डेनियल पर्ल: उमर सईद शेख़ समेत 4 लोगों की रिहाई पर अमेरिका नाराज़

इमेज स्रोत, Getty Image
अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के अभियुक्त चरमपंथी उमर सईद शेख़ समेत चार लोगों को रिहा करने के पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमेरिका ने नाराज़गी ज़ाहिर की है. साल 2002 में डेनियल पर्ल की हत्या हुई थी.
व्हाइट हाउस ने कहा है कि यह हर कहीं चरमपंथ के शिकार हुए लोगों का अपमान है.
वॉल स्ट्रीट जनरल के पत्रकार पर्ल का कराची के दक्षिणी हिस्से में अपहरण करके उनकी हत्या कर दी गई थी जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था.
वो पाकिस्तान में सक्रिय चरमपंथी समूहों पर स्टोरी करने गए थे.
शेख़ को पर्ल के अपहरण के कुछ दिनों बाद गिरफ़्तार किया गया था और बाद में आतंक निरोधक अदालत ने उन्हें हत्या का दोषी पाया था. दोषी ठहराए जाने के बाद उनको फांसी दी जानी थी.
लेकिन साल 2020 के अप्रैल में सिंध हाई कोर्ट ने शेख़ की सज़ा को कम करते हुए उन्हें केवल अपहरण का दोषी बताया और उन्हें उन तीन अन्य लोगों के साथ रिहा कर दिया जो इस मामले में दोषी थे.
डेनियल पर्ल के परिवार ने इस फ़ैसले की निंदा की थी जिसके बाद पाकिस्तानी सरकार और उनके परिवार ने इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
लेकिन पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं को ख़ारिज करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दे दिया है.

इमेज स्रोत, Getty Image
डेनियल पर्ल के साथ क्या हुआ था?
वॉल स्ट्रीट जर्नल के दक्षिण एशिया ब्यूरो चीफ़ पर्ल जनवरी 2002 में ग़ायब हो गए थे.
वो कराची में इस्लामी चरमपंथी गतिविधियों और रिचर्ड रीड के बीच संबंध तलाश रहे थे. रीड ने जूतों में बम छिपाकर एक यात्री विमान में विस्फोट की कोशिश की थी.
अभियोजकों ने शेख़ पर आरोप लगाया कि उन्होंने पर्ल को एक मौलवी से मिलवाने का लालच दिया था.
पर्ल और शेख़ के बीच संबंध अपनी-अपनी पत्नियों की चिंताओं को लेकर भी बना क्योंकि उस समय वे दोनों गर्भवती थीं.
इसके बाद पर्ल ग़ायब हो गए और पाकिस्तानी और अमेरिकी समाचार संस्थानों को ईमेल आए जिसमें कई मांगें थीं. इनमें से एक मांग अमेरिकी जेलों में बंद पाकिस्तानी क़ैदियों के साथ बेहतर व्यवहार करने को लेकर भी थी.
एक महीने के बाद कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को 38 साल के पर्ल की हत्या का वीडियो भेजा गया था.

इमेज स्रोत, Getty Images
कौन हैं अहमद उमर सईद शेख़?
1973 में लंदन में पैदा हुए शेख़ ने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई से पहले एक स्वतंत्र स्कूल से पढ़ाई की.
उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी नहीं की और फ़र्स्ट ईयर में उन्होंने बोस्निया के लिए मदद का अभियान चलाया लेकिन वो वहां जाने में नाकाम रहे.
उन्हें 1994 में भारत में गिरफ़्तार किया गया था. उनको चार पर्यटकों के अपहरण से जुड़े मामले में गिरफ़्तार किया गया था जिनमें तीन ब्रिटिश और एक अमेरिकी नागरिक था.
यह भी पढ़ें: हज़ाराः पाकिस्तान में ‘निशाने’ पर रहते मुसलमान
उनको 1999 में तब रिहा किया गया जब चरमपंथियों ने इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान का अपहरण कर लिया था और अपहरणकर्ताओं ने उनको भी रिहा करने की मांग की थी.
सरकारी अधिकारियों के हवाले से अमेरिकी मीडिया ने रिपोर्ट किया था कि शेख़ पर अमेरिका में 11 सितंबर 2001 के हमले के एक चरमपंथी के ख़ाते में पैसे ट्रांसफ़र करने का भी आरोप है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














