इसराइल ने हमास के सैन्य प्रमुख को मारने के लिए कई बार लगाया निशाना

गज़ा

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इसराइल और फ़लस्तीनी चरमपंथियों के बीच गज़ा में जारी संघर्ष 10वें दिन भी जारी है. इसराइल का कहना है कि उसने फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास के कमांडरों के घरों पर हमले किए हैं,

इसराइल ने कहा है कि उसने हमास के सैन्य प्रमुख मोहम्मद देइफ़ को कई बार मारने की कोशिश की. मंगलवार रात को हुए उसके हमलों में दो चरमपंथी मारे गए.

उधर इसराइल पर रॉकेटों से हमले हुए हैं. हमास का कहना है कि उन्होंने दक्षिण में एक एयरबेस को निशाना बनाया है.

दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम के प्रयास हो रहे हैं मगर उनमें कोई प्रगति होती नहीं दिख रही.

फ़्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मिस्र और जॉर्डन के साथ मिलकर हिंसा रूकवाने के लिए एक प्रस्ताव रखा है, मगर ये एक मसौदा भर है.

अमेरिका लगातार सुरक्षा परिषद से एक संयुक्त बयान जारी करने की कोशिशों में बाधा डाल रहा है, हालाँकि उसने युद्धविराम की अपील की है.

पिछले 10 दिन से जारी हिंसा में अब तक कम-से-कम 219 लोगों की जान जा चुकी है.

गज़ा पर नियंत्रण करने वाले हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मारे गए लोगों में लगभग 100 औरतें और बच्चे हैं.

इसराइल का कहना है कि गज़ा में मारे जाने वालों में कम-से-कम 150 चरमपंथी शामिल हैं. हमास ने अपने लोगों की मौत के बारे में कोई आँकड़ा नहीं दिया है.

इसराइल के अनुसार उनके यहाँ 12 लोगों की मौत हुई है जिनमें दो बच्चे शामिल हैं.

उसका कहना है कि गज़ा से चरमपंथियों ने उनके यहाँ लगभग पौने चार हज़ार रॉकेट दागे हैं.

वर्षों पीछे चला गया हमासः नेतन्याहू

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि गज़ा में सैन्य अभियान "जब तक ज़रूरी हो चलता रहेगा".

उन्होंने साथ ही दक्षिणी इसराइल में अधिकारियों से कहा है कि ये अभियान "कई दिनों में" ख़त्म हो सकता है.

नेतन्याहू ने दावा किया है कि इस बार हमास को ऐसे झटके मिले हैं, जिसकी उसे उम्मीद नहीं थी और वो वर्षों पीछे चले गए हैं.

नेतन्याहू ने कहा, "हमारे आसपास के दुश्मन देख सकते हैं कि हम अपने ख़िलाफ़ हमलों के लिए क्या क़ीमत वसूलते हैं."

18 मई को गज़ा से आते मिसाइलों को रोकता इसराइली मिसाइल रोधी सिस्टम

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हमास के सैन्य प्रमुख पर निशाना

मंगलवार को रात भर दोनों पक्षों के बीच हमले होते रहे.

इसराइली सेना ने कहा है कि उनके लड़ाकू विमानों ने हमास के सैन्य ठिकानों और कमांडरों के घरों पर हमले किए हैं.

गज़ा में मौजूद बीबीसी संवाददाता रश्दी अबुआलूफ़ का है कि गज़ा में इसराइली विमानों ने एक इमारत के अपार्टमेंट पर 70 से ज़्यादा हमले किए जिसके बाद वहाँ दो फ़लस्तीनी चरमपंथियों की मौत हो गई.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ गज़ा के ख़ान यूनस इलाक़े में 50 हमले हुए और चरमपंथी गुट के ट्रेनिंग ठिकानों, हमास के एक सिक्योरिटी कम्पाउंड, सड़कों और फ़ार्मों को निशाना बनाया गया.

इसराइली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हिडाइ ज़िल्बरमैन ने कहा, "इस पूरे अभियान में हमने मोहम्मद देइफ़ को मारने की कोशिश की. हमने कई बार प्रयास किया."

मोहम्मद देइफ़ हमास की सैन्य शाखा इज़्ज़दी अल-क़साम ब्रिगेड के प्रमुख हैं. उनपर पहले भी कई बार जानलेवा हमले हो चुके हैं. 2014 में आख़िरी बार छिड़ी लड़ाई में भी उनपर हमला हुआ था.

वो पर्दे के पीछे रहकर काम करते हैं और उनका ठिकाना किसी को नहीं पता है.

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कैसे भड़की हिंसा

संघर्ष का ये सिलसिला यरुशलम में पिछले लगभग एक महीने से जारी अशांति के बाद शुरू हुआ है.

इसकी शुरुआत पूर्वी यरुशलम के शेख़ जर्रा इलाक़े से फ़लस्तीनी परिवारों को निकालने की धमकी के बाद शुरू हुईं जिन्हें यहूदी अपनी ज़मीन बताते हैं और वहाँ बसना चाहते हैं. इस वजह से वहाँ अरब आबादी वाले इलाक़ों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हो रही थीं.

7 मई को यरुशलम की अल-अक़्सा मस्जिद के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई.

अल-अक़्सा मस्जिद के पास पहले भी दोनों पक्षों के बीच झड़प होती रही है मगर 7 मई को हुई हिंसा पिछले कई सालों में सबसे गंभीर थी.

इसके बाद तनाव बढ़ता गया और पिछले सोमवार से ही यहूदियों और मुसलमानों दोनों के लिए पवित्र माने जाने वाले यरुशलम में भीषण हिंसा शुरू हो गई.

हमास ने इसराइल को यहाँ से हटने की चेतावनी देते हुए रॉकेट दागे और फिर इसराइल ने भी जवाब में हवाई हमले किए. इससे पैदा हुई हिंसा एक हफ़्ते के बाद अब भी जारी है.

हालाँकि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच समझौता कराने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं.

इसराइल

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क्या है यरुशलम का विवाद?

1967 के मध्य पूर्व युद्ध के बाद इसराइल ने पूर्वी यरुशलम को नियंत्रण में ले लिया था और वो पूरे शहर को अपनी राजधानी मानता है.

हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसका समर्थन नहीं करता. फ़लस्तीनी पूर्वी यरुशलम को भविष्य के एक आज़ाद मुल्क़ की राजधानी के तौर पर देखते हैं.

पिछले कुछ दिनों से इलाक़े में तनाव बढ़ा है. आरोप है कि ज़मीन के इस हिस्से पर हक़ जताने वाले यहूदी फलस्तीनियों को बेदख़ल करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे लेकर विवाद है.

अक्तूबर 2016 में संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक शाखा यूनेस्को की कार्यकारी बोर्ड ने एक विवादित प्रस्ताव को पारित करते हुए कहा था कि यरुशलम में मौजूद ऐतिहासिक अल-अक्सा मस्जिद पर यहूदियों का कोई दावा नहीं है.

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यूनेस्को की कार्यकारी समिति ने यह प्रस्ताव पास किया था.

इस प्रस्ताव में कहा गया था कि अल-अक्सा मस्जिद पर मुसलमानों का अधिकार है और यहूदियों से उसका कोई ऐतिहासिक संबंध नहीं है.

जबकि यहूदी उसे टेंपल माउंट कहते रहे हैं और यहूदियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता रहा है.

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