ईरान को लेकर मध्यपूर्व में हलचल, क्या बाइडन के पास है समाधान की चाबी?

इमेज स्रोत, EPA
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
ईरान के लिए साल 2020 की शुरुआत बुरी ख़बर से हुई, और अंत भी बुरी ख़बर के साथ ही.
जनवरी में इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड के कुद्स फ़ोर्स के कमांडर मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत हो गई थी. जबकि नवंबर में देश के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फ़ख़रिज़ादेह की एक रिमोट कंट्रोल हथियार से हत्या कर दी गई.
इसके अलावा कई घटनाएँ भी ईरान के लिए बुरी साबित हुईं. लंदन में रिसर्च स्कॉलर मुज्तबा हसन तबातबाई कहते हैं कि साल 2020 ईरान के लिए बहुत ही ख़राब साबित हुआ.
किंग्स कॉलेज के तबातबाई के अनुसार कमांडर सुलेमानी और मोहसिन फ़ख़रिज़ादेह की हत्या ईरान की सरकार के लिए दो बड़े झटके थे. वो कहते हैं, "मेरी उम्र 30 साल है और जब से मैंने होश संभाला है, मैंने ईरान के लिए इससे बुरा साल नहीं देखा."
"ईरानी लीडरशिप इस समय काफ़ी हताश होगी क्योंकि वो कमांडर की मौत का बदला 11 महीने तक नहीं ले सकी और फिर परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फ़ख़रिज़ादेह की हत्या कर दी गई."
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर आफ़ताब कमाल पाशा कहते हैं ईरान के लिए 2020 बहुत बुरा रहा.
वो कहते हैं, "ईरान के लिए सबसे बुरे सालों में से एक 2020 था, जब इसके दो हीरो मारे गए, इसने ग़लती से एक पैसेंजर विमान मार गिराया, अमेरिकी प्रतिबंध दोबारा लगाए गए, अर्थव्यवस्था बैठ गई और शत्रु देश इसराइल के साथ कई अरब देशों ने शांति समझौते किए."

इमेज स्रोत, Reuters
ईरान के दुश्मन तनाव में?
लेकिन सबसे ज़बरदस्त झटका था इसके दो हीरो की हत्याएँ और इन्हें रोकने में इसकी बेबसी. कमांडर सुलेमानी की हत्या का बदला लेने की कोशिश में ईरान ने अपने मिसाइल से एक यूक्रेनी विमान मार गिराया जिसमें 176 यात्री मारे गए. इनमें सबसे अधिक संख्या ईरानियों की थी.
परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन की हत्या रिमोट कंट्रोल के ज़रिए की गई, जिससे ईरान को ये समझ में आया कि सिस्टम में कोई शत्रु देश का व्यक्ति शामिल है.
ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने परमाणु साइंटिस्ट की हत्या पर कहा, "उन्हें समझ में आ रहा है कि अब वैश्विक हालात बदल रहे हैं और दुश्मन देश इन बदलते हालात को बिगाड़ने के लिए क्षेत्र में अस्थिर स्थिति पैदा करने की अधिकतम कोशिश कर रहे हैं."
जब हसन रूहानी ईरान के 'शत्रुओं' की बातें करते हैं तो उनका मतलब होता है इसराइल, अमेरिका और सऊदी अरब जैसे देश.

इमेज स्रोत, EPA
इसराइल और सऊदी अरब अमेरिकी चुनाव के बाद पैदा हुए हालत से परेशान हैं और जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद की स्थिति से भी वो चिंतित हैं.
बाइडन ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान ये स्पष्ट कर दिया था कि वो ईरान के साथ परमाणु समझौते में फिर से शामिल होना चाहते हैं. ये समझौता राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर में 2015 में हुआ था, लेकिन 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इससे अलग हो गए थे.
ईरान परमाणु समझौता खटाई में
वैसे 2015 में हुआ ये परमाणु समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच में नहीं हुआ था, बल्कि इस पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में फ़्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, रूस, यूरोपीय संघ और चीन शामिल हैं.
अमेरिका के एकतरफ़ा तौर पर इससे अलग होने के बावज़ूद समझौते पर अमल हो रहा था, लेकिन हाल में अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के कारण ईरान अब इस समझौते की कई बातों का उल्लंघन करता दिखाई दे रहा है.
ईरान ने एक दिन पहले ही ये एलान किया है कि वो यूरेनियम संवर्धन दोबारा शुरू कर रहा है. ये परमाणु समझौते की एक अहम शर्त का उल्लंघन है.
ईरान ज़ोर देकर कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, लेकिन अब वो समझौते की कई शर्तों का ख़ुद ही उल्लंघन कर रहा है. ईरान के अनुसार वो अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को दोबारा लगाए जाने के ख़िलाफ़ बदले के तौर पर ये क़दम उठा रहा है.

