इसराइल और फलस्तीनियों का संघर्ष: वायरल हो रहे झूठे और फ़र्जी दावों का फ़ैक्ट चेक

इसराइल और फलस्तीनियों का संघर्ष

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    • Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
    • पदनाम, ख़बरों की रिपोर्टिंग और विश्लेषण

इसराइल और फलस्तीनियों का संघर्ष जब से बढ़ा है, सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में झूठे दावों और भ्रामक कॉन्टेंट की बाढ़ आ गई है.

हम ने दोनों ही पक्षों की तरफ़ से किए जा रहे ऐसे ही कुछ झूठे और फ़र्जी दावों की पड़ताल की, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर ज़ोरदार बहस छिड़ी हुई है.

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ये वीडियो फुटेज दरअसल सीरिया की जंग का है

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इमेज कैप्शन, ये वीडियो फुटेज दरअसल सीरिया की जंग का है

रॉकेट छोड़े जाने का वीडियो सीरिया का है, ग़ज़ा का नहीं

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के एक प्रवक्ता ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि हमास 'सघन आबादी वाले इलाक़े से ' रॉकेट दाग रहा है.

ओफिर गेंडेल्मैन ने ट्वीट किया, "इन 250 से ज़्यादा रॉकेटों में एक तिहाई ग़ज़ा पट्टी के भीतर ही गिरे, जिससे फ़लस्तीनी लोग मारे गए."

लेकिन उन्होंने जो वीडियो शेयर किया, वो पुराना है और सीरिया का है, न कि ग़ज़ा का.

साल 2018 में ये वीडियो सीरिया के डेरा शहर में विद्रोही गुटों के ख़िलाफ़ वहाँ की सरकार की मिलिट्री कार्रवाई के दौरान लिया गया था.

ट्विटर ने इस ट्वीट को 'मैनिपुलेटेड मीडिया ' यानी फ़र्जी वीडियो करार दिया था. साथ ही ट्विटर ने इस वीडियो के फ़ैक्ट चेक से जुड़े लिंक भी दिए जिससे इस बात की पुष्टि होती थी कि ये वीडियो सीरिया की जंग से जुड़ी है.

आलोचनाओं के बाद प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के प्रवक्ता ओफिर गेंडेल्मैन ने ट्वीट डिलीट कर लिया.

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वीडियो कैप्शन, आयरन डोमः इसराइल को रॉकेट हमलों से बचाने वाला सुरक्षा कवच

'इसराइली सुरक्षा बलों' के नाम पर चलाए जा रहे वायरल ट्वीट्स फ़र्जी हैं

इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्स के हैंडल से किए गए ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट बताकर ट्विटर पर कुछ यूजर्स ऐसे पोस्ट शेयर कर रहे थे, जिनमें ये कहा जा रहा था कि 'हमें बस जान लेना पंसद है' और 'अभी-अभी कुछ बच्चों पर बम गिराए' हैं.

ये स्क्रीनशॉट्स झूठे हैं और ऐसे इमेजेज इंटरनेट पर मुफ़्त में उपलब्ध टूल्स से कोई भी बना सकता है.

इसराइल डिफेंस फोर्स ने कभी भी ऐसे बयान न तो अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर दिए हैं और ना ही किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर.

जिस ट्विटर हैंडल से ये ट्वीट किए गए थे, उसका फ़लस्तीन के प्रति गहरा रुझान और इसराइल विरोधी भावनाएँ साफ़ तौर पर दिख रही थीं.

इस ट्विटर यूजर का ये भी दावा है कि वो व्यंग्य लेख लिखता है.

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जॉर्डन में 'फर्जी जनाजे' का एक वीडियो गज़ा का बताकर सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया

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इमेज कैप्शन, जॉर्डन में 'फर्जी जनाजे' का एक वीडियो गज़ा का बताकर सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया

'फ़र्जी जनाजे' का वीडियो ग़ज़ा का नहीं है

इसराइली सोशल मीडिया पर सक्रिय कुछ लोगों ने एक वीडियो शेयर करते हुए ये दावा किया फ़लस्तीनी लोग एक जनाजे का नाटक कर रहे थे. जिस व्यक्ति का ये कथित तौर पर जनाजा था, वो ग़ज़ा में इसराइल के हवाई हमलों में मारा गया था.

इसराइल समर्थक इन यूजर्स का दावा था कि फ़लस्तीनी लोग ऐसा दुनिया की हमदर्दी पाने के लिए कर रहे थे.

इस वीडियो को इसराइल के विदेश मंत्रालय के एक सलाहकार ने भी शेयर किया था.

वीडियो में किशोर उम्र के लड़कों का एक समूह अपने कंधों पर कुछ लेकर चल रहा था, जो किसी का शव मालूम हो रहा था और वो शव कफ़न से लिपटा हुआ था.

जैसे ही उन्होंने सायरन की आवाज़ सुनी, वे शव को वहीं ज़मीन पर रखकर भाग जाते हैं. ख़ुद को अकेला पाकर वो कथित शव भी खड़ा हो जाता है और वहाँ से भाग जाता है.

हमने अपनी जाँच में पाया कि यही वीडियो मार्च, 2020 में भी पोस्ट किया गया था. उन पोस्ट में वो रिपोर्टें भी शेयर की गई थीं जिनसे ये पता चलता है कि जॉर्डन में लड़कों का एक समूह सख़्त कोरोना लॉकडाउन से बचने के लिए इस जनाजे का नाटक कर रहा था.

