टिक टॉकः सत्या नडेला से बातचीत के बाद बदले ट्रंप, माइक्रोसॉफ़्ट का रास्ता साफ़

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने टेक कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट के चीनी ऐप टिक टॉक को ख़रीदने को लेकर अपना विरोध वापस ले लिया है.
मगर उन्होंने कहा है कि अमरीका सरकार को इस सौदे का एक अच्छा-ख़ासा हिस्सा दिया जाना चाहिए. हालाँकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ये सौदा कितने में तय होगा.
इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति ने पिछले सप्ताह चीनी ऐप टिक-टॉक पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी.
लेकिन इसके बाद भी माइक्रोसॉफ्ट ने कहा था कि वो टिक-टॉक के सौदे को लेकर बातचीत जारी रखे हुए है.
कंपनी ने कहा है कि माइक्रोसॉफ्ट के चीफ़ एक्जीक्यूटिव अधिकारी सत्या नडेला की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से रविवार को बात हुई है. कंपनी ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि वो राष्ट्रपति ट्रंप की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को 'महत्व देने की पूरी तरह से सराहना' करता है.
कंपनी ने आगे कहा है कि वो ऐप की सुरक्षा को लेकर पूरी समीक्षा करेंगे. माइक्रोसॉफ्ट ने अपने एक ब्लॉग में कहा है कि वो अमरीकी सरकार को इस सौदे से देश को होने वाले 'आर्थिक लाभ' के बारे में भी विस्तार से बताएगी.
माइक्रोसॉफ्ट को उम्मीद है कि टिक-टॉक के स्वामित्व वाली कंपनी बाइट डांस के साथ 15 सितंबर तक सौदे की बातचीत पूरी हो जाएगी.
माइक्रोसॉफ्ट ने बताया है कि वो अमरीका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बाजार में टिक-टॉक का अधिकार खरीदना चाहती है.
कंपनी का यह भी कहना है कि वो दूसरे अमरीकी निवेशकों को भी इसमें निवेश करने के लिए आमंत्रित कर सकती है.
माइक्रोसॉफ्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि 'सभी अमरीकी टिक-टॉक यूजर्स का निजी डेटा' स्थानांतरित कर दिया गया है और वो अमरीका में ही रहेगा.
कंपनी इस बात को लेकर आश्वस्त करती है कि कोई भी डेटा जो देश के बाहर स्टोर किया हुआ है वो अमरीकी डेटा सेंटर में स्थानांतरित होने के बाद वहाँ के सर्वर से हटा दिया जाएगा.
कंपनी ने "देश को मज़बूत सुरक्षा प्रदान करने को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की निजी पहल की सराहना की है." लेकिन कंपनी ने यह भी कहा है कि टिक-टॉक के साथ अभी बातचीत 'शुरुआती दौर' में है और यह 'निश्चित नहीं' है कि यह सौदा हो ही जाए.
क्या है अमरीका की चिंता?

वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक टिक-टॉक की माइक्रोसॉफ्ट के साथ संभावित डील ट्रंप की घोषणा के बाद ऐसा लगा था कि रोक दी जाएगी.
इस डील के होने पर लगा था कि अब संकट के बादल छा गए हैं.
अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने फॉक्स न्यूज़ से कहा है कि आने वाले दिनों में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े सॉफ्टवेयर की वजह से पैदा हुए 'राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों' को लेकर सरकार कदम उठाएगी.
इसमें एक टिक-टॉक भी शामिल है. इस ऐप पर लोग पंद्रह सेकंड के छोटे-छोटे वीडियो शेयर करते हैं.
बाइटडांस ने साल 2017 में टिक टॉक को लॉन्च किया था. उसके बाद उसने म्यूज़िकली नाम की एक वीडियो सेवा को ख़रीदा जो अमरीका और यूरोप में युवाओं में काफ़ी लोकप्रिय सेवा थी.
पूरी दुनिया में टिक-टॉक के 50 करोड़ और अमरीका में करीब आठ करोड़ यूजर्स हैं. टिक-टॉक यूजर्स का एक बड़ा हिस्सा 20 साल या उससे कम उम्र का है.
अमरीका में अधिकारी और नेता इस बात को लेकर चिंता जता रहे हैं कि टिक- टॉक के ज़रिए बाइटडांस कंपनी जो डेटा इकट्ठा कर रही है वो चीनी सरकार के पास पहुंच सकता है.