इमेज स्रोत, Getty Images
परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देश अब थोड़े चिंतित हैं. यूरोपीय संघ के प्रवक्ता पीटर स्टेनो ने कहा कि ईरान का क़दम परमाणु समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं से दूर जाने के बराबर होगा.
लेकिन वॉशिंगटन में ईरानी मूल के पत्रकार अली साहबज़ादे के अनुसार, ईरान ये क़दम अमेरिका के नए प्रशासन पर दबाव डालने के लिए भी उठा रहा है. उनके मुताबिक़ ईरान इन क़दमों को वापस भी ले सकता है, अगर उसे लगा कि जो बाइडन परमाणु समझौते पर दोबारा हस्ताक्षर करना चाहते हैं
लेकिन अली साहबज़ादे के मुताबिक़ ईरान अगर "परमाणु समझौते की कुछ बातों से दूर जा भी रहा है, तो उसे पूरी तरह से दोषी ठहराना सही नहीं होगा. जब राष्ट्रपति ट्रंप 2018 में समझौते से अलग हुए, तो किसी सदस्य देश ने इसका कड़ा विरोध नहीं किया, ख़ासतौर से यूरोपीय संघ ने ज़्यादा कुछ नहीं कहा या किया. ईरान ने ख़ुद को काफ़ी अकेला पाया."
यात्री विमान दुर्घटना
ईरान यूक्रेनियन यात्रियों के परिवारों को मुआवज़ा देने के लिए तैयार हो गया है. तेहरान में यूक्रेन के इस यात्री विमान को उड़ान भरने के तुरंत बाद मिसाइल दाग़ कर मार गिराया गया था. ईरान ने यात्री विमान को शत्रु विमान समझ कर मार गिराया था.

इमेज स्रोत, Getty Images
पहले तो ईरानी प्रशासन विमान गिराने की ज़िम्मेदारी से इनकार करता रहा, लेकिन उनके ख़िलाफ़ सबूत इतने पुख़्ता थे कि उन्हें अपनी ग़लती स्वीकार करनी पड़ी.
प्रशासन को इसकी जाँच के आदेश देने पड़े. इस विमान में 82 ईरानी नागरिक भी सवार थे, जबकि 62 यात्री कनाडा के थे. ये अभी स्पष्ट नहीं हुआ है कि ईरानी नागरिकों को भी मुआवज़ा दिया जाएगा या नहीं.
कमर तोड़ आर्थिक प्रतिबंध
कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों और कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के कारण पहले से ही कमज़ोर पड़ती ईरान की अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार पड़ी है. देश के व्यापारियों पर इसका काफ़ी असर हुआ है.
प्रतिबंधों और कोरोना वायरस महामारी से आर्थिक नुक़सान का इस बात से भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ईरान की रियाल मुद्रा ने 2020 में अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले अपने मूल्य का 50% हिस्सा खो दिया है. महँगाई आसमान छू रही है.
इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल फ़ाइनेंस (आईआईएफ़) ने 26 नवंबर को कहा कि अगर 2021 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने प्रतिबंधों को हटाया, तो ईरान की अर्थव्यवस्था 4.4 फ़ीसदी तक जा सकती है. लेकिन 2020 की तीसरी तिमाही तक अर्थव्यवस्था 3.5 प्रतिशत के हिसाब से सिकुड़ रही थी और इसमें बेहतरी के कोई संकेत नज़र नहीं आ रहे थे.
ईरान में 18 जून को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होगा. ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता ख़ामेनेई का झुकाव किस तरफ़ होगा? ईरान आगे कौन सा रास्ता अपनाएगा, ये इस पर निर्भर करेगा कि राष्ट्रपति कट्टरपंथी चुन कर आएगा या उदारवादी. और ये निर्भर करेगा इस बात पर कि ईरान ख़ुद को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कितना अलग-थलग महसूस करता है या इसे कराया जाता है.
अली साहबज़ादे कहते हैं कि अगर अमेरिका के परमाणु समझौते में वापसी के आसार नज़र आए, तो उदारवादी राष्ट्रपति के चुनाव जीतने की संभावना बढ़ जाएगी. उनके अनुसार ये न केवल ईरान के लिए बल्कि उस क्षेत्र और पूरे पश्चिमी एशिया के लिए अच्छा होगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














