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इसराइल-ग़ज़ा संघर्ष: अमेरिका ने फ़लस्तीनियों से किए कई वादे, ट्रंप से अलग बाइडन प्रशासन ने अपनाया रुख़
अमेरिका ने फ़लस्तीनियों के साथ बिगड़े रिश्तों को सुधारने का वादा किया है. इसके लिए वह यरूशलम में उस वाणिज्य दूतावास को फिर से खोलेगा, जिसे ट्रंप प्रशासन ने बंद कर दिया था.
इसके साथ ही अमेरिका ने इसराइल और हमास के बीच हुए ताज़ा संघर्ष के बाद ग़ज़ा में हुए नुक़सान की भरपाई के लिए मदद देने का भी वादा किया है.
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में फ़लस्तीनी नेताओं से मुलाक़ात के बाद यह ऐलान किया.
उन्होंने यरूशलम में इसराइली प्रधानमंत्री से भी मुलाक़ात की और दोहराया कि 'इसराइल की सुरक्षा के लिए अमेरिका पूरी तरह प्रतिबद्ध है.'
इस महीने इसराइल और ग़ज़ा में हमास के चरमपंथियों के बीच 11 दिन संघर्ष चला जिसमें 250 से ज़्यादा लोगों की जान गई. ज़्यादातर मौतें ग़ज़ा में हुईं.
इस संघर्ष से पहले क़ब्ज़े वाले पूर्वी यरूशलम में इसराइली और फ़लस्तीनियों के बीच कई हफ़्तों से तनाव बना हुआ था. फिर दोनों पक्षों के बीच पूर्वी यरूशलम में मौजूद अल-अक़्सा मस्जिद में झड़पें हुईं.
हमास के चरमपंथियों ने इसराइल को अल-अक़्सा से हटने की चेतावनी देने के बाद रॉकेट दाग़ना शुरू कर दिया, जिसके बदले में इसराइल की ओर से हवाई हमले किए गए.
ग़ज़ा में नुक़सान की भरपाई के लिए मदद देगा अमेरिका
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने ट्वीट किया है कि उन्होंने फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और प्रधानमंत्री मोहम्मद इश्तियाह के साथ मंगलवार को रामल्ला में हुई बातचीत के दौरान 'फ़लस्तीनियों के साथ अमेरिका की साझेदारी बढ़ाने' पर चर्चा की.
उन्होंने वादा किया कि वह यरूशलम में उस वाणिज्य दूतावास को फिर खोलने की प्रक्रिया तेज़ करेंगे, जो अमेरिका और फ़लस्तीनियों के बीच राजनयिक रिश्तों के लिए काफ़ी अहम था.
इस दूतावास को 2019 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बंद कर दिया था जिससे फ़लस्तीनी प्राधिकरण नाराज़ हो गया था और दोनों पक्षों के रिश्ते ख़राब हो गए थे.
इसराइल में अमेरिकी दूतावास को ट्रंप ने तेल अवीव से यरूशलम शिफ़्ट कर दिया था और फ़लस्तीनियों को भी इसके तहत डाल दिया था.
फ़लस्तीनी प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया है कि वॉशिंगटन डीसी में फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन (पीएलओ) के उस दफ़्तर को फिर से खोलने की भी चर्चा चल रही है, जिसे ट्रंप प्रशासन के दौरान बंद कर दिया गया था.
बाइडन प्रशासन ने हाल में कहा है कि ग़ज़ा में पुनर्निर्माण कार्यों के लिए वह कांग्रेस से सात करोड़ 50 लाख डॉलर की मदद की मंज़ूरी मांगेगा.
ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिका ग़ज़ा के लिए तुरंत 55 लाख डॉलर की मदद जारी करेगा और तीन करोड़ 20 लाख डॉलर यूनाइटेड नेशंस रिलीफ़ एंड वर्क्स एजेंसी देगी जो फ़लस्तीनी शरणार्थियों की मदद करती है.
मगर ब्लिंकन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि ग़ज़ा पर नियंत्रण रखने वाले हमास को इससे फ़ायदा न हो. हमास को अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और इसराइल ने आतंकवादी संगठन की सूची में डाला हुआ है.
