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लंदन में महाराजा दलीप सिंह के बेटे का घर बिकने को तैयार
- Author, गगन सबरवाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन
लंदन में महाराज दलीप सिंह के बेटे प्रिंस विक्टर अल्बर्ट जय दलीप सिंह का घर रहा एक शानदार पांच मंजिला एक मकान बिकने के लिए उपलब्ध है और इसकी क़ीमत क़रीब डेढ़ करोड़ पाउंड या लगभग 150 करोड़ रुपए रखी गई है.
महाराज दलीप सिंह महाराज रंजीत सिंह के सबसे छोटे बेटे थे. वो 19वीं सदी में सिख साम्राज्य के आखिरी महाराज थे. महाराज दलीप सिंह को 1849 में दूसरे एंग्लो-सिख लड़ाई के बाद पंजाब में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था. उनसे उनकी उपाधि भी छीन ली गई थी. बाद में उन्हें लंदन निर्वासन में भेज दिया गया था.
प्रिंस विक्टर अल्बर्ट जय दलीप सिंह उनके सबसे बड़े बेटे थे. उनकी मां महारानी बाम्बा मुलर थी. उनकी एक बेटी भी थी जिनका नाम सोफिया दलीप सिंह था. वो ब्रितानी इतिहास में महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली एक जुझारू कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती है.
प्रिंस विक्टर अल्बर्ट जय दलीप सिंह का जन्म लंदन में 1866 में हुआ था. वो महारानी विक्टोरिया के गॉड सन थे.
बिकने के लिए बाज़ार में आया उनका घर दक्षिण-पश्चिम केंसिंग्टन के लिटल बॉलटॉन्स इलाक़े में है जो रिहायशी क्षेत्रों के बाद लंदन का सबसे शानदार इलाका है.
प्रिंस विक्टर जय दलीप सिंह लेडी ऐन कॉवेंट्री के साथ शादी करने के बाद इस मकान में आए थे. जनवरी 1898 में उनकी शादी हुई थी. लेडी ऐन, कॉवेंट्री के नौवें अर्ल की बेटी थी.
उनकी इस शादी से लंदन के संभ्रांत वर्ग में काफी हलचल मच गई थी. यह पहली बार था जब भारत के किसी शाही घराने का कोई शख़्स इंग्लैंड के किसी रईस घराने की लड़की से शादी कर रहा था.
इस शादी का दोनों ही परिवारों में जमकर विरोध हुआ था. यह शादी लंदन के इटॉन स्क्वायर के सेंट पीटर चर्च में हुई थी. कहा जाता है कि उनकी शादी प्रिंस विक्टर के दोस्त प्रिंस एडवर्ड की मदद की वजह से संभव हो पाई थी. वो उस वक्त प्रिंस ऑफ़ वेल्स थे और बाद में किंग एडवर्ड सप्तम बने.
ब्रिटिश अधिकारियों ने यह घर नवविवाहित जोड़े को लीज पर दिया था. 1871 की जनगणना में इस घर पर ईस्ट इंडिया कंपनी का स्वामित्व दिखाया गया है. इसमें एक बटलर, दो नौकरानियां, इंग्लिश सिखाने के लिए एक गवर्नेस और एक माली रहते थे.
इस घर को जॉन स्पाइसर ने 1866-68 के बीच बनाया था. इसका डिज़ाइन आर्किटेक्ट जॉर्ज गॉडविन जूनियर ने तैयार किया था. 1868 में यह घर बनकर तैयार हो गया था. इसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने खरीदा था.
इसे किराए पर देने के लिए पूंजी निवेश के तौर पर पंजीकृत कराया गया था.
इस घर के अलावा महाराज दलीप सिंह के परिवार के पास विंबलडन और रोहैम्पटन में भी संपत्तियाँ हैं और ये दोनों भी उन्हें लीज़ पर ही दिए गए थे.
पूर्वी इंग्लैंड के सफ़क में 17,000 एकड़ में बने एक घर में भी यह शाही परिवार रह चुका है.
विक्टर जय दलीप सिंह और उनकी पत्नी पहले विश्व युद्ध के सालों में मोनाको में रहे थे. वहां प्रिंस की मौत 51 साल की उम्र में 7 जून 1918 को हो गई थी.
उनकी पत्नी राजकुमारी ऐन उसके बाद लंदन लौट गई थी और लिटिल बॉलटॉन्स के इसी मकान में ज़िंदगी भर रही थीं. उनकी मृत्यु 82 साल की उम्र में 2 जुलाई, 1956 को हुई.
इस घर को बेचने में मदद करने वाले ब्यूचैम्प एस्टेट के मुताबिक यह संपत्ति आख़िरकार निजी हाथों में चली गई थी. 2010 में इसकी मरम्मत और आधुनिकीकरण किया गया था.
5,613 स्क्वायर फीट में बने इस घर में पांच बेडरूम, दो स्वागत कक्ष, एक फैमिली रूम, एक फैमिली किचन और एक ब्रेकफास्ट रूम हैं. इसके अलावा एक जिम और दो स्टाफ बेडरूम हैं.
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