इमरान ख़ान पर मरियम का तंज- शेरवानी पहनने की जल्दी क्यों थी -पाकिस्तानी उर्दू प्रेस रिव्यू

मरियम नवाज़

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    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते सरकार और विपक्षी महागठबंधन के बीच जारी गतिरोध और चरमपंथी शेख़ उमर की रिहाई से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में थीं.

विपक्षी महागठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रैटिक मूवमेंट (पीडीएम) और इमरान ख़ान के बीच गतिरोध जहाँ एक तरफ़ दिन ब दिन बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ पीडीएम के प्रमुख मौलान फ़जलुर्रहमान के अपने संगठन जमीयत-उलेमा-इस्लाम (जेयूआई-एफ़) में ही उनके ख़िलाफ़ विरोध के स्वर उठने लगे हैं.

जेयूआई-एफ़ ने अपने चार वरिष्ठ नेताओं का पार्टी से निकाल दिया है. उन नेताओं पर पार्टी के फ़ैसलों, नीतियों और पार्टी के संविधान के ख़िलाफ़ काम करने के आरोप लगाकर उन्हें पार्टी से निकाला गया है.

निकाले गए चारों नेता न केवल जेयूआई-एफ़ के संगठन में उच्च पदों पर रहें हैं बल्कि उन्होंने संसद में भी पार्टी का प्रतिनिधित्व किया है.

अख़बार 'जंग' ने लिखा है- फ़ज़लुर्रहमान और उनके विरोधी आमने-सामने.

पीडीएम की जनसभा

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'पाकिस्तान डकैत मूवमेंट'

केंद्रीय सूचना एंव प्रसारण मंत्री शिब्ली फ़राज़ ने कहा कि पीडीएम का नेतृत्व एक ऐसा आदमी कर रहा है जिसकी अपने घर में कोई इज़्ज़त नहीं है. फ़ज़लुर्रहमान के ख़िलाफ़ उनकी अपनी ही पार्टी में बग़ावत शुरू हो गई है.

मंत्री शिब्ली फ़राज़ ने कहा, "फ़ज़लुर्रहमान का रवैया ग़ैर-लोकतांत्रिक और फ़ासीवादी है. विचारों के मतभेद पर वरिष्ठ नेताओं का पार्टी से निकाल देना कौन सा लोकतंत्र है?"

उन्होंने कहा, ''पीडीएम तो वैसे भी दम तोड़ चुकी है. कोई इस्तीफ़ा देना चाह रहा है, कोई नहीं. फ़ज़लुर्रहमान इस्लाम का लिबादा ओढ़कर सत्ता हासिल करने के लिए सियासत कर रहे हैं.''

वीडियो कैप्शन, सऊदी ने पाकिस्तान से पैसा लौटाने को क्यों कहा?

पाकिस्तान कश्मीर मामलों के मंत्री अली अमीन ने कहा कि पीडीएम दरअसल 'पाकिस्तान डकैत मूवमेंट' है.

मौलाना फ़ज़लुर्रहमान का कहना है कि जिन लोगों को पार्टी से निकाला गया है उन्हें सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ और इस्टैब्लिशमेंट का समर्थन हासिल था.

मौलाना ने इमरान ख़ान पर हमला करते हुए कहा कि 'मैं जनरल नियाज़ी नहीं जो हथियार डाल कर सरेंडर कर दूं.'

दरअसल, इमरान ख़ान का पूरा नाम इमरान ख़ान नियाज़ी है और जनरल नियाज़ी ने 1971 के युद्ध में 93 हज़ार सैनिकों के साथ ढाका में भारत के जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने सरेंडर किया था.

इमरान ख़ान

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ख़ुद ही ख़त्म हो जाएगी पीडीएम: इमरान ख़ान

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि पीडीएम आपसी मतभेद के कारण ख़ुद ही ख़त्म हो जाएगी. इमरान ने कहा कि जो लोग इस्तीफ़ा देने की बात कर रहे थे, अब वो उससे भाग रहे हैं.

केंद्रीय गृह मंत्री शेख़ रशीद ने कहा कि फ़साद की असल जड़ मौलाना फ़ज़लुर्रहमान हैं. उन्होंने कहा कि दहश्तगर्दों के निशाने पर जो 20 राजनेता हैं उनमें मौलाना फ़ज़लुर्रहमान का नाम सबसे ऊपर है.

मुस्लिम लीग (नवाज़) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ ने इमरान ख़ान पर हमला करते हुए कहा, "जब हुकूमत चलाने की तैयारी नहीं थी, तो शेरवानी पहनने की इतनी जल्दी क्या थी?"

