ट्रंप के लिए सिरदर्द क्यों बनते जा रहे हैं नस्लविरोधी प्रदर्शन

अमरीका में एक बार फिर नस्लविरोधी आंदोलन ने ज़ोर पकड़ लिया है जबकि राष्ट्रपति चुनाव में अब बमुश्किल तीन महीने का वक़्त बचा रह गया है. अमरीका में तीन नवंबर, 2020 को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं.

लेकिन वहाँ एक बार फिर विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं. विरोध प्रदर्शन के दौरान अमरीकी शहर सिएटल में प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की भिड़ंत हुई है. यह रैली पोर्टलैंड में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के समर्थन में निकाली गई थी.

इन विरोध प्रदर्शनों में अब तक 45 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और इस दौरान 21 पुलिस वाले ज़ख़्मी हुए हैं. टेक्सास के ऑस्टिन में ब्लैक लाइव्स मैटर प्रोटेस्ट के दौरान एक व्यक्ति की मौत भी हुई है.

स्थानीय अख़बार ऑस्टिन स्टेट्समैन ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया है कि जब प्रदर्शनकारी सड़कों पर जमा हुए थे, तब किसी ने प्रदर्शनकारियों पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की. इसके बाद गाड़ी में बैठे व्यक्ति ने प्रदर्शनकारियों के समूह पर गोली चलानी शुरू की. इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई.

मृत व्यक्ति की माँ ने बाद में उनकी पहचान गैर्रेट फोस्टर के रूप में की है. उन्होंने समाचार चैनल एबीसी से कहा कि गैर्रेट गोली चलने के दौरान अपने मंगेतर के व्हीलचेयर को खींच रहे थे. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 50 दिनों से गैर्रेट नस्लविरोधी आंदोलनों में हिस्सा ले रहे थे.

क्यों भड़की है हिंसा

क़रीब दो महीने पहले अमरीका में एक काले व्यक्ति जॉर्ज फ़्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से अमरीका समेत दुनिया के कई हिस्सों में नस्ल विरोधी आंदोलन चल रहे हैं. इस आंदोलन का नारा है ब्लैक लाइव्स मैटर.

इसने पूरी दुनिया में नस्लवाद पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है. इतिहास के नायकों का फिर से मूल्यांकन किया जा रहा है. अमरीका समेत कई जगहों पर प्रदर्शनकारी ग़ुलामी प्रथा से जुड़े लोगों की मूर्तियाँ गिरा रहे हैं. कई बड़ी कंपनियों ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है.

अमरीका के सभी 50 प्रांतों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इलिनॉय के एक छोटे से गाँव अन्ना में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. यह स्थानीय तौर पर सबसे नस्लभेदी जगह माना जाता है. वाशिंगटन डीसी में अमरीकी राष्ट्रपति के निवास व्हाइट हाउस जाने वाली एक सड़क का नाम ब्लैक लाइव्स मैटर प्लाज़ा रखा जा चुका है.

काले लोगों के प्रति भेदभाव

अमरीका में अपराध और न्याय से जुड़े आँकड़ों पर नज़र दौड़ाने पर पता चलता है कि पुलिस की गोली से मारे जाने के मामले में अफ़्रीकी-अमरीकी लोगों की तदाद उनकी अमरीका में कुल आबादी के अनुपात में अधिक है.

इसके अलावा गोरे लोगों की तुलना में ड्रग्स के मामले में गिरफ़्तार होने वाले अफ़्रीकी-अमरीकियों की दर कहीं अधिक है, जबकि सर्वे में यह बात सामने आई है कि दोनों ही समुदायों में ड्रग्स का इस्तेमाल समान स्तर पर ही होता है.

हाल में जारी आँकड़ों के मुताबिक़ अफ़्रीकी-अमरीकी लोग गोरे लोगों की तुलना में पाँच गुना अधिक जेल की हवा खाते हैं जबकि हिस्पैनिक-अमरीकियों की तुलना में दो गुना ज़्यादा.

