंकिंग जगह में पॉपुलर 'वन रूल' यानी एक नियम है. इसका अर्थ ये है कि हैकर्स किसी पर भी हमला कर सकते हैं बशर्ते वो अपनी या मित्रों की सरज़मीन से दूर हो.

एक युवा हैकर

इमेज स्रोत, Getty Images

अंतरराष्ट्रीय धंधा बन गया है रैनसमवेयर

इसमें कोई शक नहीं कि रैनसमवेयर हमला करने वाले गैंग्स कई अन्य देशों में काम कर रहे हैं.

उदाहरण के लिए इतिहास का सबसे गंभीर रैनसमवेयर हमला उत्तर कोरिया के हैकर्स ने कया था. 2017 में हुए इस हमले में यूके के सैकड़ों एनएचएस अस्पतालों के कंप्यूटर्स प्रभावित हुए थे.

जिस दिन जिनेवा में बाइडन और पुतिन की मुलाक़ात हुई उसी दिन रैनसमवेयर ग्रुप क्लॉप के साथ कथित संबंधों के आरोप में यूक्रेन में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया.

इन लोगों पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया की संस्थाओं पर साइबर हमलों में शामिल होने का आरोप है.

संदिग्ध हैकर्स की गिरफ्तारी का वीडियो

इमेज स्रोत, npu.gov.ua

इमेज कैप्शन, यूक्रेन पुलिस ने रैनसमवेयर ग्रुप क्लॉप से जुड़े संदिग्ध हैकर्स की गिरफ्तारी का एक वीडियो जारी किया है

इसी साल जनवरी में कनाडा में एक संदिग्ध हैकर को गिरफ्तार किया गया था. उन पर रैनसमवेयर ग्रुप नैटवॉकर से संबंधित होने का आरोप लगाया गया था.

हालांकि माना जाता है कि इन गिरफ्तारियों का गंभीर असर उन आपराधिक रैनसमवेयर हैकिंग गैंग्स पर नहीं पड़ा होगा जो बढ़िया तरीके से वित्तपोषित हैं.

अधिकतर जानकार इस बात को मानते हैं कि दुनिया के कई देशों में गंभीर नुक़सान पहुंचाने वाले इस आकर्षक आपराधिक व्यापार का केंद्र सोवियत संघ में शामिल रहे रूस और अन्य देश हैं.

वीडियो कैप्शन, Duniya Jahan - हैकर्स की ख़तरनाक और रहस्यमयी दुनिया

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)