फ़र्ज़ी ख़बर के तूफ़ान में फंसने वाली पत्रकार की कहानी

    • Author, मिशेल मैडसन
    • पदनाम, खोजी पत्रकार

बीती जनवरी मैं एक दिन उत्तरी लंदन की एक डांस क्लास से बाहर निकली और मुझे अपने फ़ोन पर अफ़्रीकी नंबरों से आईं कई मिस्ड कॉल्स मिलीं.

मुझे बिलकुल भी नहीं पता था कि ये सब क्यों हो रहा था. मैंने अपना इनबॉक्स चेक किया. फ़ेसबुक और ट्विटर चेक किया. वहां भी कई लोगों ने मुझे मैसेज किए हुए थे जिसमें मुझसे ये पूछा गया था कि क्या मैं मिशेल डेमसेन हूँ जिन्होंने एक रहस्यमयी ख़बर लिखी है जो कि सेनेगल में तूफ़ान खड़ा किए हुए है.

"एक करप्शन स्कैंडल मेरे देश को हिला रहा है और आपका नाम उसमें शामिल है."

"हम काफ़ी चिंतित थे क्योंकि हमने एक आर्टिकल देखा जो कि ऐसा लगता है कि आपने लिखा है."

"मैं सेनेगल जर्नलिस्ट हूँ और मैं आपसे बात करना चाहती हूँ."

ये सभी लोग ये जानना चाहते थे कि क्या मैंने इस शीर्षक "द चैलेंज ऑफ़ एक्सप्लॉइटिंग नेचुरल रिसोर्सेज़ इन अफ़्रीका" से एक आर्टिकल लिखा है जो कि मॉडर्न घाना नाम की एक अपरिचित सी वेबसाइट पर 9 जनवरी 2019 को छपा है.

इस लेख में सेनेगल के विपक्ष के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार उसमाने सोन्को पर यूरोपीय तेल कंपनी से रिश्वत लेने की बात थी. इस लेख को मिशेल डेमसेन ने लिखा था. मेरे नाम से बस अक्षर अलग क्योंकि मेरा नाम मिशेल मैडसेन है.

ये आर्टिकल सेनेगल के राष्ट्रपति चुनाव से कुछ हफ़्ते पहले ही सामने आया था और मिस्टर सोन्को वहां के राष्ट्रपति मेकी साल के मुख्य प्रतिद्वंदी थे.

पश्चिमी अफ़्रीका में एक फ़्रीलांस इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट होने के नाते भ्रष्टाचार उजागर करने वाले शख़्स के रूप में मैंने सेनेगल और तेल कंपनियों पर कई कहानियां लिखी हैं.

सोन्को ने अपनी किताब में राष्ट्रपति के भाई अलिउ साल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे जिनका उन्होंने खंडन कर दिया था. मैंने इस किताब के प्रकाशन के बाद सोन्को पर भी लिखा है.

लेकिन मैं ये जानती हूँ कि मैंने मॉडर्न घाना के लिए कोई रिपोर्ट नहीं लिखी और मेरे संपर्क में आने वाले सभी पत्रकारों को ये बताया. लेकिन मैं सेनेगल में प्रकाशित कई ख़बरों में दी गई जानकारी से हिल गई और कितनी जल्दी उस स्टोरी को मुझसे जोड़ दिया गया.

प्रेस अफ्रिक में छपी एक कहानी में मेरा नाम भी दिया गया कि ये कहानी मैंने ख़ुद लिखी है.

एक अन्य न्यूज़ साइट सेनेवेब ने सेनेगल में व्यापारिक गतिविधियों वाले एक ब्रितानी बिज़नेसमैन फ्रैंक टिमिस का नाम दिया है. टिमिस के राष्ट्रपति साल के भाई से क़रीबी रिश्ते हैं.

मुझे और मेरे साथी पत्रकारों को हाल ही में साल के भाई से जुड़े मामलों की जाँच करने के लिए आर्थिक मदद मिली है. ये फंडिंग नीदरलैंड के एक जर्नलिज़्म प्रोजेक्ट से आई थी जिसके लिए ऑक्सफेम ने भी मदद की थी.

इसी वजह से जब न्यूज़ साइटों पर छपे आधिकारिक दस्तावेज़ों में ऑक्सफेम का नाम दिखा तो मुझे धक्का लगा. क्योंकि इन दस्तावेज़ों के मध्य में तेल कंपनी टुलोव ऑयल का लोगो लगा हुआ था और उसमाने सोन्को नाम लिखा हुआ था.

इन दोनों ही पक्षों ने आरोपों का खंडन कर दिया है. और तथ्यों की जाँच करने वालों ने जल्द ही इन दस्तावेज़ों को फ़र्ज़ी क़रार दिया.

ऑक्सफेम ने मुझे बताया कि उन्होंने तेल कंपनियों से किसी तरह की फंडिंग नहीं ली है लेकिन उन्होंने सोन्को को ट्रेनिंग के लिए पैसे दिए हैं. इस हल्के से सच ने ही कुछ लोगों के लिए रिपोर्ट को ज़्यादा पुख्ता बनाया.

इसके बाद मैंने अफ़्रीका चैक और एएफ़पी न्यूज़ की फ़ैक्टचेकिंग टीम को बताया कि मैंने मॉडर्न घाना के लिए कोई लेख नहीं लिखा है. इसके साथ ही सेनेगल के अख़बारों ने ख़बरें छापीं कि ये सभी दावे फ़र्ज़ी थे.

