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पुतिन ने बाइडन से मुलाक़ात के पहले ट्रंप और चीन की तारीफ़ क्यों की?
- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
क़रीब 10 साल पहले की घटना है. अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति तब उप-राष्ट्रपति के पद पर थे और व्लादिमीर पुतिन से मिलने रूस गए थे.
कुछ साल बाद जो बाइडन ने 'न्यू यॉर्कर' को दिए साक्षात्कार में उस मुलाक़ात का ज़िक्र करते हुए कुछ इस तरह याद किया था, ''मैंने कहा, मैं आपकी आँखों में देख रहा हूँ और मुझे नहीं लगता कि आपकी कोई आत्मा भी है.''
बाइडन ने बताया था, ''उन्होंने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुराकर बोले, हम एक-दूसरे को समझते हैं.'' हालाँकि 10 साल बाद अब राष्ट्रपति पुतिन का कहना है कि उनको ये घटना याद नहीं है.
लेकिन बाइडन-पुतिन की उस मुलाक़ात की चर्चा दोबारा हो रही है.
वजह है 16 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जिनेवा में एक बार फिर मुलाक़ात हो रही है. लेकिन इस बार दोनों की आँखें मिलेंगी और एक दूसरे के दिल में झाँक पाएँगें या वो एक दूसरे को कितना समझ पाएंगे, इसका अंदाज़ा लगाना ज़रा मुश्किल है.
इस मुलाक़ात से ठीक पहले, दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की तरफ़ से ख़ूब बयानबाजी भी हो रही है.
लगभग तीन साल बाद रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी न्यूज़ को एक वीडियो इंटरव्यू दिया है. इंटरव्यू में उन्होंने न सिर्फ़ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ़ की है, बल्कि अमेरिका की तरफ़ से लगाए जा रहे साइबर हमलों, ईरान को उकसाने, इलाक़े में अस्थिरता फैलाने, साइबर हमले और मानवाधिकार के आरोपों पर भी खुल कर जवाब दिया.
दूसरी तरफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी धमकी भरे अंदाज में कहा कि साइबर सिक्योरिटी जैसे मसलों पर अगर पुतिन आपसी सहयोग के लिए तैयार हो जाते हैं, तो बहुत अच्छा. अगर वो सहयोग के लिए तैयार नहीं होते हैं और पहले की तरह का रवैया रखते हैं, तो हम भी जवाब देंगे. उनको लक्ष्मण रेखा साफ़ शब्दों में बता देंगे. बाइडन ने पुतिन से अपनी पुरानी मुलाक़ात का ज़िक्र करते हुए उनके लिए 'होनहार' 'सख़्त' 'योग्य विरोधी' जैसे शब्दों का प्रयोग भी किया.
क्यों अहम है ये मुलाक़ात
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बिना शर्त इस बातचीत का न्यौता रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार भी किया. दोनों देश मानते हैं कि उनके आपसी संबंध अब तक के सबसे ख़राब दौर में हैं.
हाल ही में रूस ने अमेरिका को ऐसे देशों की सूची में डाला दिया था, जिसके संबंध उनसे दोस्ताना नहीं है. इन्हें आधिकारिक तौर पर 'अनफ्रेंडली स्टेट' की संज्ञा दी जाती है. दोनों ही देशों में कोई राजदूत नहीं है.
वहीं, क्राइमिया पर कब्ज़ा करने से लेकर अमेरिकी चुनावों में कथित दखल तक, हर चीज़ के लिए रूसी अधिकारियों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया हुआ है. अमेरिका के दो पूर्व नौसैनिक रूस की जेल में क़ैद हैं. उनमें से एक नौसैनिक जासूसी के आरोप में 16 साल की सज़ा काट रहा है.
इतना ही नहीं, मार्च में एक इंटरव्यू में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने व्लादिमीर पुतिन को 'हत्यारा' तक कह दिया था.
लेकिन सोमवार को बेल्जियम में जब बाइडन से पूछा गया कि क्या वो पुतिन को अब भी 'हत्यारा' मानते हैं, उन्होंने हँसी में बात टाल दी. उन्होंने कहा हमारी अगली मुलाक़ात के पहले ये बातें मायने नहीं रखतीं.
