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पाकिस्तान: सौ साल पुराने हिंदू मंदिर पर हमला
- Author, शुमाइला जाफ़री
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद
इस्लामाबाद में क़रीब एक सदी पुराने हिंदू मंदिर को क्षतिग्रस्त करने के आरोप में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ किया गया है.
बनी गाला थाने में दर्ज़ एफआईआर के अनुसार रावलपिंडी के पुराना किला इलाके में स्थित इस मंदिर पर रविवार शाम को हमला किया गया.
पाकिस्तान की दंड संहिता के ईशनिंदा और दंगा भड़काने की कोशिश के साथ ग़ैर-क़ानूनी तौर पर जमा होने के ख़िलाफ़ लगने वाली धाराओं के तहत ये मामला दर्ज़ किया गया है.
बंटवारे के बाद पिछले 74 सालों से बंद पड़े इस मंदिर को फ़िलहाल पहले जैसी दशा में लाने के लिए 24 मार्च से मरम्मत का काम चल रहा है.
एफआईआर के अनुसार मरम्मत का काम शुरू होने के बाद इस ऐतिहासिक मंदिर के सामने से कुछ अतिक्रमणों को हटाया गया था.
'मंदिर को अपवित्र किया गया'
एफआईआर में कहा गया है कि रविवार शाम साढ़े सात बजे जब मज़दूर काम नहीं कर रहे थे, तब 10-15 लोगों ने मंदिर में घुसकर भवन को क्षतिग्रस्त कर दिया.
मंदिर के दरवाजा तोड़ने के साथ उसकी सीढ़ियों को नुक़सान पहुंचाया गया और मंदिर को अपवित्र भी किया गया.
रिपोर्ट के अनुसार सूचना मिलने के बाद शहर के पुलिस प्रमुख भारी सुरक्षा बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, चूंकि मंदिर की मरम्मत चल रही है, इसलिए इसमें पूजा नहीं होती. न ही मंदिर में कोई मूर्ति है और कोई धार्मिक साहित्य भी वहां नहीं है.
यह एफआईआर अल्पसंख्यकों की संपत्ति की देखरेख करने वाले ट्रस्ट ईटीपीबी के सहायक सुरक्षा अधिकारी सैयद रज़ा अब्बास की शिकायत पर दर्ज़ हुई है.
मंदिर की सुरक्षा की मांग
स्थानीय प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के बाद मरम्मत करने के लिए मंदिर को इसी ट्रस्ट को सौंपा था.
अपने आवेदन में अब्बास ने प्रशासन से इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ मंदिर की सुरक्षा की भी मांग की है.
पूजा न होने के बावज़ूद मंदिर परिसर से अतिक्रमण हटने और मरम्मत का काम शुरू होने का हिंदुओं ने जश्न मनाया. 25 मार्च को हिंदू लोगों ने वहां होली भी खेली.
अतिक्रमण करने वालों ने मंदिर के चारों ओर कपड़ा बाजार बना लिया और मंदिर की चहारदीवारी के भीतर और प्रवेश द्वार पर दुकानें खोल ली थीं.
रावलपिंडी प्रशासन ने शहर के पुराने इलाके को फिर से पहले जैसा बनाने के लिए सुजान सिंह हवेली के एक किलोमीटर दायरे के भीतर के सात छोटे मंदिरों की मरम्मती का फ़ैसला लिया है. पुराना किला का यह माता मंदिर इन्हीं सात मंदिरों में से एक है.
पाकिस्तान में अभी क़रीब 70 लाख जबकि रावलपिंडी में दो हज़ार हिंदू रहते हैं.
मंदिरों पर हुए हालिया हमले
पिछले साल दिसंबर में ख़ैबर पख़्तूनख्वा के करक जिले में एक हिंदू संत की समाधि पर हमला किया गया था.
इस मामले में एक मौलवी के उकसावे पर कुछ लोगों ने समाधि को क्षतिग्रस्त कर उसे अपवित्र कर दिया था.
मामले का पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत स्वत: संज्ञान लिया और आदेश दिया कि दो हफ़्ते के भीतर समाधि की मरम्मत की जाए.
उस घटना में शामिल मौलवी के साथ और लोगों को भी गिरफ़्तार किया गया था.
बाद में वहां राज्य सरकार ने समाधि को फिर से बनाने के साथ एक स्थानीय जिरगा के गठन का भी एलान किया.
इस संस्था को हिंदुओं और मुसलमानों के बीच के तनाव को दूर करने का काम सौंपा गया.
'सरकार हिंदुओं की रक्षा करेगी'
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने दोहराया है कि उनकी सरकार अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए वचनबद्ध है.
इस साल के शुरू में तुर्की के एक चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि हमारे यहां कोई अल्पसंख्यक किसी मुसलमान जितना ही पाकिस्तान का नागरिक है, इसलिए उनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है.
हिंदू समुदाय के मुख्य संरक्षक डॉ रमेश कुमार ने ताज़ा मामला सामने के बाद कहा कि पाकिस्तान के संविधान के तहत हिंदुओं के समान नागरिक अधिकार तय हैं.
उनके अनुसार, हिंदुओं के खिलाफ़ घटने वाली छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो हमारी केंद्रीय और राज्य सरकारें हमेशा हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर हैं. पहले भी ऐसे मामलों में सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है और आगे भी इसे गंभीरता से लिया जाएगा.
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