पुतिन के संवैधानिक सुधारों को मिला रूस में भारी समर्थन, 2036 तक बने रह सकते हैं राष्ट्रपति

रूस के लोगों ने संवैधानिक सुधारों का मज़बूती के साथ समर्थन किया है. इसका एक मतलब यह भी हो सकता है कि मौजूदा राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन साल 2036 तक राष्ट्रपति बने रहें.

शुरुआती नतीजे इसी ओर इशारा कर रहे हैं.

चुनाव आयोग के मुताबिक़, लगभग 87 फ़ीसदी मतों की गिनती हो चुकी है और 77 फ़ीसदी मत संवैधानिक सुधारों के समर्थन में डाले गए हैं.

इन सुधारों के तहत साल 2024 से पुतिन की बतौर राष्ट्रपति कार्यकाल सीमा शून्य हो जाएगी. इसका सीधा मतलब ये हुआ कि वे 6-6 साल के दो और टर्म तक राष्ट्रपति बने रह सकेंगे.

विपक्ष का आरोप है कि पुतिन आजीवन राष्ट्रपति बने रहना चाहते हैं. हालांकि पुतिन इन आरोपों को ख़ारिज करते रहे हैं.

रूस की सरकार के एक बड़े आलोचक अलेक्सी नवालनी ने अब तक जो परिणाम घोषित किये गए हैं उन्हें झूठ बताकर ख़ारिज किया है. उनका कहना है कि ये नतीजे देश की जनता की सही राय को नहीं दिखाते.

सात दिनों तक चली वोटिंग की कोई स्वतंत्र जांच नहीं हुई है और बीते दिनों में नए संविधान की प्रतियाँ भी बुकस्टॉल्स पर बिकती मिली थीं.

इंटरफैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, दिलचस्प बात यह रही कि अभी वोट पड़ ही रहे थे तभी आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने इस बात की घोषणा कर दी कि वोटिंग के दौरान ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है जिससे नतीजे प्रभावित हों.

संवैधानिक परिवर्तनों के ख़िलाफ़ सैकड़ों की तादात में विरोधियों ने मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में विरोध प्रदर्शन किया.

रूस में बीते सप्ताह वोटिंग शुरू हुई थी. चुनाव आयोग के मुताबिक़, इसमें मतदान प्रतिशत 64% रहा था.

रूस के मौजूदा राष्ट्रपति और उनके समर्थकों का कहना है कि कुल मिलाकर 200 से अधिक सुधार किए गए हैं, जिससे राष्ट्रीय स्थिरता को सुनिश्चित करने के प्रयासों को बल मिलेगा.

67 साल के राष्ट्रपति पुतिन ने ऐसा कुछ नहीं कहा कि वो 2024 में अपनी मौजूदा टर्म ख़त्म होने के बाद फिर राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतरेंगे. लेकिन उन्होंने ये ज़रूर कहा कि ये अहम है कि उनके पास ऐसा करने का विकल्प है.

वो 20 साल तक राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के तौर पर रूस की सत्ता पर काबिज़ रहे हैं.

रूस के पोलिंग स्टेशनों पर आम तौर पर काफ़ी जीवंत माहौल रहता है. वहाँ संगीत होता है, खाने के स्टॉल होते हैं और मनोरंजन का भी इंतज़ाम होता है.

लेकिन इस बार माहौल अलग था. दरवाज़े पर लोगों का तापमान जाँचा जा रहा है और स्टाफ़ कोरोना वायरस से बचने के लिए लोगों को मास्क दे रहे थे.

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