पाकिस्तान के सिंध प्रांत में कथित गैंगरेप के बाद हिंदू लड़की की आत्महत्या

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- Author, रियाज़ सोहैल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान के सिंध प्रांत के रेगिस्तानी इलाक़े थार में पुलिस के मुताबिक बीते साल कथित तौर पर रेप का निशाना बनने वाली एक हिंदू लड़की ने आत्महत्या कर ली है.
पुलिस के मुताबिक लड़की को धमकियां मिल रहीं थीं और ब्लैकमेल किया जा रहा था. ये घटना थरपारकर ज़िले के डालान-जो-टर्र गांव में हुई है. पीड़िता ने एक कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली.
पुलिस का कहना है कि पीड़िता के परिजनों की शिकायत के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. इस मामले में अब तक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है.
लड़की के पिता का कहना है कि दिन पहले जब रात को उनकी आंख खुली तो देखा कि बेटी बिस्तर पर नहीं है. उन्होंने पड़ोसियों को जगाकर खोजबीन शुरू की. लेकिन उसके पैरों के निशान नहीं मिले.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब वो लड़की को तलाश करते-करते अभियुक्त के घर की ओर गए तो उन्हें लड़की और उसके पैरों के निशान मिल गए. उन्होंने घर का घेराव किया तो अभियुक्त वहां मौजूद था.

रेप का मुकदमा
लड़की के पिता ने बताया, उस वक्त रात के दो बज चुके थे. उसी समय हमने एक ज़ोरदार आवाज़ सुनी जो पास ही के एक कुएं से आई थी. उन्होंने बताया कि जब हम वहां पहुंचे तो कुएं के पास उसके पैरों के निशान थे. बाद में पुलिस ने पहुंच कर लाश को कुएं से निकाला.
ये घटना चेलहार थाना क्षेत्र में हुई है. चेलहार थाने के एसएचओ मुश्ताक़ मलिक का कहना है कि लड़की के परिजनों ने जो शिकायत दी है वही मुकदमा दर्ज किया गया है. उनके मुताबिक, पुलिस को कुएं के आसपास लड़की के अलावा किसी और के पैरों के निशान नहीं मिले.
मृतका के पिता के सात बच्चे हैं. उन्होंने बीते साल अपनी 18 साल की बेटी के साथ रेप का मुकदमा दर्ज करवाया था जिसमें तीन लोग अभियुक्त थे.
पाकिस्तानी अख़बार डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक उस समय के एसएसपी अबदुल्लाह अहमद ने कहा था कि मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई.
हिंदू और मुसलमान
पीड़िता के पिता का कहना है कि पुलिस ने उस समय तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था लेकिन उन्हें तीन महीने बाद ही ज़मानत मिल गई थी. इसके बाद से ही वो धमकियां दे रहे थे.
उन्होंने दावा किया है कि कोरोना की वजह से उनके मुकदमे की सुनवाई नहीं हो सकी. अब इस मुकदमे में 15 अक्तूबर को परिवार के कलमबंद बयान दर्ज किए जाने थे. पीड़िता भी अपने बयान पर क़ायम थी.
उनका कहना है कि, उसे डराने के लिए धमकियां दी जा रहीं थी और दबाव बनाया जा रहा था जिसकी वजह से उसने खुदकुशी कर ली.
इस मामले में पीड़िता और अभियुक्त एक ही गांव के हैं. डालान-जो-टर्र गांव भी उन इलाक़ों में शामिल है जहां हिंदू और मुसलमान साथ-साथ रहते हैं. जबकि थार रेगिस्तान की तकरीबन आधी आबादी हिंदू है.
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