ट्रंप ने जाते-जाते चीन को दिया एक और झटका, अमेरिका में शाओमी को किया बैन

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले 20 जनवरी को सत्ता से विदा हो रहे हैं लेकिन जाते-जाते चीन को लेकर आक्रामकता में कोई कमी नहीं दिखा रहे.
ट्रंप प्रशासन ने चीनी कंपनियों पर नया प्रतिबंध लगाया है. इसके साथ ही फेडरल सरकार को चीन से तकनीक के आयात को रोकने के लिए और ज़्यादा अधिकार दिया है.
ट्रंप सरकार ने चीन की सरकारी कंपनी चाइना नेशनल ऑफ्शोर ऑइल कॉर्पोरेशन और मोबाइल फ़ोन निर्माता कंपनी शाओमी को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है.
इसके साथ ही अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय को उन देशों से आयात बंद करने के फ़ैसला लेने का अधिकार दिया गया है, जहाँ से लगे कि सुरक्षा को ख़तरा है.
गुरुवार को अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने चाइना नेशनल ऑफ्शोर ऑइल कॉर्पोरेशन को एन्टिटी लिस्ट में डाल दिया. इसका मतलब ये हुआ कि अमेरिकी ग्रुप इस कंपनी के उत्पाद और तकनीक का कारोबार नहीं कर पाएंगे.

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कुछ ही घंटों बाद पेंटागन ने श्याओमी को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया. नवंबर में एप्पल को पीछे छोड़ श्याओमी दुनिया की तीसरी बड़ी स्मार्टफ़ोन निर्माता कंपनी बन गई थी. इसके अलावा आठ अन्य कारोबार को इस लिस्ट में शामिल किया गया है, जिनका संबंध चीनी सेना से बताया जा रहा है.
नवंबर महीने में राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया था, जिसके तहत इस लिस्ट में शामिल कंपनियों में निवेश करने के लिए अमेरिकी नागरिकों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इस क़दम के बाद अमेरिकी निवेशक श्याओमी नहीं ख़रीद पाएंगे.
अगले हफ़्ते जो बाइडन सत्ता संभालने वाले हैं और ट्रंप अपनी सरकार के आख़िरी दिनों में हैं. इन आख़िरी दिनों में ट्रंप ने पूरा फ़ोकस चीन पर रखा है. ट्रंप के पूरे कार्यकाल में चीन की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति में उभार का दौर रहा.
अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने कहा है कि चाइना नेशनल ऑफ्शोर ऑइल कॉर्पोरेशन चीनी सेना की मदद करती है. ख़ास कर साउथ चाइना सी में पड़ोसियों को धमकाने में.
अमेरिका के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ''चाइना नेशनल ऑफ्शोर ऑइल कॉर्पोरेशन ने साउथ चाइना सी में बाक़ी के देशों के लिए ख़तरे के तौर पर सामने आई है. साउथ चाइना सी में तेल संसाधनों को लेकर चीन से वियतनाम का विवाद है. चाइना नेशनल ऑफ्शोर ऑइल कॉर्पोरेशन वियतनाम के ख़िलाफ़ काम कर रही है.''

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अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रोस ने कहा है, ''चीन साउथ चाइना सी में बहुत ही आक्रामकता दिखा रहा है. वो यहाँ अंधाधुंध एकतरफ़ा कार्रवाई कर रहा है. साउथ चाइना सी में वो सैन्य ठिकाना बना रहा है जो अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए ख़तरा है.''
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2015 में तत्तकालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से वादा किया था कि साउथ चाइना सी में चीन विवादित इलाक़े का सैन्यीकरण नहीं करेगा. पिछले कुछ सालों में अमेरिका ने कई चीनी कंपनियों को एन्टिटी लिस्ट में डाला है.
इनमें टेलिकॉम उपकरण बनाने वाली कंपनी ख्वावे भी शामिल है. हाल ही में व्यावसायिक ड्रोन बनाने वाली चीनी कंपनी डीजेआई को भी अमेरिका ने बैन किया था.
अमेरिका में शाओमी के शेयर में 14 फ़ीसदी की गिरावट आई है. पेंटागन की लिस्ट में चीन की बड़ी टेक कंपनियाँ अलीबाबा, टेन्सेंट और बाइडु भी हैं. लेकिन अमेरिका के वित्त मंत्रालय का कहना है कि इससे अमेरिकी निवेशकों को नुक़सान उठाना पड़ सकता है.

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अमेरिका ने गुरुवार को कुल 9 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया. अमेरिका के इस क़दम से दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ सकता है.
चीन ने अमेरिका के इस क़दम की आलोचना की है. गुरुवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजिअन ने कहा कि अमेरिका आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों का राजनीतिकरण कर रहा है.
उन्होंने कहा कि चीन की कंपनियां पूरी दुनिया में कारोबारी सिद्धांतो का पालन करते हुए निवेश और बिज़नेस कर रही हैं. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर चीनी कंपनियों को दबा रहा है.
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, ''अमेरिका का बाज़ार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का स्वागत करना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर चीनी कंपनियों को प्रतिबंधित करना शक्ति का दुरुपयोग है.''
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