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इमरान ख़ान बोले, पाकिस्तान बातचीत को तैयार लेकिन पहले भारत करे ये काम - उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते इमरान ख़ान का एक इंटरव्यू और विपक्ष से उनकी तकरार से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भारत से एक बार फिर बातचीत शुरू करने की पेशकश की है.
इमरान ख़ान ने कहा है कि भारत अगर कश्मीर में पुरानी स्थिति को बहाल करने का सिर्फ़ रोडमैप भी देता है तो पाकिस्तान उसके साथ बातचीत करने के लिए तैयार है.
इमरान ख़ान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिये एक इंटरव्यू में ये बातें कहीं.
पाकिस्तान के सभी अख़बारों ने इमरान ख़ान के इस इंटरव्यू को पहले पन्ने पर छापा है.
इमरान ख़ान ने कहा, "भारत ने कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म करके रेडलाइन क्रॉस की है, लेकिन भारत अगर सिर्फ़ यह रोडमैप दे दे कि वो अगस्त 2019 के फ़ैसले को ख़त्म करने के लिए क्या-क्या क़दम उठाएगा तो बातचीत की बहाली के लिए पाकिस्तान के लिए यह स्वीकार्य होगा."
इमरान ख़ान ने हालांकि इस बात को फिर दोहराया कि भारत का यह क़दम अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियमों का सरासर उल्लंघन करता है, लेकिन कश्मीर को लेकर उनके रुख़ में नरमी को साफ़ तौर पर देखा जा सकता है.
भारत ने संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत कश्मीर को मिलने वाले विशेष राज्य के दर्जे को पाँच अगस्त 2019 को समाप्त कर दिया था और कश्मीर से राज्य का दर्जा छीनकर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील कर दिया था.
'खुले दिल से रिश्ते रखना चाहता है पाकिस्तान'
भारत के इस क़दम के बाद पाकिस्तान का हमेशा यही कहना रहा है कि जब तक कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली नहीं हो जाती, भारत से किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है, लेकिन अब इमरान ख़ान कह रहे हैं कि भारत अगर सिर्फ़ अपने फ़ैसले को रद्द करने का रोडमैप भी बता दे तो पाकिस्तान बातचीत के लिए तैयार है.
लेकिन पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फ़व्वाद चौधरी ने कहा है कि पाकिस्तान की कश्मीर पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं आया है.
अख़बार जंग के अनुसार, फ़व्वाद चौधरी ने कहा कि भारत पहले पाँच अगस्त, 2019 के फ़ैसलों को वापस लेने की घोषणा करे फिर रोडमैप के ज़रिए बताए कि पाँच अगस्त के फ़ैसले को वापस लेने के लिए कब क़ानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी.
उन्होंने कहा कि इसके बाद ही पाकिस्तान भारत से बातचीत के लिए तैयार होगा.
इसी इंटरव्यू में इमरान ख़ान ने कहा कि वो भारत के साथ हमेशा से खुले दिल से रिश्ते रखने के इच्छुक रहे हैं.
उनका कहना था कि सभी इस बात को जानते हैं कि अगर आप भारतीय उप-महाद्वीप में ग़रीबी को कम करना चाहते हैं तो इसके लिए बेहतरीन रास्ता यही है कि एक दूसरे के साथ व्यापार को बढ़ाया जाये. इसके लिए उन्होंने यूरोपीय यूनियन का उदाहरण दिया.
हालांकि इमरान ख़ान ने यह भी कहा कि भारत की तरफ़ से बातचीत शुरू करने के बारे में अभी तक कोई जवाब नहीं आया है.
'अफ़ग़ानिस्तान में 'स्ट्रैटेजिक डेप्थ' की नीति बदल दी है'
रॉयटर्स को दिए इसी इंटरव्यू में इमरान ख़ान ने अफ़ग़ानिस्तान के बारे में कहा कि उनकी सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान में दोस्ताना सरकार बनाने के लिए 'स्ट्रैटेजिक डेप्थ' यानी 'सामरिक गहराई' की दशकों पुरानी नीति बदल दी है.
