अर्दोआन ने इसराइल-फ़लस्तीनी संकट पर इस्लामिक देशों और हमास को लगाया फ़ोन

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इसराइल औऱ फलस्तीनियों के बीच जारी हिंसा के बीच अंतराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्धविराम की अपील कर रहा है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचिप तैय्यप अर्दोआन ने अल-अक़्सा मस्जिद के पास हिंसक झड़प और फ़लस्तीनियों के अधिकारों को लेकर कई इस्लामिक देशों के प्रमुखों को फ़ोन किया.
अर्दोआन ने मलेशिया, जॉर्डन, कुवैत के राष्ट्र प्रमुखों और हमास के राजनीतिक प्रमुख से इसराइल को लेकर बात की है.
तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि अर्दोआन ने हमास के राजनीति ब्यूरो प्रमुख इस्माइल हानिया से भी बात की.
अर्दोआन ने अल-अक़्सा मस्जिद पर इसराइली हमले को 'आतंकी कार्रवाई' बताते हुए इस्माइल हानिया से कहा कि यह हमला केवल मुसलमानों पर नहीं बल्कि पूरी मानवता पर है.
अर्दोआन ने कहा, ''इसराइली कब्जे और उसके आतंक को रोकने के लिए वे पूरी दुनिया को एक करने की हर संभव कोशिश करेंगे, लेकिन उससे पहले इस्लामिक देशों को एकजुट करने की ज़रूरत है.''
सोमवार को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी ने भी कहा कि उनका देश, "युद्धविराम के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा है...और उम्मीद है कि ये मुमकिन होगा."
रविवार को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने एक आपात बैठक की और अध्यक्ष एंटोनियो गुटरेज़ ने चेतावनी दी की अगर लड़ाई जारी रही तो हम "एक नहीं रोक सकने वाली इंसानी आपदा" तक पहुंच जाएंगे. उन्होंने तुरंत की "हिंसा रोकने" की अपील की.
संयुक्त राष्ट्र ने गज़ा में ईंधन की कमी होने की भी चेतावनी दी है और कहा है कि इससे अस्पतालों और अन्य ज़रूरी सेवाओं पर असर पड़ सकता है.
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लेकिन इसराइल के राष्ट्रपति बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि गज़ा में फ़लस्तीनी चरमपंथी गुट हमास के ख़िलाफ़ इसराइली सैन्य अभियान 'पूरी ताकत' के साथ जारी रहेगा.
नेतन्याहू ने चेतावनी भरे लहज़े में कहा, "जब तक ज़रूरी होगा, हम सैन्य कार्यवाई जारी रखेंगे...शांति क़ायम होने में अभी वक़्त लगेगा."
इसराइली सेना का कहना है कि फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने पिछले एक सप्ताह में इसराइल पर 3,000 से ज़्यादा रॉकेट दागे हैं. उनका कहना है कि पिछले एक सप्ताह से जारी हमलों में इसराइल में दो बच्चों समेत 10 लोगों की मौत हुई है.
इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच संघर्ष में गज़ा में अब तक कुल 197 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 58 बच्चे और 34 महिलाएं शामिल हैं.

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हमले में कुल 1,235 लोग घायल भी हुए हैं. यह जानकारी हमास नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी है. इसराइल का कहना है कि मरने वालों में हमास के कई चरमपंथी भी हैं.
इसराइली सेना का कहना है कि वो हमास के नेताओं और उन ठिकानों को निशाना बना रही है जो हमास से जुड़े हैं.
सेना ने कहा कि उसने हमास नेता याह्या सिन्वर और उनके भाई मुहम्मद सिन्वर के घरों को भी नष्ट कर दिया है.
सेना के मुताबिक़ ये दोनों भाई इस संघर्ष के लिए लॉजिस्टिक और लोगों के प्रबंध का ज़िम्मा संभाले हुए थे.
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, हमले के वक़्त दोनों भाई घर में रहे हों, इसकी संभावना न के बराबर है.