ऐसे माहौल में, जब से जो बाइडन अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, पुतिन और बाइडन की यह पहली मुलाक़ात है.
जिनेवा शहर को इस मुलाक़ात के लिए चुनना भी अहम है. यह 1985 के शीत युद्ध की याद दिलाता है, जब पहली बार पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और पूर्व सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचोफ़ की मुलाक़ात हुई थी.
ये भी पढ़ें : चीन की खाड़ी देशों पर नज़र, अमेरिका के लिए खतरे की घंटी?
ट्रंप और बाइडन पर पुतिन ने क्या कहा?
एनबीसी पत्रकार ने पुतिन से बाइडन द्वारा 'हत्यारा' करार दिए जाने पर सवाल किया.
जवाब में पुतिन ने कहा, "मैंने अपने कार्यकाल में इस तरह के बहुत हमले झेले हैं. अब ऐसे हमलों से मुझे हैरानी नहीं होती. हम जिन लोगों के साथ काम करते हैं, जिनके साथ हमारे मतभेद होते हैं उनसे 'मियां-बीवी' का रिश्ता तो है नहीं. उनकी क़समें तो हम खाते नहीं. कई मामलों में हम सहयोगी होते हैं और कई मामलो में विरोधी. जहाँ तक इस तरह की शब्दावली के प्रयोग की बात है, मैं समझता हूँ कि ये अमेरिकी कल्चर का हिस्सा है."
उन्होंने बाइडन के लिए बड़े ही सधे शब्दों का इस्तेमाल किया.
लेकिन बिना पूछे ही पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ़ भी की. पुतिन ने कहा, "ट्रंप एक टैलेंटेड इंसान है, नहीं तो अमेरिका जैसे देश के राष्ट्रपति पद तक वो नहीं पहुँचते. वो काफ़ी रंगीन मिजाज़ इंसान है. लोग इसे अच्छा कहें या बुरा, लेकिन यह तथ्य है."
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने हाल ही में एबीसी न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि रूसी राष्ट्रपति व्लादमिर पुतिन को 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कथित दख़ल की 'क़ीमत चुकानी होगी'.
पिछले साल अमेरिका ने 'सोलरविन्ड्स' की बड़ी हैकिंग के पीछे रूसी ख़ुफ़िया एजेंसियों का हाथ बताया था.
साइबर हमले और अमेरिकी चुनाव में दख़ल जैसे आरोपों का ज़िक्र करते हुए ख़ुद पुतिन ने कहा कि मुझे हैरानी है कि अभी तक हम पर ब्लैक लाइव्स मैटर मूवमेंट को उकसाने का आरोप नहीं लगा है. वैसे हमने ऐसा कुछ किया भी नहीं है. उन्होंने आगे कहा, "अमेरिका ने जो भी आरोप हम पर अब तक लगाए लगाएँ हैं, वो बेबुनियाद और निराधार हैं."
जेएनयू के सेंटर फ़ॉर रशियन स्टडीज़ में प्रोफ़ेसर संजय पांडे कहते हैं, "मुलाक़ात के चंद रोज़ पहले इस तरह के इंटरव्यू देना कोई नई बात नहीं है. लेकिन पुतिन का यह इंटरव्यू कई मायनों में ध्यान खींचता है. एक तो ये काफ़ी लंबा है और इसमें कई बातों को काफ़ी बारीकी से पढ़ने और समझने की ज़रूरत है.
ट्रंप और बाइडन के बारे में जो उन्होंने कहा उससे ऐसा लगता है कि पुतिन ट्रंप को सही ठहरा रहे हैं और बाइडन को बुरा भी नहीं कह रहे. यही इस इंटरव्यू को ख़ास बनाता है. इसमें कही गई बातों से साफ़ जाहिर हो जाता है कि उनको बहुत कुछ हासिल करने की उम्मीद नहीं है.'
अमेरिका पर आरोप
16 जून को बाइडन के साथ होने वाली बातचीत के नतीजों पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी की तरह ही अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में वो भी 'पूर्वानुमान' और 'स्थिरता' चाहते हैं.
