फ़्रांस हमला: महातिर मोहम्मद के विवादित ट्वीट, पीएम मोदी ने भी घटना पर जताया दुख

चर्च के बाहर सुरक्षाकर्मी

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फ़्रांस के नीस शहर के एक चर्च में चाकू से किए गए हमले में तीन लोगों की मौत हो गई है. फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे 'इस्लामी आतंकवादी हमला' बताया है.

उन्होंने कहा कि फ़्रांस अपने बुनियादी मूल्यों का समर्पण नहीं करेगा. देश में स्कूलों और चर्चों की सुरक्षा के लिए 4,000 अतिरिक्त सुरक्षाबल लगाए गए हैं.

अधिकारियों के मुताबिक़, नीस में हुए हमले में एक बूढ़ी महिला का 'सिर काट' दिया गया है जबकि एक पुरुष और एक महिला की भी मौत हुई है.

एक संदिग्ध पुरुष को गोली मारी गई है और उसे हिरासत में लिया गया है.

वीडियो कैप्शन, कट्टरपंथी इस्लाम पर फ़्रांस इतना सख़्त क्यों हो रहा?

इस हमले के अलावा गुरुवार को ही फ़्रांस और सऊदी अरब में एक-एक हमला हुआ है.

दक्षिणी फ़्रांसीसी शहर एविन्यू के नज़दीक मोंफ़ेवे में एक शख़्स को गोली मारी गई है क्योंकि वो हैंडगन से पुलिस को धमकी दे रहा था. इसमें उसकी मौत हो गई है.

वहीं, सऊदी अरब के जेद्दा में फ़्रांस वाणिज्य दूतावास के बाहर एक सुरक्षाकर्मी पर हमला किया गया. संदिग्ध हमलावर को हिरासत में लिया गया है जबकि सुरक्षाकर्मी को अस्पताल में भर्ती कराया गया.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले एक फ़्रांसीसी शिक्षक की हत्या के बाद फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ने इस्लामी कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाने का वादा किया था.

इसके बाद तुर्की और पाकिस्तान ने खुलकर फ़्रांस की आलोचना की थी.

गुरुवार की घटना के बाद पूरी दुनिया से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

अब क्या बोले मैक्रों

मैक्रों ने फ़्रांस में इस्लामी कट्टरता ख़त्म करने का वायदा किया है

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नीस के दौरे के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा, "अगर हम पर एक बार फिर हमला होता है तो उसकी वजह हमारे मूल्य हैं: आज़ादी, हमारी धरती पर स्वतंत्र रहने और आतंक की किसी भावना को पलने न देना मुमकिन है."

"मैं साफ़तौर पर आज फिर कह देना चाहता हूं कि हम समर्पण नहीं करेंगे."

राष्ट्रपति ने कहा है कि सार्वजनिक जगहों की सुरक्षा के लिए देश में सुरक्षाकर्मियों की संख्या 3,000 से 7,000 की जाएगी.

इनके अलावा मैक्रों ने कई ट्वीट भी किए हैं. उन्होंने एक ट्वीट में लिखा है, "फ़्रांस में सिर्फ़ एक समुदाय है और वह है राष्ट्रीय समुदाय."

अगले ट्वीट में उन्होंने देश की जनता से ऐसे समय में एकजुट होकर रहने के लिए कहा है.

पीएम मोदी ने भी जताया शोक

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और इसकी निंदा की है. उन्होंने ट्वीट किया है कि वो नीस में गुरुवार को हुए हमले समेत हाल में हुए आतंकी हमलों की निंदा करते हैं.

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "फ़्रांस में पीड़ितों और उनके परिजनों के साथ हमारी गहरी संवेदनाएं हैं. भारत आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में फ़्रांस के साथ खड़ा है."

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ट्वीट करके फ़्रांस के साथ हमदर्दी जताई है.

ट्रंप ने ट्वीट किया है, "हमारे दिल फ़्रांस की जनता के साथ हैं. इस लड़ाई में अमरीका हमारे सबसे पुराने सहयोगी के साथ खड़ा है. यह कट्टर इस्लामी आतंकवादी हमले तुरंत रुकने चाहिए. फ़्रांस या कोई भी देश लंबे समय तक इसके साथ नहीं रह सकता है."

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ईसाई धर्मगुरु पोप फ़्रांसिस ने नीस हमले में मारे गए लोगों के लिए शोक व्यक्त किया है.

उन्होंने ट्वीट किया, "मैं नीस में कैथोलिक समुदाय के क़रीबी हूं. मैं चर्च के पास हुए हमले से बेहद दुखी हूँ. मैं हमले में मारे गए लोगों, उनके परिजनों और फ़्रांस के प्यारे लोगों के लिए प्रार्थना करता हूं कि वो बुराई का जवाब भलाई से दें."

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विवादित ट्वीट भी आया सामने

एक ओर जहां आम और ख़ास लोग इस हमले को लेकर दुख जता रहे हैं. वहीं, मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री के कई विवादित ट्वीट चर्चा का विषय बन गए हैं.

95 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं.

महातिर मोहम्मद

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इनमें उनके एक ट्वीट की जमकर आलोचना हो रही है. लोग इन्हें नफ़रत, पूर्वाग्रहों से भरा हुआ और हिंसा के लिए उकसाने वाला बता रहे हैं.

ट्विटर ने उनके सिर्फ़ एक ट्वीट को हटाया है.

वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने महातिर मोहम्मद के ट्वीट्स की निंदा की है और लिखा है, "95 साल की उम्र में भी यह व्यक्ति इस क़दर ज़हर से भरा हुआ है."

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