पाकिस्तान में सीनेट चुनाव से पहले इमरान ख़ान के फ़ैसले से विवाद- उर्दू प्रेस रिव्यू

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते सरकार और विपक्ष के एक दूसरे पर हमले के अलावा सीनेट के चुनाव से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं.
पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन सीनेट के लिए तीन मार्च को चुनाव होने वाले हैं. सभी प्रमुख पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है और कई उम्मीदवारों ने अपना नामांकन भी कर दिया है.
पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी इस्लामाबाद से विपक्षी पार्टियों के समूह पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के संयुक्त उम्मीदवार होंगे.
हालांकि सिर्फ़ एक दिन पहले यूसुफ़ रज़ा गिलानी के बेटे क़ासिम गिलानी ने ट्वीट कर कहा था कि उनके पिता इस्लामाबाद से सीनेट का चुनाव नहीं लड़ेंगे.
लेकिन शुक्रवार को क़ासिम गिलानी ने कहा कि पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो के ज़ोर देने पर उनके पिता ने अपना इरादा बदल लिया है और अब वो इस्लामाबाद से पीडीएम के संयुक्त उम्मीदवार होंगे.
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पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) ने भी यूसुफ़ रज़ा गिलानी की उम्मीदवारी का समर्थन किया है.
पाकिस्तान पीपल्स पार्टी ने ख़ैबर पख़्तूख़्वाह से फ़रहतुल्लाह बाबर को पीडीएम का संयुक्त उम्मीदवार बनाए जाने का सुझाव दिया है.
अख़बार जंग के अनुसार पीडीएम के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने पीपीपी के सुझाव पर अपनी सहमति जताई है. अगले कुछ दिनों में पीडीएम की स्टीयरिंग कमिटी की बैठक होगी जिसमें आधिकारिक तौर पर उन नामों की घोषणा कर दी जाएगी.
सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी ने भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. केंद्रीय साइंस एंड टेक्नोलोजी मंत्री फ़व्वाद चौधरी ने कहा है कि इस्लामाबाद से अब्दुल हफ़ीज़ शेख़ और फ़ौज़िया अरशद पार्टी के उम्मीदवार होंगे.
इससे पहले सरकार ने सीनेट चुनाव से संबंधित एक अध्यादेश जारी किया है जिसको लेकर विवाद पैदा हो गया है. अध्यादेश में सीनेट चुनाव ओपन बैलट से कराने की बात कही गई है जबकि विपक्षी पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं.

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अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पीपीपी ने इसे ख़ारिज कर दिया है. पीपीपी की संसदीय नेता शेरी रहमान और सीनेट के पूर्व चेयरमैन रज़ा रब्बानी ने कहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल दृष्टिबाधित है जो संविधान नहीं पढ़ सकता.
शेरी रहमान और रज़ा रब्बानी के अनुसार, "यह अध्यादेश संवैधानिक संस्थानों के बीच टकराव का कारण बनेगा और इस अध्यादेश के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट पर दबाव डालने की कोशिश की जा रही है."
रज़ा रब्बानी और शेरी रहमान ने संवाददाता सम्मेलन कर कहा, "हम भी साफ़-सुथरा चुनाव चाहते हैं लेकिन सरकार ने अध्यादेश का सहारा लेकर संविधान के ख़िलाफ़ काम किया है. यह अध्यादेश संविधान और संसद पर हमला है. सरकार संस्थानों के साथ खिलवाड़ कर रही है."
शेरी रहमान ने कहा, "सीनेट चुनाव को विवादित बनाया जा रहा है. इस अध्यादेश के पीछे सरकार की नीयत साफ़ नहीं है. सीनेट चुनाव से एक महीने पहले सरकार यह अध्यादेश लेकर क्यों आई यह संसद को अध्यादेश फ़ैक्ट्री बना रहे हैं. सरकार बौखलाहट की शिकार है. पहले संविधान पर हमलावर हुई, फिर संसद और अब न्यायपालिका पर भी हमले हो रहे हैं."
पीपीपी के नेताओं ने कहा कि संविधान में संशोधन करना संसद का काम है और सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है कि वो संविधान संशोधन बिल पास करवा सके.
पीपीपी के एक और नेता मुस्तफ़ा नवाज़ खोखर ने कहा कि यह ताज़ा अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट को प्रभावित करने की स्पष्ट कोशिश है. उनके अनुसार इमरान ख़ान की सरकार सुप्रीम कोर्ट के कंधे का सहारा लेकर अपने अंदर के बग़ावत को दबाना चाहती है.
वहीं पीडीएम प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा कि इस समय देश में मसख़रा सरकार और अयोग्य प्रधानमंत्री हैं.
मुस्लिम लीग (नवाज़) के महासचिव अहसन इक़बाल ने कहा, "यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट को डिक्टेशन देने के बराबर है. सुप्रीम कोर्ट को इसे ख़त्म कर देना चाहिए."
लेकिन सरकार ने अध्यादेश का बचाव किया है. पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि सीनेट चुनाव से संबंधित अध्यादेश किसी को फ़ायदा पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि इसमें पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है.
क़ुरैशी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "पूरा पाकिस्तान जानता है कि सीनेट के चुनाव में ख़रीद-फ़रोख़्त होती है. इस ख़रीद-फ़रोख़्त की मंडी को बंद किया जाना चाहिए. हम सीनेट चुनाव में ख़रीद-फ़रोख़्त बंद करना चाहते हैं."
यह सारा विवाद इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि सरकार ने प्रेसिडेंशियल रेफ़रेंस के ज़रिए इस मामले को सबसे पहले तो सुप्रीम कोर्ट भेजा, फिर सीनेट चुनाव में ओपन बैलट के लिए संसद में बिल पेश किया और फिर सरकार अध्यादेश लेकर आ गई.

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भारत प्रशासित कश्मीर पर अमेरिका ने अपनी सोच नहीं बदली
पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि यह बहुत ख़ुशी की बात है कि अमेरिका की नई बाइडन सरकार ने भारत प्रशासित कश्मीर पर अपनी राय नहीं बदली है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार क़ुरैशी ने कहा कि अमेरिका आज भी भारत प्रशासित कश्मीर को एक विवादित मुद्दा मानता है जिसको हल किया जाना चाहिए.
देश का भविष्य पाँच साल की योजना नहीं
प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि देश का भविष्य पाँच साल की योजना में तय नहीं हो सकता है.
अर्बन फ़ॉरेस्ट योजना के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि "संसदीय लोकतंत्र में हर पाँच साल के बाद चुनाव आते हैं तो बदक़िस्मती से सरकारें सिर्फ़ पाँच साल का सोचती हैं. लेकिन देश का भविष्य पाँच साल की योजना से नहीं बनता है. लंबी योजना से देश की सही अर्थों में तरक़्क़ी होती है."
इमरान ख़ान ने चीन की तारीफ़ करते हुए कहा, "दुनिया की तारीख़ में इतनी तेज़ी से तरक़्क़ी कहीं नहीं हुई जैसी चीन में हुई. चीन की इस सफलता का राज़ यही है कि वो आगे का सोचते हैं."

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