रूस ने क्यों कहा- ये यूक्रेन के अंत की शुरुआत हो सकती है

रूस के एक उच्च अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर यूक्रेन पूर्वी हिस्से में अलगाववादियों पर चौतरफ़ा हमला करता है, तो वह इस हिस्से में रह रहे 'रूसी भाषी लोगों की मदद करने के लिए हस्तक्षेप' कर सकता है.

पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थित अलगाववादी विद्रोही और यूक्रेन की सेना के बीच झड़प लंबे वक़्त से जारी है. इसके अलावा रूस यूक्रेन के साथ लगने वाली अपनी सीमा पर सैनिको की संख्या लगातार बढ़ा रहा है.

रूसी अधिकारी दमित्रि कोज़ाक ने कहा है कि अपने नागरिको की 'सुरक्षा' के लिए रूस हस्तक्षेप कर सकता है.

उन्होंने कहा, ''ये इस पर निर्भर करता है कि आग कितनी फैलती है.''

उन्होंने ये भी कहा कि ये यूक्रेन के 'अंत की शुरुआत हो सकती है'- ऐसा ही होगा जैसे 'पैर पर गोली ना मार कर सीधे चेहरे पर गोली मारी जाए.'

दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव पर अमेरिका और जर्मनी ने चिंता ज़ाहिर की है.

क्यों यूक्रेन और रूस के बीच बढ़ रहा है तनाव

रूस यूक्रेन की सीमा पर सैनिकों की संख्या में लागातार वृद्धि कर रहा है, लेकिन उसका कहना है कि इसे ख़तरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

रूस ने अपने सीमा पर भेजे गए सैनिकों की संख्या की जानकारी नहीं दी है, लेकिन यूक्रेन की सेना ने मार्च के अंत में दावा किया कि लगभग 20,000 रूसी सैनिकों को यूक्रेन की सीमा की ओर भेजा गया है.

सोशल मीडिया पर भी एक वीडियो सामने आया है जिसमें रूस की ट्रेन को भारी हथियार लेकर इस क्षेत्र की ओर जाते देखा जा सकता है.

हाल के महीनों में यूक्रेन के डोनबास में रूसी समर्थित अलगाववादी और यूक्रेन की सेना के बीच संघर्ष बढ़ा है.

गुरुवार को यूक्रेन के एक सैनिक की मौत के साथ ही इस साल मारे गए यूक्रेनी सैनिकों की संख्या 25 हो चुकी है, वहीं बीते साल संघर्ष में 50 यूक्रेनी सैनिकों की मौत हो गई थी.

अलगाववादियों का भी कहना है कि जिस दिन एक सैनिक की मौत हुई, उसी दिन एक अलगाववादी लड़ाके की भी मौत हो गई. उनका दावा है कि डोनेत्स्क के बाहरी हिस्से के एक गाँव में यूक्रेनी सेना ने 14 मोर्टार दागे और इसमें लड़ाके की मौत हो गई.

गुरुवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेन्स्की ने घटनास्थल का का दौरा किया और इस 'मुश्किल वक़्त में अपनी सेना के साथ खड़े नज़र आए.'

जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने गुरुवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन से फ़ोन पर बात की और 'यूक्रेनी सीमा पर सैनिकों की संख्या घटा कर तनाव कम करने को कहा.'

वहीं पुतिन ने फ़ोन पर बातचीत के दौरान यूक्रेन पर हालात को और भड़काने का आरोप लगाया.

रूस ने क्या कहा है?

रूसी अधिकारी कोज़ाक अलगाववादियों की वर्तमान परिस्थिति को सेब्रेनित्सा नरसंहार से जोड़ कर देखते हैं. बोस्निया-हर्जेगोविना के कस्बे सेर्बेनित्ज़ा में साल 1995 में 8000 मुस्लिमों की बोस्निया की सर्ब सेना ने हत्या कर दी थी.

पुतिन प्रशासन के उप प्रमुख कोज़ाक कहते हैं, ''जैसा कि हमारे राष्ट्रपति कहते हैं, अगर यहाँ सेब्रेनित्सा जैसी परिस्थिति बनती हैं, तो संभवतः हम उनके बचाव में सामने आएँगे. ''

व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार 2019 में कहा था, ''अगर यूक्रेन बिना गारंटी के डोनबास का पूर्ण नियंत्रण हासिल करता है तो रूसी भाषी निवासियों को सेब्रेनित्सा जैसा नरसंहार भुगतना पड़ सकता है.''

लेकिन ऐसी कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिसमें इस तरह के किसी भी अत्याचार की कोई योजना की जनाकारी सामने आई हो.

कोज़ाक कहते हैं कि अब तक अलगाववादी यूक्रेनी सेना से ख़ुद लड़ने में सक्षम हैं क्योंकि उनके पास लड़ने के लिए 'ज़रुरी चीज़ें' उपलब्ध हैं.

क्यों हो रहा है ये सब?

इस विवाद की शुरुआत होती है साल 2014 से. 2014 में रूस ने क्राइमिया प्रायद्वीप का विलय कर लिया था. इससे पहले तक क्राइमिया यूक्रेन का हिस्सा हुआ करता था.

यूक्रेन में साल 2014 में हुई क्रांति के बाद देश के बाद राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को पद छोड़ना पड़ा था. तब रूस ने यूक्रेन में हस्तक्षेप करके क्राइमिया में रूसी सेना भेजी और उसे अपने कब्ज़े में ले लिया.

इसके पीछे तर्क दिया गया कि वहाँ रूसी मूल के लोग बहुत हैं और विरोध प्रदर्शन के बीच उनके हितों की रक्षा करना रूस की ज़िम्मेदारी है.

इस क़दम ने रूस और पश्चिमी देशों के बीच एक बड़ी दरार पैदा की. जिसके बाद यूरोपीय संघ और अमेरिका को रूस पर प्रतिबंध भी लगाया.

इसके एक महीने बाद रूस समर्थित विद्रोहियों ने तीन रूस भाषी इलाकों डोनबास, डोनेत्स्क लुहांस्क पर अपना कब्ज़ा कर लिया.

पश्चिमी देशों और नेटो ने रूस पर यूक्रेन की सीमा पर सेना भेजने का आरोप लगाया, लेकिन रूस ने कहा कि यहाँ मौजूद हर रूसी लड़ाका एक 'वॉलिंटियर' है.

जब यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेन्स्की सत्ता में आए, तो उन्होंने इलाक़े में शांति बहाल करने का वादा किया. बीते साल जुलाई में दोनों देशों के बीच संघर्षविराम पर हस्ताक्षर किए गए. लेकिन तब से लेकर अब तक दोनों ही देश एक-दूसरे पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगाते रहते हैं.

इस संघर्ष में अब तक 14000 लोगों की मौत हो चुकी है.

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