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इससे पहले भारत सरकार ने भी इसी तरह की चिंता जताते हुए पिछले महीने चीन के दर्जनों ऐप्स पर पाबंदी लगा दी थी जिनमें टिक टॉक भी शामिल था.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने अपने एक बयान में कहा है, "टिक-टॉक को लेकर प्रशासन को सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएँ हैं. हम आगे की नीतियों का मूल्यांकन जारी रखेंगे."
वाल स्ट्रीट जर्नल का कहना है कि बाइटडांस ने व्हाइट हाउस के सामने महत्वपूर्ण रियायतें देने की पेशकश की है. इसमें तीन सालों में हजारों नौकरियाँ देने की पेशकश भी शामिल है.
इस डील से सोशल मीडिया के क्षेत्र में माइक्रोसॉफ्ट की एक मज़बूत पकड़ बनेगी. सोशल मीडिया साइट लिंकेडइन माइक्रोसॉफ्ट का ही है. अमरीका में टिक-टॉक का व्यापार करीब 15 बिलियन डॉलर से लेकर 30 बिलियन डॉलर तक आंका गया है.
फाइनेंनशियल टाइम्स के अनुसार बाइटडांस कंपनी के कुछ अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप की दखल से माइक्रोसॉफ्ट को एक डील में बेहतर स्थिति पाने में मदद मिल सकती है.
टिक-टॉक ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ होने वाले डील पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है लेकिन उनके एक प्रवक्ता ने कहा है कि, "हम अफवाह और अटकलों को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करने जा रहे है, टिक-टॉक के लंबे वक्त तक कामयाबी होने का हमें भरोसा है."
टिक-टॉक ने यह भी दोहराया है कि वो यूजर्स की निजता और गोपनीयता को सुरक्षित रखने को लेकर प्रतिबद्ध है.
टिक-टॉक क्या कहना है?

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मौजूदा आरोप-प्रत्यारोप और गतिरोध पर टिक-टॉक का कहना है कि, "टिक-टॉक के अमरीकी यूजर्स का डेटा अमरीका में ही स्टोर होता है. इस पर सख्त नियंत्रण रखा जाता है. टिक-टॉक के सबसे बड़े निवेशक अमरीका से ही है."
"हम अपने यूजर्स की निजता और गोपनीयता को सुरक्षित रखने को लेकर प्रतिबद्ध है और हम परिवारों में यूँ ही खुशियाँ और जो हमारे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करियर बनाने में कर रहे हैं, उनके लिए अवसर मुहैया कराते रहेंगे."
"हमने अपने अमरीकी टीम में इस साल करीब 1000 लोगों को रखा है और 10000 और लोगों को हम गर्व के साथ कहते है कि रोजगार देने जा रहे हैं."
यह प्रतिबंध कैसे लगाया जा सकता है?
एप्पल और गूगल को अपने ऑनलाइन स्टोर से इस ऐप को हटाने को कहा जा सकता है.
टिक-टॉक के स्वामित्व वाली कंपनी बाइटडांस को कॉमर्स डिपार्टमेंट के उस सूची में डाल सकते हैं जिनके साथ अमरीकी कंपनी काम नहीं कर सकते हैं. इसी तरह की रणनीति का इस्तेमाल ख्वावे को मुहैया होने वाले गूगल ऐप को रोकने के लिए किया गया था.
इससे कोई नया यूजर ऐप डाउनलोड नहीं कर पाएगा.
जो मौजूदा यूजर्स होंगे, उन्हें ना नोटीफिकेशन मिलेगा और ना ही वो अपडेड कर पाएंगे भले उनके डिवाइस में ऐप डाउनलोड हो.

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एप्पल और गूगल को 'किल स्विच' का इस्तेमाल करने को भी कहा जा सकता है. इसकी मदद से वो ब्लैकलिस्ट ऐप को दूर बैठे ही रोक सकते है या फिर उसे पूरी तरह से साफ कर सकते हैं.
ब्राजील के एक जज ने 2014 में दो कंपनियों को इस तरह की धमकी थी लेकिन आखिरकार फैसला नहीं लिया था.
एप्पल और गूगल इस तरह से यूजर्स के स्मार्टफोन को नियंत्रण में लेने का विरोध भी कर सकते हैं.
एक आसान तरीका यह भी होगा कि स्थानीय इंटरनेट सर्विस मुहैया कराने वाले को इस बात के लिए कहा जाए कि वो टिक-टॉक का सर्वर ऐक्सेस ब्लॉक कर दे.
इसका एक फायदा यह भी होगा कि वेबसाइट की मदद से भी कोई टिक-टॉक की वीडियोज नहीं देख सकेगा.
भारत ने टिक-टॉक और दूसरे चीनी ऐप पर बैन लगाने के लिए यही रास्ता अपनाया है. यूजर्स ने वर्जुअल प्राइवेट नेटवर्क की मदद से भी इस ब्लॉक को नहीं तोड़ पाने की बात कही है.
लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप टिक-टॉक पर बैन लगाने के आदेश को कैसे लागू करेंगे.
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