डोनाल्ड ट्रंप महाभियोग से बचाव में क्या दे रहे हैं दलीलें, जानिए

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    • Author, एंथनी जर्चर
    • पदनाम, उत्तरी अमेरिका संवाददाता
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग का मुक़दमा चल रहा है और मुक़दमे के चौथे दिन बचाव पक्ष को अपनी बात रखने का मौक़ा दिया गया.

इससे पहले पिछले हफ़्ते ट्रंप की क़ानूनी टीम ने ज़ोर देकर कहा था कि उनके ख़िलाफ़ महाभियोग का पूरा मुक़दमा ही असंवैधानिक है. टीम ने कहा था कि यह मुक़दमा ट्रंप के अधिकारों का हनन भी है.

हालाँकि उनकी ये दलीलें काम नहीं आईं और इसलिए उन्हें अपना बचाव करने का मौक़ा दिया गया.

डोनाल्ड ट्रंप के वकीलों को अपनी दलीलें पेश करने में तीन घंटे से ज़्यादा का वक़्त लगा जबकि अभियोजन पक्ष ने अपने तर्क तैयार करने के लिए 13 घंटे का समय लिया था.

ऐसा लगता है कि बचाव पक्ष कम शब्दों में ज़्यादा बातें कहना चाहता है क्योंकि यह पहले ही साफ़ हो गया है कि रिपब्लिकन पार्टी के पर्याप्त सदस्य पूर्व राष्ट्रपति का साथ देंगे ताकि उन्हें दोषी क़रार न दिया जा सके.

अपनी दलीलें पेश करते हुए ट्रंप की टीम ने उनके बचाव में जो कुछ कहा, वो इस तरह हैं-

डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग की कार्यवाही

'डेमोक्रैट्स ने भी ऐसा किया'

डोनाल्ड ट्रंप का बचाव करने के क्रम में उनके वकीलों ने डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों के शब्दों को उन्हीं के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करने की कोशिश की.

ट्रंप की लीगल टीम ने लीड इंपिचमेंट मैनेजर जेमी रस्किन समेत हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स के सदस्यों के वो पुराने वीडियो क्लिप चलाए, जिसमें वो पहले हुए राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का विरोध करते नज़र आ रहे थे.

ट्रंप के वकीलों ने पूछा, "अगर डेमोक्रैट्स चुनाव के नतीजों को चुनौती दे सकते हैं तो ट्रंप क्यों नहीं?"

वीडियो क्लिप में डेमोक्रैट्स के बयानों के बाद सीधे वो फ़ुटेज दिखाई गई, जिसमें प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की झलक थी.

ट्रंप के वकील माइकल वेन द ब्लीन ने ध्यान दिलाया कि राष्ट्रपति जो बाइडन के चुनावी अभियान का नारा 'अ बैटल फ़ॉर द सोल ऑफ़ अमेरिका' (अमेरिकी की आत्मा के लिए एक युद्ध) था.

ब्लीन ने कहा कि वो यह नहीं चाहते डेमोक्रैट्स को सज़ा मिले बल्कि वो बताना चाहते हैं कि ऐसी बयानबाजी अमेरिकी राजनीति का हिस्सा रही हैं.

उन्होंने कहा कि हो सकता है अब राजनीतिक कटुता को कम करने का वक़्त हो लेकिन ट्रंप के भाषण को महाभियोग और दोषी ठहराए जाने का आधार बिल्कुल नहीं बनाया जा सकता.

डोनाल्ड ट्रंप

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'डेमोक्रैट्स ने ट्रंप को ग़लत समझा'

जब ट्रंप के वकील डेविड स्कून को ट्रंप का बचाव करने का पहला मौक़ा मिला तो उन्होंने डेमोक्रेटिक इंपिचमेंट मैनेजर्स पर हमला बोलना शुरू कर दिया.

स्कून ने उन पर पूर्व राष्ट्रपति के भाषणों को इस तरह से चुन-चुनकर एडिट करने का आरोप लगाया जिससे वो असलियत में दिए गए भाषणों से कहीं ज़्यादा भड़काऊ लगें.

डेविड स्कून ने ट्रंप के साल 2017 में वर्जीनिया में नस्लीय श्रेष्ठतावादियों (गोरे श्रेष्ठ हैं) की रैली के हिंसक होने के बाद का एक बयान चलाया.

इस बयान में ट्रंप ने कहा था कि 'दोनों ही पक्षों में अच्छे लोग हैं.' ट्रंप के इस बयान की काफ़ी आलोचना हुई थी.

स्कून ने कहा कि असल में ट्रंप ने यह बयान हिंसा से एक रात पहले हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए कही थी. हालाँकि उन्होंने उसी रात घटी उस घटना का ज़िक्र नहीं किया जिसमें मशालें लिए कुछ समूहों ने 'ज्यूज़ विल नॉट रिप्लेस अस' (यहूदी हमारी जगह नहीं ले सकते) के नारे लगाए थे.