2018 में अफ़्रीकी-अमरीकी अमरीका की आबादी का महज 13 फ़ीसदी थे, लेकिन देश की जेल में क़ैद जितने लोग हैं, उसमें एक तिहाई हिस्सा इन्हीं का है.

हिंसा में कई स्थानीय मुद्दे भी

जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के अलावा अब और भी कई काले लोगों की मौत को लेकर अमरीका में हिंसा भड़की हुई है.

सिएटल और ऑस्टिन के अलावा प्रदर्शनकारियों ने केंटुकी, ऑरोरा, कोलोराडो, न्यूयॉर्क, ओमाहा, नेबरास्का, ऑकलैंड, कैलिफोर्निया के लॉस एंजेलेस और वर्जिनिया के रिचमॉड में मार्च निकाला है.

पोर्टलैंड में हिंसक झड़प की वजह से इस आंदोलन ने नए सिरे से ज़ोर पकड़ लिया है, जबकि इस महीने की शुरुआत में पुलिस के पीछे हटने के बाद विरोध-प्रदर्शन भी बंद हो गए थे.

पोर्टलैंड में स्थानीय विपक्षी और राज्य के दूसरे नेताओं के विरोध के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय बल तैनात करने का फ़ैसला किया था. उनका कहना था हालात पर क़ाबू पाने और सरकारी इमारतों को नुक़सान से बचाने के लिए उन्होंने यह फ़ैसला किया है.

प्रदर्शनकारियों के साथ इस संघीय बल की हिंसक झड़प हुई है, जिसकी वजह से मौजूदा तनाव और बढ़ गया है और दूसरी जगहों पर इसके समर्थन में अब रैलियाँ निकाली जा रही हैं.

कोलेराडो में पिछले साल अगस्त में 23 साल के एक नौजवान एलिजा मैक क्लेन की भी पुलिस द्वारा रोकने के दौरान मौत हो गई थी. विरोध प्रदर्शन के दौरान उस मामले को भी अब सामने लाया जा रहा है.

केंटुकी में सैकड़ों ब्लैक मिलिशिया 26 साल की काली महिला ब्रेओना टेलर के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं. मार्च के महीने में उनके घर में घुसकर पुलिस ने उन्हें गोली मारी थी.

इसके अलावा पुलिस का कहना है कि नेबरास्का के ओमाहा में उसने कम से कम 75 लोगों को गिरफ़्तार किया है. यहाँ प्रदर्शनकारी 22 साल के जेम्स स्करलॉक नाम के एक काले व्यक्ति के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं. जेम्स को मई के महीने में एक गोरे बार मालिक ने गोली मार दी थी.

पुलिस ने ट्वीट किया है कि वर्जीनिया के रिचमोंड में प्रदर्शनकारियों ने कूड़ा ढोने वाली एक लॉरी में आग लगा दी.

चुनाव पर पड़ेगा असर

अमरीका में जहाँ एक तरफ चुनाव होने वाले हैं, तो वहीं दूसरी तरफ़ मई के महीने में शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन अब भी बदस्तूर जारी है. इस पूरे प्रकरण को ट्रंप प्रशासन की काफ़ी आलोचना भी हो रही है और क़ानूनी तौर पर उन्हें चुनौती देने की भी बात हो रही है.

लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि ट्रंप की इस तरह की कार्रवाइयों में उनकी चुनावी रणनीति भी शामिल हैं. वो चुनाव को देखते हुए जिन राज्यों में डेमोक्रेट्स की सरकार हैं, वहाँ उन्हें क़ानून-व्यवस्था संभालने के मामले लचर दिखाना चाहते हैं.

अमरीका की आबादी में लगभग 13 फ़ीसदी काले हैं. ट्रंप से ठीक पहले बराक ओबामा राष्ट्रपति थे, जो अमरीका के राष्ट्रपति बनने वाले पहले अफ़्रीकी मूल के अमरीकी हैं.

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