अख़बार 'एक्सप्रेस' के अनुसार मरियम नवाज़ ने कहा, ''अब तो इमरान ख़ान ने ख़ुद टीवी पर इस बात को स्वीकार कर लिया है कि उन्हें तैयारी के बग़ैर सरकार में नहीं आना चाहिए था.''

मरियम ने कहा, "तुम्हारी तैयारी हो न हो, लेकिन जनता ने तुम्हें घर भेजने की तैयारी कर ली है."

बिलावल भुट्टो ज़रदारी

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अब बातचीत का वक़्त गुज़र गया: बिलावल भुट्टो ज़रदारी

हालांकि सरकार की तरफ़ से बातचीत के संकेत भी दिए जा रहे हैं. सेना ने ग्रैंड नेशनल डायलॉग की बात की है लेकिन विपक्ष बातचीत के लिए तैयार नहीं है.

अख़बार 'दुनिया' के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि इमरान को सत्ता में लाने वाले लोग अब ग्रैंड नेशनल डायलॉग का शोशा छोड़ रहे हैं.

नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि बातचीत के लिए तैयार होना पीडीएफ़ के पवित्र उद्देश्य से पीछे हटना होगा. पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो और फ़ज़लुर्रहमान ने भी सरकार की तरफ़ से बातचीत के सुझाव को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया है.

फ़ज़लुर्रहमान ने कहा कि वो इमरान ख़ान की सरकार का ख़ात्मा करके ही दम लेंगे. उन्होंने कहा कि अवाम का समंदर इस्लामाबाद से गंद साफ़ करेगा.

बिलावल भुट्टो ने कहा कि अब सरकार के साथ बातचीत का वक़्त गुज़र चुका है.

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अख़बार 'एक्सप्रेस' के अनुसार बिलावल ने लाहौर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ''पीडीएम यह फ़ैसला करेगी कि इस कठपुतली प्रधानमंत्री का इस्तीफ़ा लेने के लिए किस वक़्त इस्लामाबाद के लिए लॉन्ग मार्च किया जाए. इस लॉन्ग मार्च में हम ग़रीबों, बेरोज़गारों, छात्रों, काश्तकारों और सब लोगों को साथ लेकर जाएंगे जो इसे 'सेलेक्टेड' सरकार से तंग हैं.''

पीडीएम नेताओं की दो जनवरी को इस्लामाबाद में बैठक है जहां आगे की रणनीति के बारे में फ़ैसला होगा.

16 अक्तूबर से अब तक विपक्ष सरकार के ख़िलाफ़ गुजरानवाला, कराची, क्वेटा, पेशावर, मुल्तान और लाहौर में बड़ी रैलियां कर चुका है जिनमें हज़ारों लोग शरीक हुए थे.

उधर मनी लॉन्ड्रिंग के एक केस में मुस्लिम लीग (नवाज़) के अध्यक्ष शहबाज़ शरीफ़ की पत्नी, उनके बेटे, बेटी और दामाद की संपत्ति को भ्रष्टाचार निरोधी संस्था नेशनल एकाउंटीबीलिटी ब्यूरो (नैब) ने क़ुर्क़ कर लिया है.

पत्रकार डेनियल पर्ल

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डेनियल पर्ल के हत्यारे की रिहाई से अमेरिका चिंतित

अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल के अपहरण और हत्या के मामले में चार अभियुक्तों की हिरासत को ग़ैर-क़ानूनी क़रार दिए जाने और उन्हें फ़ौरान रिहा करने के सिंध हाईकोर्ट के फ़ैसले पर अमरीका ने चिंता जताई है.

अख़बार दुनिया के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्रालय के दक्षिण और मध्य एशिया विभाग ने कहा कि सिंध हाईकोर्ट के फ़ैसले को लेकर वो बहुत चिंतित हैं. मंत्रालय ने आगे कहा कि उन्हें विश्वास दिलाया गया है कि फ़िलहाल उन चार अभियुक्तों को रिहा नहीं किया गया है.

अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस केस से जुड़े किसी भी घटनाक्रम पर वो नज़र रखेगा. मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "हम पर्ल की बहादुरी भरी पत्रकारिता का सम्मान करते रहेंगे. इस अत्यंत मुश्किल घड़ी के दौरान पर्ल के परिजनों के पूर्ण समर्थन में हम उनके साथ खड़े हैं."

उधर सिंध सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि वो हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेंगे.

