You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
अमरीका: कोरोना संक्रमण के मामलों में फिर इतनी तेज़ी क्यों?
- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
अमरीका के कई राज्यों में एक बार फिर कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है.
गुरुवार को अमरीका में संक्रमण के क़रीब 40,000 नए मामले सामने आये – जो अपने आप के एक नया रिकॉर्ड है. और इसे देखते हुए व्हाइट हाउस की टास्क फ़ोर्स को मौजूदा स्थिति के बारे में बात करने के लिए एक प्रेस वार्ता करनी पड़ी.
इससे पहले, 24 अप्रैल को एक दिन में 36,400 नये मामले दर्ज होने का रिकॉर्ड था.
संक्रमण के मामलों में इस ताज़ा उछाल को अमरीका के सभी 50 राज्यों में लॉकडाउन समाप्त करते हुए, अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाएं दोबारा खोलने के निर्णय से जोड़कर देखा जा रहा है. लॉकडाउन के कारण अमरीका में अब तक लाखों लोगों की नौकरियाँ चली गई हैं.
काम-धंधे दोबारा शुरू होने पर बड़ी संख्या में लोग अपने काम पर लौट तो आये हैं, लेकिन संक्रमण के मामलों में आये इस ताज़ा उछाल के बाद उनके सामने एक बड़ा प्रश्न उठ खड़ा हुआ है.
अमरीकी अस्पतालों में बेड्स और अन्य क्रिटिकल सुविधाओं की क्या स्थिति है, इसका आकलन किया जा रहा है.
टेक्सस राज्य ने एक बार फिर कुछ प्रतिबंध लागू किये हैं. ख़ासतौर पर बार और रेस्त्रां, जो दोबारा खोल दिये गए थे, उनकी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाये गए हैं.
फ़्लोरिडा राज्य ने भी बार या रेस्त्रां में बैठकर शराब पीने पर प्रतिबंध लगाया है.
मगर इस तरह की ख़बरें अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए अच्छी नहीं हैं जो नवंबर में राष्ट्रपति-चुनाव कराने के बारे में सोच रहे हैं.
ये भी पढ़िएः
राष्ट्रपति ट्रंप पर कोविड-19 महामारी को गंभीरता से ना लेने और परिस्थितियों को सही ढंग से ना सँभाल पाने का आरोप लगता रहा है.
इसके अलावा, लोगों का यह भी मानना है कि अफ़्रीकी मूल के काले अमरीकी नागरिक जॉर्ज फ़्लॉय्ड की हत्या के मामलों को भी ट्रंप सही से नहीं सँभाल पाये जिसकी वजह से देशभर में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए.
अमरीका में हुए कुछ हालिया सर्वे बताते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने प्रतिद्वंद्वी और डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन से दौड़ में पीछे हैं.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार ‘महामारी से संबंधित जो भी बेस्ट किया जा सकता था, वो उन्होंने किया.’
वे मानते हैं कि ‘बिज़नेस और स्कूलों का दोबारा खुलना सही है क्योंकि अमरीका को बहुत लंबे समय के लिए बंद नहीं रखा जा सकता.’
मगर व्हाइट हाउस की कोविड-19 टास्क फ़ोर्स के अनुसार, अमरीका के 16 राज्यों में कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति चिंताजनक है.
'युवाओं में फैल रहा संक्रमण'
टास्क फ़ोर्स के प्रमुख और अमरीका के उप-राष्ट्रपति माइक पेंस के अनुसार, ‘अप्रैल महीने में कोरोना वायरस संक्रमण के नये मामले दर्ज होने का रोज़ का औसत 30,000 केस का था. मई में यह औसत गिरकर 25,000 केस रोज़ पर आया. जून के शुरुआती हफ़्ते में यह और गिरा और क़रीब 20,000 केस रोज़ पर था. लेकिन अब इसमें एक बड़ा उछाल देखने को मिला है.’
डेटा के अनुसार युवा लोग संक्रमण के नए मामलों के बढ़ते प्रतिशत का एक बड़ा हिस्सा हैं.
पेंस के अनुसार, “फ़्लोरिडा, टेक्सस समेत कुछ अन्य राज्यों से हमें सुनने को मिल रहा है कि संक्रमण के जो नए मामले दर्ज हो रहे हैं, उनमें आधे से ज़्यादा युवा लोग हैं जिनकी उम्र 35 से कम है. और जो विशेषज्ञ हमसे बात कर रहे हैं, उनके अनुसार यह एक अच्छी ख़बर है.”