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अपनी पसंद की सरकार लाने के लिए पाकिस्तान कोई जोड़तोड़ की कोशिश नहीं करेगा बल्कि अफ़ग़ानिस्तान की जनता जिसको सत्ता में लाएगी, पाकिस्तान उसे स्वीकार करेगा और उसी से बातचीत करेगा.
इमरान ख़ान ने इस बात की आशंका जताई कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना के वापस लौटने के बाद वहां एक बार गृह युद्ध शुरू हो सकता है.
उन्होंने कहा कि जब से अमेरिका ने सितंबर तक अपनी सेना को वापस बुलाने की घोषणा की है, उसके बाद से अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा में इज़ाफ़ा हुआ है और तालिबान समझते हैं कि वो यह जंग जीत गए हैं.
इमरान ने कहा कि अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान से किसी तरह की रियायत लेना आसान नहीं होगा.
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में और ख़ून-ख़राबा ना हो, इससे बचने के लिए वो अफ़ग़ानिस्तान और अमेरिका के विशेष दूत ज़िल्मे ख़लीलज़ाद की मदद से राजनीतिक समाधान की कोशिश कर रहे हैं.
FATF से ब्लैक लिस्ट होने का ख़तरा टल गया: पाकिस्तानी वित्त मंत्री
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान का कहना है कि अब उन्हें एफ़एटीएफ़ से ब्लैक लिस्ट होने का ख़तरा टल गया है.
दुनिया भर की वित्तीय अनियमितताओं, मनी लॉन्ड्रिंग और चरमपंथ के वित्तपोषण पर नज़र रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था एफ़एटीएफ़ यानी फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था. आम तौर पर इस लिस्ट में आने वाले देशों की निगरानी बढ़ा दी जाती है.
अख़बार के अनुसार एफ़एटीएफ़ ने अपनी दूसरी रिपोर्ट में इस बात को स्वीकार किया है कि मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फ़ंडिग की बहुत सी कमज़ोरियों पर क़ाबू पाने में पाकिस्तान कामयाब हुआ है.
पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय का कहना है कि एफ़एटीएफ़ की 40 शर्तों में से 31 पर पाकिस्तान ने काफ़ी प्रगति की है. इसी महीने के अंत में होने वाली एफ़एटीएफ़ की बैठक में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखने पर पुनर्विचार किया जाएगा.
पाकिस्तान का कहना है कि अब पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने की आशंका ख़त्म हो गई है और बहुत संभव है कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से भी निकाल दिया जाए.
पीडीएम चाहती है, सेना मेरी हुकूमत गिरा दे: इमरान ख़ान
इधर इमरान ख़ान और विपक्ष का एक दूसरे पर हमला जारी है. इमरान ख़ान ने विपक्षी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) पर हमला करते हुए कहा है कि ख़ुद को लोकतांत्रिक कहने वाली पार्टियां पाकिस्तान की सेना से कह रही हैं कि वो मेरी सरकार को गिरा दे.
अख़बार जंग के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान की स्थापना के बाद से पाकिस्तान में सिस्टम बदलने का सबसे बड़ा संघर्ष इस वक़्त जारी है.
उन्होंने कहा, "विपक्ष मेरी सरकार गिराने के लिए कुछ भी करने को तैयार है, उनकी लड़ाई निजी स्वार्थ के लिए है क्योंकि उनके अरबों रुपए बाहर पड़े हुए हैं."
केंद्रीय रक्षा मंत्री परवेज़ खटक ने भी विपक्षी गठबंधन को अब केवल दो पार्टियों का गठबंधन क़रार दिया है. परवेज़ खटक के अनुसार पीडीएम में अब केवल मुस्लिम लीग (नवाज़) और जमीयत-उल-इस्लाम (जेयूआई) रह गई है. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी अब पीडीएम का हिस्सा नहीं है.
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