ईरान की नौसेना का सबसे बड़ा जहाज़ डूबा, इसराइल के साथ इस क्षेत्र में रहा है तनाव

ईरान की नौसेना का सबसे बड़ा जहाज़ आग लगने के बाद ओमान की खाड़ी में डूब गया है.

ईरानी मीडिया के अनुसार ख़र्ग नाम के इस जहाज़ के चालक दल को सुरक्षित बचा लिया गया है.

जहाज़ में आग कैसे लगी, इसका कोई ब्यौरा नहीं दिया गया है.

लेकिन ये समुद्री इलाक़ा काफ़ी संवेदनशील रहा है, जो हाल के वर्षों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव का केंद्र रहा है. हाल के महीनों में ईरान और इसराइल एक-दूसरे के जहाज़ों पर हमले के आरोप लगाते रहे हैं.

ओमान की खाड़ी का ये जलमार्ग होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़ता है, जो एक सँकरा जलमार्ग है और जहाँ से दुनिया की कुल तेल सप्लाई का पाँचवाँ हिस्सा गुज़रता है.

इसी बीच बुधवार को ही ईरान की राजधानी तेहरान में भी एक तेल रिफ़ाइनरी में आग लग गई है जिसे बुझाने के लिए लगातार दूसरे दिन कोशिश हो रही है.

ईरान के तेल मंत्रालय की समाचार एजेंसी शना के अनुसार सरकारी तेल कंपनी तॉन्दगूयान पेट्रोकेमिकल कंपनी की इस रिफ़ाइनरी में बुधवार रात को आग लग गई जिसके बाद तेहरान के आसमान पर धुएँ का काला बादल छा गया.

एजेंसी के अनुसार ईरान के तेल मंत्री बिजान ज़ंगनेह ने रात को घटनास्थल का दौरा कर लोगों को भरोसा दिया कि इससे तेल की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

हालाँकि इसके बाद भी गुरुवार को ईरान में पेट्रोल स्टेशनों पर लोगों की क़तार लग गई. ईरान में सप्ताहांत गुरुवार से शुरू होता है.

ख़र्ग - ईरानी नौसेना का सबसे बड़ा जहाज़

ईरान के सरकारी टीवी पर बताया गया है कि ख़र्ग ईरान के सबसे बड़ा नौसैनिक जहाज़ था, जिसमें बुधवार रात 2:25 मिनट पर आग लग गई.

ईरानी नेवी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अग्निशमन दल ने कोई 20 घंटे तक आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन अंत में ये जहाज़ डूब गया.

तस्नीम न्यूज़ एजेंसी पर जारी बयान में कहा गया है कि ये जहाज़ कुछ दिन पहले ईरान के जास्क बंदरगाह से एक ट्रेनिंग मिशन पर निकला था और अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में गया था.

नेवी के जानकारों के मुताबिक़ ये जहाज़ ब्रिटेन में बना था और 1977 में पानी में उतारा गया था. भार (टनेज़) के हिसाब से ये जहाज़ ईरानी नौसेना का सबसे बड़ा जहाज़ था.

ईरान की सरकारी एजेंसी इरना के अनुसार इस जहाज़ ने चार से भी अधिक दशक से ईरानी नौसेना को ट्रेनिंग के काम में मदद दी थी.

अप्रैल में ईरान ने कहा था कि उसके एक जहाज़ पर लाल सागर में हमला हुआ है.

ईरान और इसराइल के बीच फ़रवरी के अंत से ही इस इलाक़े में तनाव रहा है. दोनों ही देश एक-दूसरे के मालवाहक जहाज़ों पर हमले केआरोप लगाते रहे हैं.

जहाज़ों पर हमले की घटनाओं को लेकर तकरार ऐसे समय बढ़ी हैं जब अमेरिका में जो बाइडन ने जनवरी में राष्ट्रपति बनने के बाद ईरान को लेकर सरकार के रूख़ में बदलाव का संकेत दिया है.

बाइडन ने कहा है कि वो ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में 2015 में हुए अंतरराष्ट्रीय समझौते में फिर शामिल हो जाएँगे, अगर ईरान इसे पूरी तरह से लागू करता है.

उनके पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप ने इस संधि से अमेरिका को अलग कर लिया था. उसके इस क़दम की इसराइल ने प्रशंसा की थी.

ट्रंप ने 2018 में समझौते को ईरान के हित में बताते हुए इससे नाता तोड़ कर ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे.

हालाँकि अमेरिका के समझौता तोड़ने के बाद ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, चीन और रूस ने समझौते के बरकरार रहने की उम्मीदें ज़ाहिर की थीं.

ईरान ज़ोर देकर कहता है रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

लेकिन शक था कि ईरान परमाणु बम बना रहा है और इसी आधार पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने साल 2010 में ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए थे.

साल 2015 में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर चीन, फ़्रांस, जर्मनी, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के साथ समझौता किया था.

इस समझौते के तहत ईरान प्रतिबंधों में राहत के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए तैयार हो गया था.

क्यों अहम है होर्मूज़ की खाड़ी?

होर्मूज़ की खाड़ी के एक ओर अमरीका समर्थक अरब देश हैं और दूसरी ओर ईरान. ओमान और ईरान के बीच कुछ क्षेत्र में ये खाड़ी सिर्फ़ 21 मील चौड़ी है.

यहाँ दो समुद्री रास्ते हैं. एक जहाज़ों के जाने के लिए और एक आने के लिए.

यूँ तो ये खाड़ी बेहद सँकरी है, लेकिन ये इतनी गहरी है कि यहाँ से दुनिया के सबसे बड़े जहाज़ और तेल टैंकर आसानी से गुज़र सकते हैं.

मध्य-पूर्व से निकलने वाला तेल होर्मूज़ के रास्ते ही एशिया, यूरोप, अमरीका और दुनिया के अन्य बाज़ारों में पहुँचता है.

इस खाड़ी से रोज़ाना एक करोड़ 90 लाख बैरल तेल गुज़रता है. यानी दुनिया का 20 फ़ीसदी कच्चा तेल यहीं से होकर जाता है.

यानी दुनिया में सबसे ज़्यादा कच्चा तेल एक समय अगर कहीं होता है तो यहीं होता है.

इसकी तुलना में स्वेज़ नहर से 55 लाख बैरल और मलक्का की खाड़ी से एक करोड़ 60 लाख बैरल तेल गुज़रता है.

ईरान भी अपना तेल इसी रास्ते से दुनिया भर में भेजता है. वो धमकी देता रहा है कि वो होर्मूज़ की खाड़ी को बंद करके यहाँ से तेल के निर्यात को रोक देगा.

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