पुतिन का कहना है कि इन्हीं दो बातों पर दो देशों के अच्छे रिश्ते निर्भर भी करते हैं. लेकिन अमेरिका विश्व के दूसरे देशों में जो कर रहा है, उससे स्थिरता नहीं आ सकती.
पुतिन ने अफ़गानिस्तान, मध्य-पूर्व, सीरिया, लीबिया में अमेरिका के मनमाने रवैये का हवाला देते हुए अपनी बात को सही ठहराया.
इतना ही नहीं रूस में विपक्षी कार्यकर्ता एलेक्सी नवेलनी से जुड़े मानवाधिकार के मुद्दे की बात पर उन्होंने सीधे अमेरिका पर ही पलटवार कर पूछा कि अमेरिका में राजनीतिक विरोधियों से निपटने के लिए क्या इस तरह के क़ानून नहीं हैं? कैपिटल हिल हिंसा के बाद अमेरिका में क्या उसमें हिस्सा लेने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई?
प्रोफ़ेसर संजय पांडे का मानना है कि 'चाहे ब्लैक लाइव्स मैटर की बात हो या फिर लीबिया, सीरिया, इराक, अफ़गानिस्तान का ज़िक्र, पुतिन ने ये साफ़ कह दिया अमेरिका की विश्व के मुद्दों पर अपनी एक सोच है और रूस की अपनी एक अलग सोच है. अमेरिका को लगता है कि उनका सही है, रूस को लगता है कि हमारा सही है.
पुतिन का मानना है कि अमेरिका और उसके दूसरे साथी लोकतंत्र और मानवाधिकार के नाम पर दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दख़लंदाज़ी करते हैं, सत्ता परिवर्तन में बाहर से सहयोग करते हैं, जो रूस को स्वीकार्य नहीं है.'
चीन पर क्या कहा?
पुतिन का ये इंटरव्यू 11 जून को किया गया था और 14 जून को प्रसारित किया गया. ठीक उसी समय जी-7 देशों का ब्रिटेन में सम्मेलन चल रहा था, जिसमें चीन से निपटने के बारे में बहुत सी बातें की गईं.
जानकारों की राय में फ़िलहाल अमेरिका, रूस और चीन की बढ़ती नज़दीकी से भी असहज है.
हर्ष पंत, आब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्टडीज़ विभाग के डायरेक्टर हैं और किंग्स कॉलेज, लंदन में इंटरनेशनल रिलेशंस के प्रोफे़सर भी हैं.
वो कहते हैं चाहे नेटो हो या फिर जी-7, जिस हिसाब से चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका दूसरे देशों को एकजुट करने में लगा है, उससे एक बार के लिए हो सकता है कि वो रूस को भी टटोलना चाहते हों. कहीं रूस भी चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका का साथ तो नहीं देगा. हालांकि हर्ष पंत ये भी कहते हैं कि इसकी संभावना कम है.
लेकिन रूस भी इस बात से वाक़िफ है. अमेरिकी चैनल ने इस साक्षात्कार में चीन से जुड़े वीगर मुसलमानों और दोनों की दोस्ती से जुड़े सवाल पूछे. लेकिन जवाब में पुतिन ने भी चीन का साथ दिया.
पुतिन ने इस साक्षात्कार में चीन से अपनी दोस्ती के बारे में ख़ुलकर कहा. चीन ने अमेरिका की तरह हमें दुश्मन करार नहीं दिया है. ख़रीद क्षमता के आधार पर चीन की अर्थव्यवस्था ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ दिया है. यही हाल व्यापार में है. इस लिहाज से चीन शक्तिशाली देश हो गया है.
हर्ष पंत कहते हैं कि बाइडन इस तरह के मुलाक़ात की पहल करते दिखना चाहते हैं. अगर इसके सकारात्मक परिणाम निकलते हैं तो बाइडन के लिए अच्छा होगा. लेकिन बेनतीजा होने पर पुतिन पर ज़िम्मेदारी डाल सकते हैं.
बताया जा रहा है कि 16 जून की बैठक के बाद अमेरिका और रूस के राष्ट्राध्यक्ष अलग-अलग प्रेस को संबोधित करेंगे. लेकिन जानकार मानते हैं कि पहली ही बैठक के बाद किसी बड़े नतीजों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए.
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