पाकिस्तान: ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह मंदिर विवाद में हिंदुओं और मुसलमानों में 'सुलह'

पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में मंदिर में दिसंबर में हुई तोड़फ़ोड़ के बाद अब सरकार ने दावा किया है कि दोनों पक्षों के बीच सुलह हो गई है. सरकार द्वारा बनाए गए 'जिरगा' की हिंदू समुदाय और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बातचीत हुई और साथ मिलकर मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक समझौते के अनुसार अभियुक्तों ने दिसंबर मे हुई घटना और 1997 में हुई इसी तरह की एक और घटना के लिए माफ़ी मांगी. मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधियों ने हिंदुओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया.

इस मीटिंग से जुड़ी जानकारियां सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जाएंगी और अभियुक्तों की रिहाई को कोशिश की जाएगी.

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के मुख्यमंत्री महमूद ख़ान ने शनिवार को कहा कि कारक समाधि को तोड़े जाने की घटना निंदनीय थी और धर्मों के बीच शांति और सद्भावना को ख़त्म करने की एक कोशिश थी.

उन्होंने मामले को सुलझाने के लिए 'जिरगा' के सदस्यों की तारीफ़ भी की. उन्होंने उम्मीद जताई कि मुस्लिम उलेमा और हिंदू समुदाय के लोग भविष्य में भी शांति बनाए रखेंगे.

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों इसके लिए सरकार भी कदम उठाएगी और उलेमाओं और स्थानीय लोगों से इसमें भागीदार बनने की अपील की है.

उन्होंने कहा कि संविधान अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी देता है और अल्पसंख्यकों के पूजा के स्थलों को पूरी सुरक्षा दी जाएगी. हिंदू समुदाय के लोगों ने भी मुख्यमंत्री और सरकार का समय पर कदम उठाने के लिए शुक्रिया कहा.

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पुनर्निर्माण का आदेश दिया था

जनवरी में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ़्ते के अंदर हिंदू संत की समाधि का पुनर्निर्माण शुरू करने का आदेश दिया था.

इसके साथ ही ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत की सरकार को कोर्ट में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए इसकी सुनवाई की थी.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुलज़ार अहमद की अगुवाई में तीन सदस्यों की बेंच ने मामले की सुनवाई की थी.

क्या है मामला

दिसंबर में पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के करक ज़िले में हिंदू संत श्री परम हंस जी महाराज की ऐतिहासिक समाधि को स्थानीय लोगों की एक नाराज़ भीड़ ने ढहा दिया था.

पुलिस ने बताया था कि करक ज़िले के एक छोटे से गांव टेरी में भीड़ इस बात को लेकर नाराज़ थी कि एक हिंदू नेता घर बनवा रहे थे और वो घर एक इस समाधि से लगा हुआ था.

करक के ज़िला पुलिस अधिकारी इरफानुल्लाह मारवात ने बीबीसी के स्थानीय प्रतिनिधि सिराजुद्दीन को बताया था कि उस इलाके में कोई हिंदू आबादी नहीं रहती है. स्थानीय लोग इस बात से नाराज़ थे कि जिस जगह पर ये निर्माण कार्य हो रहा था, वो उसे इस समाधि स्थल का ही हिस्सा समझते थे.

हिंदू संत श्री परम हंस जी महाराज की समाधि पर विवाद कोई नई बात नहीं है. इलाके के रूढ़िवादी लोग इस समाधि स्थल का शुरू से ही विरोध करते रहे थे. साल 1997 में इस समाधि पर पहली बार स्थानीय लोगों ने हमला किया था.

हालांकि बाद में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह की प्रांतीय सरकार ने इसका पुनर्निमाण कराया था.

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