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क्या सीज़फ़ायर की कोई उम्मीद है?
पॉल एडम्स, बीबीसी कूटनीतिक मामलों के संवाददाता
क्या गज़ा में चल रही इसराइली सैन्य कार्यवाई जिसे वो "दीवारों की रखवाली" बता रहे हैं, ख़त्म होने वाली है?
ऐसा नहीं लगता है क्योंकि इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि कि हम लड़ाई "पूरी ताकत से" जारी रखेंगो और इसमें "समय लगेगा."
रविवार को एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि उनपर "दवाब" है लेकिन उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपित जो बाइडन को समर्थन के लिए शुक्रिया कहा.
बाइडन के राजदूत हैडी अम्र पिछले शुक्रवार से इसराइल में हैं, और वहां के अधिकारियों से इस मुद्दे पर बात कर रहे हैं.
कई दूसरे देशों की तरह अमेरिका भी हमास को एक 'अतंकवादी संगठन' मानता है इसलिए वो उनसे मुलाकात नहीं करेंगे.
हमास को कोई भी संदेश देना होगा तो उसे पहले की तरह ही मिस्त्र के सहारे भेजना पड़ेगा.
स्थानीय समाचारों के मुताबिक हमास कई दिनों से कुछ तरह के युद्धविराम की पेशकश कर रहा है लेकिन इसराइल की ओर से इन्हें ठुकरा दिया जा रहा है. इसका सीधा मतलब है कि इससे पहले कि लड़ाई ख़त्म हो, इसराइल जितना मुमकिन हो नुकसान पहुंचाना चाहता है.
ये एक पैटर्न की तरह है. इसराइल अपनी सैन्य ताकत का फ़ायदा उठा लेना चाहता है जबतक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों की मौत और गज़ा में मानवाधिकारों को लेकर तेज़ न हो ऑपरेशन ख़त्म करने की मांग तेज़ न हो.
इसराइल का मानना है अभी तक वो स्थिति नहीं आई है.
भारत ने भी चिंता ज़ाहिर की
भारत ने भी यरुशलम और ग़ज़ा में जारी हिंसा को लेकर चिंता जताई है.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी दूत टीएस तिरूमूर्ति ने सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद कहा,"भारत हर तरह की हिंसा की निंदा करता है, तत्काल तनाव ख़त्म करने की अपील करता है."
"भारत फ़लस्तीनियों की जायज़ माँग का समर्थन करता है और दो-राष्ट्र की नीति के ज़रिए समाधान को लेकर वचनबद्ध है."
"भारत ग़ज़ा पट्टी से होने वाले रॉकेट हमलों की निंदा करता है, साथ ही इसराइली बदले की कार्रवाई में भी बहुत बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं जिनमें औरतें और बच्चे भी शामिल हैं जो बहुत दुखद है."

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एक महीने से अशांति
संघर्ष का ये सिलसिला यरुशलम में पिछले लगभग एक महीने से जारी अशांति के बाद शुरू हुआ है.
इसकी शुरुआत पूर्वी यरुशलम के शेख़ जर्रा इलाक़े से फ़लस्तीनी परिवारों को निकालने की धमकी के बाद शुरू हुईं जिन्हें यहूदी अपनी ज़मीन बताते हैं और वहाँ बसना चाहते हैं. इस वजह से वहाँ अरब आबादी वाले इलाक़ों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हो रही थीं.
7 मई को यरुशलम की अल-अक़्सा मस्जिद के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई.
अल-अक़्सा मस्जिद के पास पहले भी दोनों पक्षों के बीच झड़प होती रही है मगर 7 मई को हुई हिंसा पिछले कई सालों में सबसे गंभीर थी.
इसके बाद तनाव बढ़ता गया और पिछले सोमवार से ही यहूदियों और मुसलमानों दोनों के लिए पवित्र माने जाने वाले यरुशलम में भीषण हिंसा शुरू हो गई.
हमास ने इसराइल को यहाँ से हटने की चेतावनी देते हुए रॉकेट दागे और फिर इसराइल ने भी जवाब में हवाई हमले किए. इससे पैदा हुई हिंसा एक हफ़्ते के बाद अब भी जारी है.
हालाँकि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच समझौता कराने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं.
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