बताया गया है कि अमरीका की युवा आबादी में कोरोना संक्रमण से जान का जोखिम काफ़ी कम है.
अमरीका की केंद्रीय हेल्थ केयर एजेंसी सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के पूर्व अधिकारी और वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉक्टर अली एच मोकदाद कहते हैं, “उप-राष्ट्रपति माइक पेंस की बात से हमें ये पता चलता है कि बूढ़े लोग जिन्हें कुछ बीमारियाँ भी हैं, वे मास्क पहन रहे हैं, अन्य सावधानियाँ बरत रहे हैं, जहाँ तक संभव है लोगों से सुरक्षित दूरी रख रहे हैं. और युवा आबादी बाहर ज़्यादा निकल रही है. पेंस का बयान सुरक्षित महसूस करने के लिए ख़ुद को झूठा दिलासा देने जैसा है.”
अमरीकी टास्क फ़ोर्स के सदस्य, डॉक्टर डेबोराह बिर्क्स के मुताबिक़ ‘ज़्यादा महत्वपूर्ण ये नहीं कि मरीज़ की उम्र कितनी है, महत्वपूर्ण ये है कि उसे कोई बीमारी है या नहीं.’
डॉक्टर मोकदाद मानते हैं कि “कई अमरीकी राज्यों ने सही वक़्त आने से पहले ही लॉकडाउन में ढील दे दी और अब वहाँ मामले तेज़ी से बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं.”
कई राज्यों पर यह आरोप लगा है कि उन्होंने टास्क फ़ोर्स द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की अवहेलना की है और जिस चरणबद्ध ढंग से चीज़ें खोलने का सुझाव दिया गया था, उन्हें नहीं माना.
'अक्तूबर तक 1 लाख 80 हज़ार मौतें संभव'
अमरीकी टास्क फ़ोर्स के अनुसार, टेक्सस और एरिज़ोना - दो ऐसे राज्य हैं जहाँ कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में सबसे तेज़ उछाल दर्ज किया गया है.
टेक्सस में 26 जून को 5,700 नये मामले दर्ज किये गए. जबकि एरिज़ोना में 3,400 से ज़्यादा मामले दर्ज हुए.
इनके बाद फ़्लोरिडा, मिसिसिपी, दक्षिण कैरोलाइना, जॉर्जिया, लूइसियाना और नवादा में स्थिति चिंताजनक है.
संक्रमण के नए मामले सामने आने से ऑस्टिन, फ़ीनिक्स, ह्यूस्टन, डेलास, सेंट एंटोनियो, टाम्पा, ओरलैंडो और मायामी जैसे बड़े शहरों की चिंताएं बढ़ गई हैं.
कोविड-19 की वजह से अमरीका में अब तक लगभग सवा लाख लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 25 लाख लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है.
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी का अनुमान है कि ‘1 अक्तूबर तक अमरीका में क़रीब 1 लाख 80 हज़ार लोगों की कोविड-19 से मौत हो सकती है.’
यूनिवर्सिटी द्वारा किये गए अध्ययन के अनुसार ‘अगर देश की 95 फ़ीसद जनता सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने की आदत डाल ले तो कोविड-19 से मरने वालों की संख्या घटकर 1 लाख 46 हज़ार रह सकती है.’
हालांकि ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ‘कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में यह उछाल इसलिए है क्योंकि उनके यहाँ टेस्टिंग सबसे ज़्यादा हो रही है.’
ओक्लाहोमा राज्य के तुलसा शहर में हुई अपनी हालिया चुनावी रैली में राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘अधिकारियों से टेस्टिंग की रफ़्तार कम करने को कहा है.’
राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान के बाद हंगामा होता दिखा तो व्हाइट हाउस ने जवाब दिया कि ‘राष्ट्रपति सिर्फ़ मज़ाक कर रहे थे.’
मास्क लगाने से परहेज़
डॉक्टर मोकदाद के अनुसार, ‘25 मई को जब अमरीका मेमोरियल-डे मना रहा था, उसके दो-तीन सप्ताह बाद तक भी संक्रमण के मामलों में कमी थी. उस वक़्त तक लोग सतर्क थे. महामारी को लेकर लोगों में गंभीरता थी. लोग मास्क भी लगा रहे थे और एक-दूसरे से दूरी भी रख रहे थे. और फिर देखते ही देखते चीज़ें बदल गईं.’