मुक़दमे की कार्यवाही को लाइव देखने वाले पत्रकारों के मुताबिक़ डेविड स्कून जब दलीलें पेश कर रहे थे तो कई ऐसे मौक़े आए जब डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों ने उन्हें संदेह भरी नज़रों से देखा.

कैपिटल हिल हिंसा

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न्यूज़ शो जैसी दलीलें

कई मौकों पर बचाव पक्ष की प्रस्तुति उस मीडिया कवरेज से मिलती-जुलती नज़र आई, जिसने ट्रंप के राजनीतिक करियर को ऊँचाई पर पहुँचाया.

ट्रंप के वकीलों ने जो वीडियो पेश किए उनमें कुछ ख़ास तरह के क्लिप्स को अलग-अलग तरीक़े से पैकेज किया गया था. इनमें म्यूज़िक था, आग और हिंसा के एडिट किए हुए दृश्य थे. ये कुछ वैसा ही था जैसा फ़ॉक्स न्यूज़ पर शाम को आने वाला कार्यक्रम.

इन वीडियो क्लिप्स में उन डेमोक्रैटिक नेताओं को भी दिखाया गया जो रिपब्लिकन पार्टी के आँखों में किरकिरी जैसे हैं. जैसे- बर्नी सैंडर्स, चक शूमर और नैंसी पलोसी.

इसके अलावा क्लिप में ट्रंप के विरोध में बोलने वाले हॉलीवुड सितारों जैसे मडोना और जॉनी डेप के बयानों को भी दिखाया गया.

ज़ाहिर है कि ये मामला सिर्फ़ क़ानून का नहीं बल्कि पूरी राजनीति का है.

डोनाल्ड ट्रंप

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ट्रंप की 'अभिव्यक्ति की आज़ादी'

पूर्व राष्ट्रपति के बचाव पक्ष की दलीलों के बड़े हिस्से में अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन का हवाला दिया गया जो अमेरिकी नागरिकों के लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी सुनिश्चित करता है. ट्रंप के वकीलों ने कहा कि वो छह जनवरी को अमेरिकी संविधान के दिए इसी अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे.

ट्रंप की लीगल टीम ने कहा कि अगर सीनेट उन्हें उनके शब्दों के लिए दोषी ठहरा देगी तो इसका असर पूरे राजनीतिक परिदृश्य पर पड़ेगा और किसी भी नेता को बेवजह दोषी क़रार दिए जाने का रास्ता खुल जाएगा.

ट्रंप के वकील ब्लीन ने कहा, "सियासी गलियारों में ऐसी साधारण राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल बरसों से किया जा रहा है. ट्रंप ने जो कुछ कहा उसे राजनीतिक भाषणों से अलग करके देखा जाना बिल्कुल असंभव है."

उन्होंने 144 संवैधानिक विशेषज्ञों के हस्ताक्षर वाली उस चिट्ठी को 'क़ानूनी रूप से हास्यास्पद' बताकर ख़ारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि संविधान का पहला संशोधन ट्रंप के मामले में लागू नहीं होता है.

ब्लीन ने कहा कि इंपिचमेंट मैनेजरों ने इस चिट्ठी का इस्तेमाल ट्रंप की टीम को डराने के तरीके के तौर पर किया. उन्होंने अपने विपक्षी क़ानूनी टीम की ओर मुड़ते हुए कहा, "आपकी हिम्मत कैसे हुई?"

हालाँकि ये क़ानूनी रूप से एक बेहतरीन दलीलें नहीं थीं लेकिन ट्रंप की टीम का हमलावर रवैया उनके लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकता है.

डोनाल्ड ट्रंप

क्या ट्रंप को पता था कि माइक पेंस ख़तरे में हैं?

बचाव पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद सवालों की बारी आई. रिपब्ल्किन पार्टी के सांसद मिट रोमनी और सुज़न कॉलिन्स ने दोनों पक्षों से एक दिलचस्प सवाल पूछा.

उन्होंने पूछा कि हिंसा वाले दिन जब ट्रंप ने माइक पेंस के बारे में एक चिंता जताते हुए एक ट्वीट किया तो क्या उन्हें पता था कि पूर्व राष्ट्रपति को सीक्रेट सर्विस के सदस्यों ने सीनेट चेंबर से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है?

इसके जवाब में इंपीचमेंट मैनेजर और सांसद फ़्लकीन कास्त्रो ने कहा कि ट्रंप को ये अंदेशा ज़रूर रहा होगा कि भीड़ पेंस को धमका रही है.

उन्होंने कहा, "कैपिटल हिल में हुई यह हिंसा राष्ट्रीय टीवी पर प्रसारित हो रही थी, वाइट हाउस में संचार और संवाद की बेहतरीन व्यवस्था थी और ट्रंप को ख़ुद अल्बामा के सांसद टॉमी ट्यूबरविल ने एक फ़ोन कॉल पर बताया था कि पेंस को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है."

वीडियो कैप्शन, Cover Story: डोनाल्ड ट्रंप का क्या होगा
BBC ISWOTY