किम जोंग-उन ने बहन यो-जोंग को दी ‘बड़ी ज़िम्मेदारियां’

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उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग-उन ने अपने क़रीबियों को और अधिक ताक़तें दे दी हैं. इसमें उनकी बहन किम यो-जोंग भी शामिल हैं. इसका दावा दक्षिण कोरिया की जासूसी एजेंसी ने किया है.
जासूसी एजेंसी का कहना है कि किम जोंग-उन के पास अभी भी 'पूरी ताक़त' है लेकिन उन्होंने अपने ऊपर दबाव कम करने के लिए कई क्षेत्रों को अपने क़रीबियों में बांट दिया है.
किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग अब 'राष्ट्र के सभी मामलों को देख रही हैं.'
हालांकि, दक्षिण कोरिया की जासूसी एजेंसी की उत्तर कोरिया को लेकर जारी की गई ख़बरें ग़लत निकलती रही हैं.
गुरुवार को दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय असेंबली में इन दावों पर बंद दरवाज़ों के बीच चर्चा हुई जिसके बाद असेंबली के सदस्यों ने पत्रकारों से इस पर चर्चा की.
जासूसी एजेंसी का कहना था, "किम जोंग-उन के पास अभी भी पूरी सत्ता बरक़रार है लेकिन वो कुछ ताक़तें धीरे-धीरे बाक़ियों को सौंप रहे हैं."
किम जोंग-उन की बहन को अमरीका और दक्षिण कोरिया के लिए नीति समेत बाकी नीति संबंधी मुद्दे सौंपे गए हैं और वो दूसरी शीर्ष नेता हैं. हालांकि, उन्हें किम जोंग-उन के उत्तराधिकारी के तौर पर नहीं चुना गया है.
एजेंसी का कहना है कि किम जोंग-उन ने इसलिए यह फ़ैसला लिया है क्योंकि वो 'अपने शासन के दौरान पड़ने वाले दबाव को कम करना चाहते हैं साथ ही किसी नीति के नाकाम होने की दिशा में ख़ुद को दोषी नहीं ठहराना चाहते हैं.'
वहीं, कुछ विश्लेषक इस दावे को लेकर शक जता रहे हैं क्योंकि हाल में एनके न्यूज़ वेबसाइट ने एक ख़बर प्रकाशित की थी जिसमें बताया गया था कि इस महीने किम यो-जोंग दो अहम बैठकों से ग़ायब रही थीं. तब यह अनुमान लगाया गया था कि उनकी शक्तियां कम कर दी गई हैं.
कौन हैं किम यो-जोंग
किम यो-जोंग उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग-उन की इकलौती और छोटी बहन हैं.
1987 में पैदा हुईं यो-जोंग किम से चार साल छोटी हैं. दोनों ने साथ रहकर स्विट्ज़रलैंड के बर्न में पढ़ाई की थी.
यो-जोंग 2018 में तब चर्चा में आई थीं जब वो दक्षिण कोरिया जाने वाली किम वंश की पहली सदस्य बनी थीं. वो शीतकालीन ओलंपिक में जाने वाले प्रतिनिधिमंडल की सदस्य थीं. इस ओलंपिक में उत्तर और दक्षिण कोरिया संयुक्त टीम के रूप में मैदान में उतरे थे.
साथ ही उन्होंने अपने भाई के साथ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए काम किया है. इसमें दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक शामिल है.
सियोल में बीबीसी संवाददाता लॉरा बिकर का कहना है कि किम यो-जोंग तेज़ी से सत्ता के शिखर पर चढ़ रही हैं इसमें कोई शक़ नहीं है.
वो कहती हैं, "कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस साल की शुरुआत में उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच जो इंटर-कोरियन संपर्क कार्यालय समाप्त किया गया वो यो-जोंग को एक मंच देने के लिए था. इसके बाद ही मार्च में वो पहली बार सार्वजनिक बयान देने आईं. दक्षिण कोरिया की निंदा करते हुए उन्होंने ज़ुबानी हमला बोला था. बाद में उन्होंने बोला कि उन्होंने सुप्रीम लीडर, पार्टी और राष्ट्र के द्वारा शक्ति दी गई है."
हालांकि, लॉरा बिकर कहती हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि वो अपने भाई की जगह उत्तर कोरिया की शीर्ष नेता बनने जा रही हैं और केवल उन्हीं को अतिरिक्त ज़िम्मेदारी नहीं दी गई है, बाक़ियों को भी कुछ ताक़तें दी गई हैं.
लॉरा कहती हैं कि अभी भी किम जोंग-उन के पास अंतिम फ़ैसला लेने की ताक़त है लेकिन अब उनकी बहन सार्वजनिक कार्यक्रमों में पीछे छिपी नहीं दिखा करेंगी बल्कि उत्तर कोरिया की विदेशी नीति में आगे रहेंगी.
दक्षिण कोरिया की जासूसी एजेंसी विश्वसनीय?
उत्तर कोरिया के बारे में पूरी दुनिया को बहुत कम ही मालूम है.
दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय ख़ुफ़िया सेवा के पास उत्तर कोरिया को लेकर किसी और संगठन से अधिक ही जानकारी है लेकिन उसके पास भी मिली-जुली जानकारी है.
उदाहरण के रूप में 2016 में दक्षिण कोरिया के मीडिया में ख़ुफ़िया एजेंसी के हवाले से कहा गया कि उत्तर कोरिया सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ री योंग गिल को मार दिया गया है लेकिन तीन महीने बाद दक्षिण कोरियाई सरकार ने कहा कि वो ज़िंदा दिखे हैं और उनका नाम पार्टी के पदाधिकारियों में नाम है.
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