संघर्ष विराम बनाए रखने पर ज़ोर
ब्लिंकन मंगलवार से मध्यपूर्व की तीन दिन की यात्रा पर हैं. सबसे पहले वह यरूशलम पहुँचे और इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से मुलाक़ात की.
ब्लिंकन ने ट्वीट किया, "शांति, सुरक्षा और सभी का सम्मान करने के महत्व पर चर्चा करते हुए मैंने इसराइल की सुरक्षा के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता को दोहराया."
नेतन्याहू ने कहा कि वह पिछले दिनों के संघर्ष के दौरान इसराइल के आत्मरक्षा के अधिकार का पूरी मज़बूती के साथ समर्थन के लिए वह अमेरिका का धन्यवाद करते हैं.
उन्होंने कहा, "हम भी आत्मरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को सार्थक बनाएंगे. अगर हमास शांति भंग करके इसराइल पर हमला करता है तो हमारी प्रतिक्रिया बहुत कड़ी होगी."
नेतन्याहू ने यह भी कहा कि उन्होंने फ़लस्तीनी रॉकेट हमलों से इसराइल को बचाने वाले आयरन डोम मिसाइल सिस्टम को मज़बूत करने को लेकर भी ब्लिंकन से चर्चा की. साथ ही, इस पर भी बात हुई कि हमास के पास दोबारा हथियार न पहुँचें, इसके लिए क्या किया जाए.
ब्लिंकन ने कहा, "राष्ट्रपति बाइडन ने पर्दे के पीछे रहकर जो कूटनीतिक कोशिशें की, उससे हमास और इसराइल के बीच संघर्ष विराम करवाने में मदद मिली और हमें लगता है कि यह बना रहना चाहिए और इसका फ़ायदा उठाना चाहिए."
उन्होंने कहा, "हमें मालूम है कि फिर हिंसा न हो, इसे रोकने के लिए बहुत सारे मसलों और चुनौतियों से निपटाना होगा. और इसकी शुरुआत ग़ज़ा में मानवीय संकट को दूर करने और पुनर्निर्माण से होनी चाहिए."
जान-माल का भारी नुक़सान
रविवार को संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि हाल के संघर्ष में 242 फ़लस्तीनी मारे गए जिनमें 66 बच्चे थे और 38 महिलाएं. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संगठन ने इस बात की पुष्टि की है मरने वालों में कम से कम 129 लोग आम नागरिक थे.
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इनमें कम से कम 230 मौतें इसराइली हमलों की वजह से हुई हैं और हो सकता है कि बाक़ी मौतें ग़ज़ा से दाग़े हुए रॉकेटों के इसराइल पहुंचने से पहले ही गिर जाने से हुई हों.
इसराइली डिफ़ेंस फ़ोर्सेस ने कहा कि उसने इस संघर्ष के दौरान 200 से ज़्यादा चरमपंथियों को मारा. अभी तक हमास और इस्लामिक जिहाद ने यह जानकारी नहीं दी है कि उनके कितने लड़ाके मारे गए हैं.
इसराइल के मुताबिक़, उसके यहां फ़लस्तीनी रॉकेटों, आग या फिर हमलों के दौरान शेल्टर की ओर जाते हुए 13 लोगों की मौत हुई जिनमें दो बच्चे और तीन विदेशी नागरिक थे.
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि फ़लस्तीनी हाउसिंग मंत्रालय ने कहा है कि 258 इमारतें जिनमें 1,042 घर या दुकानें थीं, तबाह हुई हैं. इसके अलावा 769 रिहाइशी इमारतों को गंभीर नुक़सान पहुंचा है जबकि 14,536 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं.
54 शिक्षण संस्थान, छह अस्पताल और 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. इसके अलावा पानी और बिजली के इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी नुक़सान पहुंचा है.
फ़लस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि इस नुक़सान की भरपाई में लाखों डॉलर का ख़र्च आएगा.
इसराइली सरकार ने अभी तक यह नहीं बताया है कि उनके यहां कितना नुक़सान हुआ है मगर रॉकेट हमलों में कई सारी इमारतों और वाहनों को नुक़सान पहुँचा है.
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