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चीन ने ख़ुद को ख़तरा बताए जाने पर नेटो को दिया सख़्त जवाब
ब्रसेल्स में नेटो नेताओं की बैठक में चीन को ख़तरा बताए जाने के बाद, चीन ने नेटो पर उसे बदनाम करने का आरोप लगाया है.
नेटो नेताओं ने चीन को एक 'व्यवस्थागत चुनौती' बताया था.
नेटो ने कहा था कि चीन का परमाणु हथियार बढ़ाने समेत सभी काम 'नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था' के लिए ख़तरा हैं.
यह पहली बार था, जब नेटो ने चीन को अपने एजेंडे के केंद्र में रखा था.
जवाब में चीन ने कहा है कि उसकी सुरक्षा नीति 'रक्षात्मक प्रकृति' की है और उसने नेटो से निवेदन किया है कि वो 'बातचीत को बढ़ाने में अपनी ऊर्जा ख़र्च करे.'
यूरोपीय संघ में चीन के मिशन ने बयान जारी कर कहा है, "हमारा रक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण को बढ़ाना उचित, खुला और पारदर्शी है."
इसमें कहा गया है कि नेटो को चाहिए कि वो चीन के विकास को 'तर्कसंगत ढंग' से देखे और 'गुटीय राजनीति में हेरफेर करने, टकराव पैदा करने और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए चीन के वैध हितों और अधिकारों का बहाना न बनाए.'
सोमवार को ब्रसेल्स में हुए एकदिवसीय सम्मलेन के बाद नेटो का बयान सामने आया था.
जो बाइडन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद यह नेटो की पहली बैठक थी.
यह 30 यूरोपीय और उत्तरी अमेरिकी देशों का एक शक्तिशाली राजनीतिक और सैन्य गठबंधन है, जो रूस को एक मुख्य ख़तरे के तौर पर देखता आया है.
बाइडन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की मुलाक़ात बुधवार को जिनेवा में होनी है.
चीन पर क्यों फ़ोकस कर रहा है नेटो?
नेटो शिखर सम्मेलन के बयान में कहा गया है कि चीन की महत्वाकांक्षाएं और हठधर्मिता, दुनिया में अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था को चुनौती पेश करती हैं.
बयान में कहा गया है कि नेटो चीन के व्यवहार में पारदर्शिता की कमी और दुष्प्रचार के इस्तेमाल से चिंतित है.
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नेटो प्रमुख येन्स स्टोल्टनबर्ग ने पत्रकारों को बताया, "हम एक शीत युद्ध में प्रवेश नहीं कर रहे हैं. चीन हमारा विरोधी या दुश्मन नहीं है. नेटो को एक गठबंधन के रूप में, चीन के ताक़तवर होने से आ रही चुनौतियों का भी सामना करना है. चीन दुनिया की प्रमुख सैन्य और आर्थिक शक्ति है जिसकी राजनीति, रोज़मर्रा की ज़िंदगी और समाज पर सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की मज़बूत पकड़ है."
चीन के पास इस वक़्त दुनिया में सबसे बड़ी सेना है, जिसमें क़रीब 20 लाख सैनिक सक्रिय ड्यूटी पर हैं.
नेटो चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं को लेकर लगातार फ़िक्रमंद होता जा रहा है. ये संगठन चीन की ताक़त को अपने सदस्य मुल्कों की सुरक्षा और उनके लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए ख़तरे के तौर पर देखता है.
हाल के सालों में नेटो चीन की अफ़्रीका में बढ़ती गतिविधियों से भी चिंतित रहा है. चीन ने अफ़्रीका में सैन्य ठिकाने भी बनाए हैं.
ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा था, "जब चीन की बात आती है तो मुझे नहीं लगता कि इस टेबल पर बैठा कोई भी चीन के साथ नए शीत युद्ध में जाना चाहता है."
नेटो के चीन पर इस कड़े संदेश से पहले जी-7 समूह ने उसकी निंदा की थी. पिछले सप्ताह इंग्लैंड में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के इस समूह ने बैठक की थी.
एक प्रेस विज्ञप्ति में जी-7 देशों ने मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर चीन की आलोचना की थी और कोविड-19 की उत्पत्ति की पारदर्शी जाँच की मांग की थी.
जवाब में चीन के ब्रिटेन स्थित दूतावास ने जी-7 समूह पर 'झूठ, अफ़वाहें और निराधार दोषारोपण' करने का आरोप लगाया.
नेटो क्या है?
- नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइज़ेशन को नेटो के नाम से जाना जाता है जो दुनिया का सबसे ताक़तवर क्षेत्रीय रक्षा गठबंधन है.
- 1949 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वामपंथी विस्तार के ख़तरे का सामना करने के लिए इसका गठन हुआ था.
- यह सहयोगियों के बीच सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर स्थापित किया गया था.
- शुरुआत में इसके 12 सदस्य थे जो अब 30 हो चुके हैं.
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