जॉर्ज फ़्लॉयड मामला: पहले दिन की सुनवाई में क्या-क्या हुआ?

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इमेज कैप्शन, ट्रायल के क़रीब चार हफ़्ते में पूरा होने का अनुमान है

अमेरिका में अफ़्रीकी मूल के जॉर्ज फ़्लॉयड की हुई मौत के मामले में अभियुक्त पूर्व पुलिसकर्मी डेरेक शॉविन के ख़िलाफ़ ट्रायल सोमवार को शुरू हुआ.

सोमवार को सुनवाई के पहले दिन अभियोजन पक्ष ने जॉर्ज फ्लॉयड की मौत का पूरा वीडियो कोर्टरूम में जूरी के सामने चलाया जिसमें देखा गया कि पुलिसकर्मी डेरेक शॉविन फ्लॉयड पर झुके हुए हैं. अभियोजन पक्ष ने जूरी से डेरेक शॉविन को दोषी करार कर सज़ा देने की गुज़ारिश की.

वहीं बचाव पक्ष ने फ़्लॉयड के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने ड्रग्स का सेवन किया था जो उनकी मौत की एक बड़ी वजह थी.

दूसरे दिन की सुनवाई मंगलवार को स्थानीय समयानुसार 9.30 को शुरू होगी. पूरी सुनवाई के क़रीब चार हफ़्ते में पूरा होने का अनुमान है.

पहले दिन की सुनवाई में क्या क्या हुआ?

अभियोजन पक्ष ने इस मामले में एक नया वीडियो कोर्ट को दिखाया और कहा कि डेरेक नौ मिनट से अधिक देर तक जॉर्ज फ़्लॉयड की गर्दन पर घुटना रखे हुए थे और "यही उनकी मौत की बड़ी वजह थी".

अभियोजक जेरी ब्रैकवेल ने जूरी से कहा कि डेरेक ने फ़्लॉयड की गर्दन को घुटने से दबा कर "अपने पद को धोखा दिया है" और उन्हें हिरासत ने लेने के लिए "ज़रूरत से अधिक ताकत का इस्तेमाल किया".

वहीं बचाव पक्ष के डेरेक के वकील एरिक नेलसन की पूरी कोशिश ये रही कि वो ये साबित करें कि कई फ़्लॉयड की मौत की वजह कुछ और है.

उन्होंने जूरी से कहा कि मामले की सुनवाई "राजनीतिक या सामाजिक आधार पर नहीं" बल्कि सबूतों के आधार पर होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि जिस वक्त फ़्लॉयड को गिरफ्तार किया जा रहा था उनके पास ड्रग्स थे और "पुलिस से छिपाने के लिए उन्होंने वो ड्रग्स निगल लिए थे". उन्होंने कहा कि ये उनकी मौत की बड़ी वजह थी.

जॉर्ज फ़्लॉयड

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इस मामले में पहले दिन तीन गवाहों को कोर्टरूम में बुलाया गया जिनसे अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने सवाल किए.

डोनाल्ड विलियम्स नाम के एक गवाह ने कोर्ट में डेरेक शॉविन की पहचान की. उन्होंने कहा कि फ्लॉयड मौत के वक्त ऐसे तड़प रहे थे जैसी बंद थैली में रखी मछली तड़पती है. उन्होंने कहा, "उनकी जान ऐसे निकल रही थी जैसे बंद थैली में मछली की. फिर उनकी आंखें ऊपर की तरफ हो गईं और बंद होने लगीं. उनके शरीर में जान नहीं बची थी."

उनके इस बयान पर जज ने उन्हें फटकार लगाई और सही शब्दों का इस्तेमाल करने को कहा. फिलहाल बचाव पक्ष को डोनाल्ड विलियम्स से सवाल करने का मौक़ा नहीं मिल पाया है.

ट्रायल शुरू होने के ठीक पहले फ़्लॅायड के परिजन और दोस्तों ने मिनीपोलिस शहर में एक जुलूस निकाला है और शांतिसभा आयोजित की और उनके लिए न्याय की मांग की.

