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कोरोना वायरस: बांग्लादेश से डराने वाली ख़बर, भारी तबाही की आशंका
बांग्लादेश में दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी कैंप भी अब कोरोना वायरस संक्रमण से अछूता नहीं रहा. इस शरणार्थी कैंप में कोरोना संक्रमण का आना डराने वाला है क्योंकि यहाँ फैलने के बाद रोकना मुश्किल होगा.
दस लाख की आबादी वाले रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में कोरोना वायरस संक्रमण के दो मामले सामने आए हैं. अधिकारियों के मुताबिक़, शरणार्थी कैंप में कोरोना वायरस पॉजिटिव के दो मामले सामने आए हैं.
सरकारी रोहिंग्या रेफ़्युजी रिपेटरिएशन कमिशन के लिए काम करने वाले एक डॉक्टर का कहना है कि कॉक्स बाज़ार में मौजूद शरणार्थियों में पहले कोविड-19 मामले की पुष्टि हुई है.
अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि जो संक्रमित हुए हैं उन्हें आइसोलेशन में रखकर इलाज किया जा रहा है. इन संक्रमित लोगों के संपर्क में म्यांमार से भागने के बाद कॉक्स बाज़ार के कैंप में तक़रीबन 10 लाख रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं.
रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में बीते 14 मार्च से ही लॉकडाउन जारी है.
वहीं मिस्र में भी शरणार्थियों की एक बड़ी आबादी है. अधिकारी क़रीब 16 सौ ऐसे लोगों को दूसरे देशों में स्थानांतरित किए जाने की उम्मीद कर रहे हैं जिनके लिए ख़तरा अधिक है.
मिस्र के लेस्बोस द्वीप पहुंचे दो प्रवासियों का टेस्ट पॉजिटिव आया है. इन दोनों को आइसोलेशन में रखा गया है.
रोहिंग्या कैंप का ख़तरा कितना बड़ा?
सहायता एजेंसियां लंबे समय से शरणार्थी कैंपों को लेकर चेतावनी जारी करती रही हैं.
रोहिंग्या शरणार्थी कैंप को लेकर जारी की गई इन चेतावनियों में साफ़ तौर पर ख़तरे की बात की गई थी.
कॉक्स बाज़ार की परिस्थितियां कोरोना वायरस के फैलने के लिहाज़ से बेहद उपयुक्त हैं. यह बेहद तंग, भीड़भाड़, साफ़-सफ़ाई और साफ़ पानी की सीमित मात्रा से जूझता इलाक़ा है. जहां कोरोना वायरस से बचने के उपायों का पालन कर पाना एक चुनौती है.
बांग्लादेश में सेव द चिल्ड्रेन्स हेल्थ की डायरेक्टर डॉ. शमीम जहां के मुताबिक़, "अब जबकि कोरोना वायरस दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी कैंप कॉक्स बाज़ार में प्रवेश कर चुका है तो हम वास्तविक आशंका यही देख रहे हैं कि इससे हज़ारों लोगों की जान जा सकती है."
"यह महामारी बांग्लादेश को दशकों पीछे ले जा सकती है."
बांग्लादेश में इंटरनेशल रेस्क्यू कमिटी के डायरेक्टर मनीष अग्रवाल इस बात को ख़ासतौर पर उजागर करते हैं कि कॉक्स बाज़ार में प्रति वर्ग किलोमीटर के दायरे में 40 हज़ार से 70 हज़ार लोग रहते हैं.
जापान के शिप (जहां संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़े) का उदाहरण देते हुए उन्होंने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "अगर आप देखें तो यह इलाक़ा डायमंड प्रिंसेज़ क्रूज़ शिप पर मौजूद लोगों की तुलना में 1.6 गुना अधिक घनी आबादी वाला है, जहां संक्रमण वुहान की तुलना में चार गुना ज़्यादा तेज़ी से फैलेगा. वो भी उस दौर की तुलना में जब वुहान में संक्रमण अपने चरम पर था."
कौन हैं रोहिंग्या?
सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से लाखों रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार छोड़ना पड़ा है.
30 सितंबर तक नौ लाख 15 हज़ार रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश के शिविरों में रह रहे थे. इनमें से 80 प्रतिशत लोग अगस्त और दिसंबर 2017 से इस साल मार्च के बीच बांग्लादेश पहुंचे थे.
बांग्लादेश का कहना है कि अब वह और लोगों को अपने यहां शरण नहीं दे सकता. अगस्त में बांग्लादेश ने एक स्वैच्छिक वापसी योजना चलाई थी मगर एक भी रोहिंग्या ने वापस जाने का विकल्प नहीं चुना.
बांग्लादेश की योजना बंगाल की खाड़ी के एक छोटे से द्वीप भसन चार में 100,000 शरणार्थियों को स्थानांतरित करने की है. हालांकि, क़रीब 39 सहायता एजेंसियों और मानवाधिकार समूहों ने इस विचार का विरोध किया है.
सितंबर में बीबीसी के जोनाथन हेड ने ख़बर दी थी कि म्यांमार में रोहिंग्या के गांवों में पुलिस बैरक, सरकारी भवन और शरणार्थी पुनर्वास शिविर बनाए गए हैं.
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