ये पूरा तूफ़ान बस 48 घंटे तक चलता रहा. इस दौरान मेरा नाम डाकर में भी छप गया. एक न्यूज़ साइट ने तो ये भी कर दिया कि मेरे फेसबुक पेज़ से मेरी एक तस्वीर लेकर उसे अपने लेख में इस्तेमाल कर लिया.

अब मैं ये जानना चाहती थी कि आख़िर मिशेल डेमसेन कौन हैं और एक फ़ेक न्यूज़ सेनेगल में कैसे फैल गई.

मैंने इसके लिए मॉडर्न घाना के प्रमुख ब्राइट ओवुसु से संपर्क किया. उन्होंने कहा कि ये लेख वेबसाइट के ओपिनियन पेज़ पर प्रकाशित हुआ है जो कि घाना और शेष अफ़्रीका से जुड़े विचारों को जगह देता है.

ओवुसु ने कहा कि मॉडर्न घाना में प्रकाशित हुए लेख को लिखने वाला शख़्स ये लेख छपवाने के लिए बेहद उतावला था और इसके बदले में पैसे देने की पेशकश भी कर रहा था.

ओवुसु कहते हैं कि मॉडर्न घाना कभी भी नज़रिया लेखों के लिए पैसे नहीं लेता है. लेकिन अपनी वेबसाइट पर एक प्रेस रिलीज़ प्रकाशित करने के लिए 100 डॉलर लेता है. ओवुसु ने बताया कि लेख लिखवाने के लिए अनुरोध करने वाले शख़्स की आवाज़ अफ़्रीकियों जैसी थी.

ओवुसु को भेजे गये ईमेल और फ़ोन नंबर से मैंने ये जानकारी हासिल की कि वो फोन नंबर अंमरीका में किसी बाबा एइडारा नाम के व्यक्ति के नाम पंजीकृत है.

मैं ये जानकर हिल गई क्योंकि बाबा एइडारा एक सेनेगल के पत्रकार हैं जो कि अमरीका में रहते हैं और सेनेगल सरकार के मुखर विरोधी हैं. वह मेरे अच्छे मिलने वाले भी हैं.

मैंने एइडारा से बात की तो उन्होंने कहा कि ये स्टोरी उनकी ओर से नहीं आई है. उन्होंने बताया कि उन्हें लगा था कि उन्हें साथ हैकिंग की गई है और वे इसके लिए सेनेगल सरकार को ज़िम्मेदार मान रहे थे.

जब मैंने सेनेगल के पत्रकारों से बात की तो उन्होंने बताया कि चुनाव की वजह से सेनेगल में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से एक फेक न्यूज़ वॉर चल रहा है.

लेकिन कई लोगों ने कहा कि उन्हें लगता है कि ये स्टोरी प्रेसीडेंट साल की कैंपेन टीम की ओर से आई थी. इस टीम में डिज़िटल कम्युनिकेशन विशेषज्ञ हैं जिन्होंने इससे पहले भी राष्ट्रपति पद के चुनाव अभियानों में काम किया है.

मैंने साल की कैंपेन टीम से बात करने की कोशिश की. मैंने पार्टी के प्रवक्ताओं से बात करने की कोशिश की लेकिन किसी ने मेरे सवालों के जवाब नहीं दिए और कोई इंटरव्यू नहीं दिया.

हालांकि, मुझे सोन्को ने इंटरव्यू दिया और बताया कि उन्हें टुलोव ऑयल की ओर से किसी तरह का पैसा नहीं लिया और सरकार ने पूरी तरह उनकी छवि ख़राब करने की कोशिश की है.

जब मैंने फॉरेंसिक इंवेस्टिगेटर ऑरेंज से बात की जिन्होंने मुझे ओवुसु को आने वाले फोन की लोकेशन बताई थी तो ऑरेंज ने कहा कि एइडारा का फोन हैक किया जा सकता है और उन्हें फंसाया भी जा सकता है.

एइडारा कहते हैं कि इस फर्जी ख़बर छपे से सिर्फ दो पक्षों को फायदा होगा जिनमें से एक सेनेगल सरकार और दूसरी तेल कंपनियां हैं. और वह इन दोनों पक्षों के ख़िलाफ़ ही लिखते आ रहे हैं.

एक साल बीत चुका है लेकिन मुझे अब तक पता हीं है कि मिशेल डेमसेन आख़िर कौन हैं. शायद मुझे कभी पता नहीं चलेगा. जिसने भी अपने निशान छिपाने के लिए इतने प्रयास किए हैं, जिसने भी फ़र्ज़ी दस्तावेज़ जारी किए थे. वो कहीं पर छिपा बैठा है और इसकी जाँच मेरे सिवा कोई नहीं कर रहा है.

ऐसा लगता है कि इस तरह का तूफ़ान खड़ा करने के लिए काफ़ी मेहनत लगती है.

अब वो सारी कहानियां हटा ली गई हैं. लेकिन एक दाग़ बना हुआ है. और फ़ेक न्यूज़ के बारे में यही सबसे प्रभावशाली और ख़तरनाक बात है. और ये बात चुनावी मौसम में और ज़्यादा ख़तरनाक हो जाती है.

और ये बात दिमाग़ में रखने लायक़ है कि जब अगली बार इस तरह की फ़ेक न्यूज़ फैलेगी तो उस ख़बर और उसका असर ज़्यादा प्रभावी हो सकता है.

ये लेख 'द डॉक्यूमेन्टरी: माय फ़ेक न्यूज़ हूजनइट'का हिस्सा है जिसका प्रसारण बीबीसी वर्ल्ड सर्विस पर 14 जून को किया गया था. ये डॉक्यूमेन्टरी पॉ़कास्ट पर भी उपलब्ध है.

अतिरिक्त रिपोर्टिंग - फ्लोरा कारमाइकल

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