कुछ जानकारों की राय है कि ‘संक्रमण के मामले व्यापार और काम-धंधों पर से प्रतिबंध हटने से कुछ सप्ताह पहले ही बढ़ने लगे होंगे क्योंकि बिज़नेस खोलने के लिए लोगों ने मिलना-जुलना और ट्रेवल करना शुरू कर दिया था.’
हालांकि लोगों को लगातार यह सुझाव दिया जा रहा था कि वो मास्क पहनें और सोशल डिस्टेन्सिंग की ध्यान रखें.
लेकिन बहुत सी तस्वीरें सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के ज़रिये सामने आयी हैं जिनमें लोगों को मज़मा लगाते और सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों को दरकिनार करते देखा गया.
जॉर्ज फ़्लॉय्ड की मौत के बाद अमरीका में जो विशाल प्रदर्शन हुए, उन्हें देखते हुए भी यह कहा गया था कि इससे संक्रमण के मामलों में उछाल आ सकता है क्योंकि प्रदर्शनों में शामिल बहुत से लोगों बिना मास्क के थे.
न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रयू क्योमो ने प्रदर्शनकारियों से अपील भी की थी वे कोविड-19 का टेस्ट करवायें.
मैं भी जब अपनी ज़रूरत का सामान लेने के लिए पास के बाज़ार में जाता हूँ तो देखता हूँ कि लोगों ने मास्क नहीं लगाया है.
टेक्सस में रहने वाले सृजन कुमार ने मुझे बताया, “मेरी जानकारी में सिर्फ़ 50 प्रतिशत लोग ही मास्क पहन रहे हैं. परिस्थितियाँ बिगड़ रही हैं, और इसमें सिर्फ़ सरकार की बात नहीं है, बल्कि लोगों की भी कुछ ज़िम्मेदारी है.”
आगे क्या हो सकता है?
संक्रामक बीमारियों के विशेषज्ञ और टास्क फ़ोर्स के सदस्य डॉक्टर एंथनी फ़ाउची कह चुके हैं कि ‘अमरीका के कुछ इलाक़ों में मुसीबत गंभीर है.’
उन्होंने भी लोगों से अपील की है कि वे सोशल डिस्टेन्सिंग का ध्यान रखें.
उन्होंने कहा, “अगर आप संक्रमित होते हैं तो यह स्पष्ट है कि आप किसी और को संक्रमण देंगे. और इसी तरह यह संक्रमण उन तक पहुँचेंगा जिन्हें इससे ख़तरा हो सकता है.”
डॉक्टर फ़ाउची कह चुके हैं कि ‘अगर वायरस समाप्त नहीं हुआ, तो आज नहीं तो कल, जो राज्य महामारी के ख़िलाफ़ अच्छा नियंत्रण और प्रबंधन कर रहे हैं, उन्हें भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.’
उन्होंने कहा है, “जो लोग संक्रमित हो रहे हैं, उनमें एक बड़ी आबादी उन लोगों की है जिन्हें पता ही नहीं है कि वो संक्रमित हैं. उन्हें कोई लक्षण नहीं है. यानी कॉन्टेक्ट ट्रेंसिंग के ज़रिये अब इसे पकड़ना और समझना मुश्किल होता जा रहा है.”
डॉक्टर फ़ाउची के अनुसार कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग जो बहुत हद तक फ़ोन के ज़रिये की जा रही है, उसके फ़ुलप्रूफ़ होने पर भी कई सवाल उठते हैं क्योंकि बहुत से लोग या तो संक्रमण के बारे में बात नहीं करना चाहते या वो बीमारी के बारे में बताना नहीं चाहते.
विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ हफ़्ते अमरीका के लिए बहुत नाज़ुक होने वाले हैं.
व्हाइट हाउस में व्यापार मामलों के सलाहकार पीटर नवारो के मुताबिक़ अमरीका महामारी की संभावित दूसरी वेव से निपटने की तैयारी कर रहा है, जबकि व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार लैरी कुडलो कहते हैं 'अमरीका में दूसरी वेव नहीं आने वाली.'
और डॉक्टर मोकदाद के मुताबिक़, ‘अमरीका फ़िलहाल पहली वेव से ही लड़ रहा है.’
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)