इस दौरान फ़्लॉयड के भाई टेरेन्स ने कहा, "हम लोग ईश्वर से डरने वाले लोग हैं. हमारी चर्च में आस्था है. इसलिए हम सिस्टम से माँग करते हैं कि उन्हें न्याय मिले."

उनके एक और भाई फिलोनिस फ़्लॅायड ने रविवार को संवाददाताओं को कहा, "अभी मेरे दिल में एक बहुत बड़ा छेद है. इसे ठीक नहीं किया जा सकता. हमें जॉर्ज के लिए न्याय चाहिए. हम हत्यारों के लिए सज़ा की माँग करते हैं."

डोनाल्ड विलियम्स
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फ़्लॉयड की मौत के बारे में विलियम्स ने क्या कहा था?

जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद बीबीसी ने 20 मई 2020 को डोनाल्ड विलियम्स से बात की थी. वो इस घटना के प्रत्यक्षदर्शियों में से एक थे.

उनका कहना था कि वो एक दुकान पर रुके थे जब उन्होंने देखा कि पुलिस की कई गाड़ियां वहां मौजूद हैं.

उन्होंने सोचा, "पुलिस यहां है, ज़रूर कुछ न कुछ हुआ हो रहा होगा."

उन्होंने बीबीसी से कहा कि ऐसा लग रहा था कि फ़्लॉयड "गिरफ्तारी का विरोध नहीं कर" रहे थे.

"मैंने देखा कि वो पुलिसकर्मी फ़्लॉयड की गर्दन पर घुटना टिकाए हुए हैं. फ़्लॉयड की नाक से ख़ून बह रहा था. मैं पुलिसकर्मी से ये पूछने के लिए आगे बढ़ा कि यहां क्या हो रहा है. पुलिसकर्मी ने कहा कि ड्रग्स आपका ये हाल करते हैं. "

जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन

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जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद मिनीपोसिल में क्या बदला?

जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के नौ महीनों बाद भी उनके लिए न्याय की मांग कर रहे लोगों का कहना है कि पुलिस को मिल रही आर्थिक मदद बंद की जानी चाहिए और उसे सामाजिक सेवा के लिए खर्च किया जाना चाहिए.

सामाजिक कार्यकर्ताओं के दवाब के चलते बीते साल दिसंबर में मिनीपोलिस सिटी काउंसिल को सिटी बजट में से पुलिसबल के लिए दिए गए 80 लाख डॉलर के बजट को मानसिक स्वास्थ्य और हिंसा रोकने के अभियान में खर्च करने के लिए दिए थे.

फ़्लॉयड की मौत के बाद क़रीब 200 पुलिसकर्मियों ने अपनी नौकरियां छोड़ी हैं. बीते महीने शहर की काउंसिल ने निर्विरोध फ़ैसला लिया है कि 60 लाख डॉलर खर्च कर और पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की जाएगी.

डगलस काउंटी शेरिफ के रूप में काम कर चुके पूर्व पुलिस अधिकारी रिचर्ड पुकेमा ने बीबीसी संवाददाता तारा मेकेल्वी से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पुलिस अधिकारी इस मामले से सीख लेंगे और अपनी शक्तियों और सीमाओं को समझेंगे और समुदाय के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियां निभाएंगे.

जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन

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क्या है पूरा मामला?

पिछले साल मई में मिनेसोटा राज्य के मिनीपोलिस का एक वीडियो वायरल हुआ था. इस वीडियो में अभियुक्त पुलिसकर्मी डेरेक शॉविन ने अपने घुटने से जॉर्ज फ़्लॉयड का गला दबाए हुए था. वीडियो में फ़्लॉयड कह रहे थे, "प्लीज़, आई कान्ट ब्रीद (मैं सांस नहीं ले पा रहा)". लेकिन शॉविन ने उन्हें नहीं छोड़ा और नौ मिनट तक उनका गला दबाए रखा. आरोप है कि जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत इसी वजह से हुई. हालांकि शॉविन का तर्क है कि वह गुनहगार नहीं हैं.

