अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों को मारने के लिए रूस ने दिया पैसा?

रूस ने उन रिपोर्टों को ख़ारिज किया है जिसमें कहा गया था कि उसने तालिबान समर्थित चरमपंथियों को अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों को मारने के लिए पैसा दिया था.

अमरीकी अधिकारियों के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट और वॉल स्ट्रीट जर्नल अख़बार ने रिपोर्ट की थी कि रूसी सैन्य ख़ुफ़िया यूनिट ने पिछले साल इसके लिए पैसा दिया था.

इसी यूनिट पर यूरोप में जानलेवा हमले की कोशिशों के आरोप लगे थे.

अमरीका में रूसी दूतावास ने कहा है कि इन दावों से उसके राजनयिकों पर ख़तरा पैदा हो जाएगा.

वहीं, तालिबान ने भी इस आरोप को ख़ारिज किया है और कहा है कि उसने रूसी ख़ुफ़िया एजेंसी से ऐसा कोई सौदा नहीं किया था.

यह रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जब अफ़ग़ानिस्तान में 19 साल तक चले युद्ध के बाद अमरीका शांति समझौते की कोशिशें कर रहा है.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक अनाम अधिकारी के हवाले से कहा है कि अमरीका की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने महीनों पहले यह पता लगाया था कि रूस की जीआरयू सैन्य ख़ुफ़िया एजेंसी की एक यूनिट ने अपने विरोधियों को अस्थिर करने के मक़सद से गठबंधन सेनाओं पर छिपकर हमले करने के लिए पैसा दिया था.

अख़बार का कहना था कि इस्लामी चरमपंथियों या उससे जुड़े सशस्त्र आपराधिक तत्व उनसे जुड़े हुए थे और उन्होंने कुछ पैसा इकट्ठा किया था.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, उन्हें इस बारे में नहीं पता था.

टाइम्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बारे में मार्च में ही बता दिया गया था. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को ट्वीट किया कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं बताया गया था.

उन्होंने ट्वीट किया कि "अफ़ग़ानिस्तान में रूसियों के हमारे सुरक्षाबलों पर तथाकथित हमले के बारे में" न ही उन्हें और न ही उप-राष्ट्रपति माइक पेंस को बताया गया था.

वहीं, अमरीका में रूसी दूतावास ने सिलसिलेवार कई ट्वीट कहते हुए अमरीका पर अख़बार की फ़ेक न्यूज़ के प्रसार का आरोप लगाया.

2019 में अफ़ग़ानिस्तान में 20 अमरीकी सैनिकों की मौत हुई थी लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि इसमें अभी साफ़ नहीं है कि कौन-सी मौत संदेह के दायरे में है.

न्यूयॉर्क टाइम्स में जिन अधिकारियों का बयान है, उनका कहना है कि व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस पर विचार किया था कि इसका जवाब कैसे दिया जाए और इसमें रूस पर प्रतिबंध बढ़ाने जैसे उपाय शामिल थे.

रूस की जीआरयू एजेंसी पर मार्च 2018 में इंग्लैंड के सेलिसबरी में रूस के डबल एजेंट सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया पर नर्व एजेंट के ज़रिए मारने की कोशिश करने का आरोप लगा था.

तालिबान ने किया ख़ारिज

तालिबान के एक प्रवक्ता ने इन आरोपों को आधारहीन बताया है.

न्यूयॉर्क टाइम्स से ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, "हम इससे भी कई सालों पहले हत्या की कोशिशें करते थे या किसी को निशाना बनाते थे और वो हम अपने संसाधनों से करते थे."

उन्होंने कहा कि तालिबान ने अमरीका और नाटो सुरक्षाबलों पर फ़रवरी के बाद हमले रोक दिए थे क्योंकि तब प्रतिबंध हटाने और सेनाओं को हटाने पर सहमति बनी थी.

इसके बदले में तालिबान ने कहा था कि वो चरमपंथी समूहों को अपने इलाक़े से गतिविधियां अंजाम देने की अनुमति नहीं देगा.

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