उमर सईद शेख़

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सिंध हाई कोर्ट ने 24 दिसंबर को अपने फ़ैसले में कहा था कि डेनियल पर्ल हत्या मामले में अहम उमर सईद शेख़ समेत चार लोगों के बरी होने के बाद भी उनकी नज़रबंदी का आदेश ग़ैर-क़ानूनी है. अदालत ने उन चारों की फ़ौरन रिहाई के आदेश दे दिए थे.

डेनियल पर्ल के पिता ने सिंध सरकार के इस फ़ैसले का स्वागत किया है. अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की साल 2002 में हत्या कर दी गई थी.

उमर शेख़ समेत चार लोगों को आतंकवाद निरोधी अदालत ने इस मामले में दोषी पाते हुए फांसी की सज़ा सुनाई थी. लेकिन इसी साल के शुरू में सिंध की अदालत ने उन्हें केवल अग़वा करने का दोषी पाते हुए उनकी रिहाई के आदेश दिए थे.

उनकी रिहाई के आदेश के बाद पर्ल के परिजन और अमेरिकी सरकार ने मायूसी जताई थी जिसके बाद पाकिस्तान की सरकार ने उमर शेख़ और उनके साथियों को नज़रबंद कर दिया था.

इसी नज़रबंदी के ख़िलाफ़ सिंध हाईकोर्ट में याचिका दाख़िल की गई थी जिसपर फ़ैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने उनकी नज़रबंदी को अवैध क़रार देते हुए उनकी रिहाई के आदेश दिए थे.

उमर शेख़ को 1994 में चार विदेशी पर्यटकों के अपहरण से जुड़े मामले में भारत में गिरफ़्तार किया गया था.

1994 से वो भारत की जेल में बंद थे लेकिन 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के अपहरण के बाद अपहरणकर्ताओं ने जिन तीन लोगों की रिहाई की माँग की थी उनमें उमर शेख़ भी एक थे.

मोहम्मद अली जिन्ना

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'जिन्ना की टू-नेशन थ्योरी सही साबित हुई'

पाकिस्तानी पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष चौधरी परवेज़ इलाही ने कहा है कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की टू-नेशन थ्योरी सही साबित हुई है.

जिन्ना की जयंती और क्रिसमस के अवसर पर परवेज़ इलाही ने कहा, "क़ायद-ए-आज़म मोहम्मद अली जिन्ना ने टू-नेशन थ्योरी हिंदुओं की मानसिकता को भांपते हुए ही दिया था. उस वक़्त किसी को समझ में नहीं आ रहा था.''

''इसमें कुछ वक़्त तो लगा लेकिन आज टू-नेशन थ्योरी ही सही साबित हुई. आज हिंदुस्तान के मुसलमानों से पूछें उनका क्या हाल है. वहां मुसलमानों समेत तमाम अल्पसंख्यक हिंदुओं के ज़ुल्म से तंग हैं."

बिन्यामिन नेतन्याहू

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इसराइल से हाथ मिलाने वाला पाँचवा इस्लामिक देश कौन होगा?

अख़बार 'एक्सप्रेस' के अनुसार इसराइल के एक मंत्री ने दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद से हटने से पहले इसराइल एक और इस्लामिक देश से हाथ मिलाने में सफल होगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मदद से इसराइल ने इस साल संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सुडान और मोरक्को से राजनयिक रिश्ते क़ायम किए हैं.

अख़बार लिखता है कि इसराइल के क्षेत्रीय सहयोग के मंत्री ओफ़िर एकोनिस ने कहा कि इसराइल इस दिशा में काम कर रहा है लेकिन किसी और देश से शांति समझौते की घोषणा अमेरिका करेगा.

अगला देश कौन होगा जिससे इसराइल रिश्ते क़ायम करेगा? इस सवाल के जवाब में उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया. लेकिन उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि इस दिशा में दो देश सबसे आगे हैं, एक देश खाड़ी में है और दूसरा देश पूरब में बसा एक बड़ा इस्लामिक देश है.

उन्होंने यह भी साफ़ किया कि वो देश सऊदी अरब या पाकिस्तान नहीं हैं. इसराइली मंत्री के इस बयान के बाद कई न्यूज़ एजेंसी ओमान और इंडोनेशिया के नाम का कयास लगा रहे हैं.

हालाँकि इंडोनेशिया कह चुका है कि वो इसराइल को उस समय तक स्वीकार नहीं करेगा जब तक फ़लस्तीनी राष्ट्र की माँग पूरी नहीं हो जाती.

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