इस वीडियो क्लिप को इसराइल समर्थक यूजर्स ने प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 'पैलीवुड' हैशटैग के साथ सैकड़ों बार शेयर किया.

'पैलीवुड' शब्द फ़लस्तीन के सिनेमा उद्योग के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

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ऐसे वीडियो फुटेज शेयर किए गए जिनमें अल अक्सा मस्जिद में आग लगने का दावा किया गया था

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इमेज कैप्शन, ऐसे वीडियो फुटेज शेयर किए गए जिनमें अल अक्सा मस्जिद में आग लगने का दावा किया गया था

'अल अक्सा मस्जिद में आग' लगने वाला वीडियो फ़र्जी था

कुछ फ़लस्तीन समर्थक लोगों ने एक वीडियो शेयर किया है, जिनमें ये दावा किया जा रहा है कि पूर्वी यरूशलम की अल-अक्सा मस्जिद जल रही है.

इन लोगों का ये दावा है कि अल-अक्सा मस्जिद में लगी आग के लिए इसराइल ज़िम्मेदार है.

ये वीडियो असली है लेकिन इसमें जोड़े गए कुछ अतिरिक्त फुटेज को अलग-अलग एंगल से देखने पर ये साफ़ होता है कि आग मस्जिद में नहीं लगी थी बल्कि इसके पास मौजूद एक पेड़ में लगी थी.

पुराने यरूशलम शहर में मौजूद ये अल अक्सा मस्जिद इस्लाम के सबसे पवित्र स्थानों में गिनी जाती है.

लेकिन ये जगह यहूदी धर्म के लिए उतना ही पवित्र स्थान है. यहूदी इसे टेंपल माउंट कहकर बुलाते हैं.

वीडियो में नौजवान यहूदी इसराइली लोगों के एक समूह को वेस्टर्न वॉल के पीछे फ़लस्तीन विरोधी गीत गाते हुए सुना जा सकता है. वीडियो में दूर से धुआं उठता हुआ दिख रहा है.

मस्जिद परिसर में मौजद एक पेड़ में आग लगी थी, जिसकी वजह से कुछ लोगों को ये लगा कि मस्जिद में ही आग लग गई है

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इमेज कैप्शन, मस्जिद परिसर में मौजद एक पेड़ में आग लगी थी, जिसकी वजह से कुछ लोगों को ये लगा कि मस्जिद में ही आग लग गई है

इस आग लगने की वजह को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और इस पर विवाद की स्थिति है.

इसराइली पुलिस ने एक बयान जारी कर कहा था कि फलस्तीनी लोगों ने वहाँ पटाखे फेंके थे, जिसकी वजह से ये आग लगी थी.

लेकिन फ़लस्तीनी पक्ष का कहना था कि इसराइली अधिकारियों ने ग्रेनेड फेंका था, जिससे ये आग लगी.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ वो पेड़ अल अक्सा मस्जिद से महज दस मीटर की दूरी पर था.

आग पर काबू पा लिया गया था और मस्जिद को इससे कोई नुक़सान नहीं पहुँचा था.

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हमास के नियंत्रण वाले इलाके में 'ट्रक पर मिसाइल' वाला वीडियो दरअसल इसराइल के एक युद्धाभ्यास का वीडियो है

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इमेज कैप्शन, हमास के नियंत्रण वाले इलाके में 'ट्रक पर मिसाइल' वाला वीडियो दरअसल इसराइल के एक युद्धाभ्यास का वीडियो है

ग़ज़ा की सड़कों पर मिसाइल दिखाने वाला वीडियो फ़र्जी

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो फुटेज में ये दावा किया गया था कि फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ट्रक से दागी जाने वाली मिसाइलें ग़ज़ा की सड़कों पर लेकर जा रहा है.

इस वीडियो में एक बच्चे की भी आवाज़ सुनी जा सकती है.

इसराइल समर्थक ये ट्विटर हैंडल अमेरिका से ऑपरेट किया जा रहा था. यूजर ने दावा किया था, "एक बार फिर हम देखते हैं कि हमास यहूदी लोगों की हत्या करने के लिए आम शहरियों का मानव ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहा है. ये जानते हुए कि इसराइल मासूम लोगों को नुक़सान पहुँचने के जोखिम के कारण बदले की कार्रवाई नहीं करेगा."

हालाँकि हमने अपनी पड़ताल में ये पाया कि ये वीडियो 25 नवंबर, 2018 को फ़ेसबुक पर अपलोड किया गया था. फ़ेसबुक पोस्ट में ये जानकारी थी कि इसराइल के गैली में अबू स्नैन शहर का ये वीडियो है.

सोशल मीडिया पर ऐसे ही दावों की पड़ताल करने वाले विशेषज्ञ एरिक टोलर का मानना है कि ये वीडियो फुजेट मिसाइलों के मॉडल हैं जिनका इस्तेमाल इसराइल के सैनिक अभ्यास के दौरान किया गया था.

जिस ट्विटर एकाउंट से ये वीडियो पोस्ट किया गया था, उसने बाद में इसे डिलीट कर दिया और 'ग़लत जानकारी' के लिए माफ़ी भी मांगी थी.

(एलिस्टर कोलमन, शयान सरदारीज़ादेह, क्रिस्टोफर गाइल्स और नादेर इब्राहिम की रिपोर्टिंग के साथ.)

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