वीडियो वायरल होने के बाद पूरे अमेरिका में नस्लीय भेदभाव और पुलिस की क्रूरता के ख़िलाफ़ हिंसा भड़क उठी. अमेरिका के अलावा बाक़ी दुनिया में भी 'आई कॉन्ट ब्रीद' के बैनर तले नस्लभेद ख़त्म करने को लेकर जमकर प्रदर्शन हुए.

इसके बाद 45 साल के डेरेक शॉविन पर पहले थर्ड डिग्री और बाद में सेकेंड डिग्री का मर्डर केस दर्ज किया गया. उन पर तीन और मामले दर्ज किए गए हैं.

शॉविन के अलावा तीन अन्य पुलिसकर्मियों पर हत्या में मदद करने और इसे बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए हैं. इस साल उन पर मुकदमा चलाया जाना है.

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इमेज कैप्शन, पूर्व पुलिसकर्मी डेरेक शॉविन का तर्क है कि वह गुनहगार नहीं है.

46 साल के जॉर्ज फ़्लॉयड ने 25 मई, 2020 की शाम दक्षिणी मिनीपोलिस की एक दुकान से सिगरेट का एक पैकेट ख़रीदा था. दुकानदार का आरोप था कि फ़्लॉयड ने सिगरेट ख़रीदने के लिए 20 डॉलर का नक़ली नोट दिया था.

फ़्लॉयड के सिगरेट लौटाने से इनकार करने के ​बाद दु​कानदार ने पुलिस बुला ली थी. इसके बाद पुलिस मौक़े पर पहुँची और उसे हथकड़ी लगाई गई. पुलिस अधिकारी ने जब फ़्लॉयड को अपनी कार में डालना चाहा तो उन्होंने इसका प्रतिरोध किया. इसके बाद दुकान के सामने फुटपाथ पर पुलिस अधिकारी ने फ़्लॉयड को पटक दिया.

आरोप है कि डेरेक शॉविन ने फ़्लॉयड की गर्दन पर अपने बाएं घुटने को क़रीब नौ मिनट तक रखा. यह भी आरोप है कि दो दूसरे अधिकारियों ने फ़्लॉयड को नीचे पटकने में मदद की जबकि एक ने किसी को इस झड़प में शामिल होने से रोके रखा. वायरल वीडियो में फ्लॉयड ने 20 बार से ज्यादा कहा कि उसे साँस लेने में दिक्क़त हो ही रही है. इसके एक घंटे बाद अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया.

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के अलावा बाकी दुनिया में भी 'आई कॉन्ट ब्रीद' के बैनर तले नस्लभेद ख़त्म करने को लेकर जमकर प्रदर्शन हुए.

सुनवाई के लिए जजों का चयन कैसे हुआ?

इस मामले की सुनवाई बारह जज करेंगे. दो जज विकल्प के रूप में रखे गए हैं. एक जज को बैकअप ऑप्शन के रूप रखा गया था. यदि कोई जज सुनवाई शुरू होने से पहले जूरी से बाहर जाने का फ़ैसला करते तो उन्हें जूरी में शामिल किया जाता.

पंद्रह जजों में से नौ महिलाएं और छह पुरुष हैं. इनमें से नौ गोरे (छह महिलाएं, तीन पुरुष) जबकि छह काले या मिले-जुले नस्ल के हैं.

टीवी पर प्रसारित होने वाले ट्रायल के दौरान सभी जजों को कैमरे से दूर रखा जाएगा. इनके नाम भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.

विकल्प के रूप में रखे गए एक जज को ट्रायल शुरू होने के पहले ही टीम से बाहर कर दिया गया. अनुमान है कि इन्हें सोमवार को डिसमिस किया जाएगा. इसके बाद इस कार्यवाही के 12 मुख्य और दो वैकल्पिक जजों के सहारे पूरा होने की उम्मीद है.

उन्हें इस केस के बारे में अपनी जानकारी, पुलिस के साथ पिछले संपर्कों और उनकी मीडिया रुचियों को बताते हुए अपने सवालों को पेश करने के लिए कहा गया है. अनुमान है कि यह ट्रायल क़रीब चार हफ़्ते तक चल सकता है. मध्य मिनीपोलिस की अदालत को कंक्रीट बैरियर, बाड़ और कांटेदार तारों से घेर दिया गया है.

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