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अमेरिका: जो बाइडन की जीत की आख़िरी प्रक्रिया पर 11 सीनेटर्स ने जताया विरोध
अमेरिकी सीनेट के एक समूह ने कहा है कि जब तक कि मतदान में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए एक आयोग का गठन नहीं होता तब तक वो जो बाइडन की जीत को प्रमाणित करने से इनकार कर देंगे.
टेक्सास से सीनेटर टेड क्रूज़ के नेतृत्व में 11 सीनेटर इन प्रमाणरहित आरोपों की जांच के लिए 10 दिनों की देरी चाहते हैं. हालांकि, इस कदम के सफल होने की उम्मीद नहीं है क्योंकि अधिकतर सीनेटर्स के छह जनवरी को होने वाले मतदान में जो बाइडन को समर्थन देने की उम्मीद है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने जो बाइडन की जीत को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. वह बार-बार चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगा रहे हैं. हालांकि, इसे लेकर कोई प्रमाण नहीं दिया गया है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की गई थी लेकिन कोर्ट ने उसे ख़ारिज कर दिया.
उन्हें सिर्फ़ एक छोटी सी जीत मिली जो पेंसिल्वेनिया के पोस्टल बैलेट से जुड़ी हुई थी. इस राज्य में जो बाइडन को जीत मिली थी. शनिवार को उप-राष्ट्रपति माइक पेंस के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ मार्क शॉर्ट ने कहा कि पेंस ने छह जनवरी को आपत्तियां जताने वाले सीनेटर्स के कदम का स्वागत किया है.
इस तारीख़ को कांग्रेस पिछले महीने आए इलेक्टोरल कॉलेज के नतीजों को प्रमाणित करेगी. देश के सभी 50 राज्यों के इलेक्टोरल कॉलेज ने जो बाइडन को 306 मत मिलने की पुष्टि की थी. चुनाव में जीत के लिए इलेक्टोरल कॉलेज के 270 मतों की ज़रूरत होती है.
मतदान के नतीजे वॉशिंगटन भेजे जाएंगे और 6 जनवरी को कांग्रेस के संयुक्त सत्र में आधिकारिक तौर पर उनकी गिनती होगी. ये प्रक्रिया का एक हिस्सा है. इस प्रक्रिया के तहत अंत में उप-राष्ट्रपति माइक पेंस सीनेट के अध्यक्ष होने क नाते जो बाइडन को विजेता घोषित करेंगे.
इसके बाद जो बाइडन और नवनिर्वाचित उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस 20 जनवरी को शपथ ग्रहण करेंगे.
ट्रंप के सहयोगी क्या चाहते हैं
11 सीनेटरों के जारी किए गए बयान में कहा गया है कि नवंबर में हुए चुनाव में मतदाता धोखाधड़ी, चुनाव क़ानून के उल्लंघन और ठीक से लागू ना होने के और अन्य मतदान अनियमितताओं के असाधारण आरोप लगे हैं.
फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस की एक जांच में धोखाधड़ी के इन आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं मिले हैं. वर्ष 1877 के एक उदाहरण को ध्यान में रखते हुए सीनेटर्स आयोग बनाने की मांग कर रहे हैं.
साल 1877 में दोनों पार्टियों के तीन राज्यों में जीत का दावा करने के बाद जांच के लिए दोनों पार्टियों एक द्वी दलीय समिति का गठन किया गया था. इसे देखते हुए सीनेटर्स ने विवादित राज्यों में चुनाव के नतीजों की 10 दिनों की आपात जांच के लिए एक आयोग के गठन की मांग की है.
सीनेटर्स का कहना है, "एक बार जांच पूरी होने पर हर एक राज्य आयोग के नतीजों का मूल्यांकन करेगा और ज़रूरत होने पर अपने मतदान में बदलाव प्रमाणित करने के लिए एक विशेष विधायी सत्र का आयोजन करेगा."
11 सीनेटर्स का ये कदम मिसूरी के सीनेटर जोश हॉले के बयान से अलग है. जोश हॉले ने कहा था कि वो चुनावी प्रमाणिकता के सामने इलेक्टोरल कॉलेज के नतीजों को खारिज करते हैं. कांग्रेस के नीचले सदन में रिपब्लिकंस का एक समूह चुनाव के नतीजों का विरोध करने की योजना बना रहे हैं.
बीबीसी के उत्तरी अमेरिका रिपोर्टर एंथनी जर्चर का विश्लेषण
कम से कम दर्जन भर रब्लिकन सीनेटर कांग्रेस में चुनाव के नतीजों को चुनौती देने की योजना बना रहे हैं. इससे साफ पता चलता है कि पार्टी डोनाल्ड ट्रंप के आरोपों का समर्थन कर रही है. हालांकि, ये प्रयास सफल नहीं होने वाले हैं क्योंकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है.
लेकिन, आपत्ति जताने वले नेताओं का मकसद चुनाव के नतीजों को बदलना नहीं बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप के वफादारों का समर्थन पाना है ताकि वो अपने लिए रास्ता बना सके.
उन्हें लगता है कि रिपब्लिकन पार्टी में सफलता का रास्ता डोनाल्ड ट्रंप और उनके वफादारों से होकर जाता है, जिनका समर्थन उन सीनेटर्स के लिए ज़रूरी है जो राष्ट्रपित बनने की ख्वाहिश रखते हैं जैसे की टेड क्रूज़ या जॉश हॉले.
उन्हें चिंता है कि कहीं उन्हें भविष्य में ट्रंप समर्थकों से विरोध का सामना ना करना पड़े. यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के सदस्यों ने राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों से निराश होकर बड़े पैमाने पर इलेक्टोरल कॉलेज के वोटों की गिनती के दौरान आपत्ति जताई है. हालांकि, यह लगभग डेढ़ सदी में सबसे बड़ा विद्रोह होगा.
छह जनवरी को क्या होगा
हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के सदस्यों की उठाई गई आपत्तियों पर दो घंटे चर्चा होगी जिसके बाद मतदान किया जाएगा.
लेकिन, इलेक्टोरल वोट खारिज करने के लिए दोनों सदनो में बहुमत से आपत्तियां स्वीकार होनी ज़रूरी है.
लेकिन, ऐसा होना संभव नहीं लगता क्योंकि डेमोक्रेट्स को हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल है. कुछ रिपब्लिकंस भी कह चुके हैं कि वो नतीजों का विरोध नहीं करेंगे.
शीर्ष रिपब्लिकंस ने कहा है कि चुनाव को प्रमाणित करने में सीनेट की भूमिका काफी हद तक औपचारिक है और परिणामों को लेकर आगे लंबी बहस नहीं होनी चाहिए.
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