चीन एक बार फिर से दुनिया को करने जा रहा हैरान, किसी को भरोसा नहीं

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    • Author, पाब्लो उकोआ एवं विंसेंट नी
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को नियंत्रित करने को लेकर चीन की जो कोशिशें रही हैं वो "शायद दुनिया के इतिहास में सबसे ज़्यादा महत्वाकांक्षी और आक्रामक" रही हैं.

लेकिन अब चीन वुहान की पूरी आबादी का दस दिनों में कोरोना टेस्ट करवाने जा रहा है जिससे दुनिया अवाक है. वुहान जनवरी में कोरोना के संक्रमण का केंद्र बन गया था. सबसे पहला मामला भी यही दिसंबर के महीने में आया था.

वुहान की आबादी 1.1 करोड़ है. स्थानीय प्रशासन ने यहाँ की पूरी आबादी का कोरोना टेस्ट कराने के लिए योजना बनाने पर काम शुरू कर दिया है. इसके तहत सबसे पहले उन लोगों का टेस्ट किया जाएगा जिन्हें जोखिम ज़्यादा है. जैसे स्वास्थ्य सेवाओं में लगे हुए लोग.

अधिकारियों का कहना है कि टेस्टिंग की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीक़े से बड़े पैमाने पर सैंपल इकट्ठा करके की जाएँगी.

चीन की इस महत्वकांक्षी योजना का मतलब है कि हर रोज़ वुहान में दस लाख लोगों की टेस्टिंग की जाएगी. अभी हर रोज़ चालीस से साठ हज़ार तक की टेस्टिंग क्षमता है जिसे बड़े पैंमाने पर बढ़ाने की ज़रूरत पड़ेगी.

अमरीका के न्यूयॉर्क स्थित काउंसिल ऑफ़ फ़ॉरेन अफ़ेयर्स में ग्लोबल हेल्थ के सीनियर फेलो यानजोंग हुआंग कहते हैं, "हम किसी चमत्कार की ही उम्मीद कर सकते हैं."

इतने लोगों की टेस्टिंग का लक्ष्य क्यों रखा गया है?

पिछले हफ़्ते के आख़िरी में वुहान में एक ही कॉम्पलेक्स से छह नए मामलों के सामने आने के बाद यह बड़ा क़दम उठाया गया है. इन नए मामलों मे कोरोना का कोई भी लक्षण नहीं दिखाई पड़ रहा था लेकिन इनका टेस्ट कोरोना पॉजिटिव आया है. ऐसे मामलों को एसिम्प्टोमैटिक कहते हैं यानी जिनमें संक्रमित होने का कोई लक्षण ना हो.

इसके बाद कॉम्पलेक्स में रह रहे 5,000 लोगों के टेस्ट कराने के आदेश दिए गए.

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कुछ लोगों का कहना है कि 1.1 करोड़ लोगों में से ठीक-ठीक संख्या में लोग या तो क्वारंटीन से पहले शहर से जा चुके हैं या फिर हाल के हफ़्तों में उनकी जांच हुई है. इसिलए टेस्टिंग शुरू होने के बाद अधिकारियों के लिए यह बहुत मुश्किल काम नहीं होगा.

40 से 50 लाख वुहान के लोगों की जांच पहले ही हो चुकी है. वुहान यूनिवर्सिटी में रोग जनक जीव विज्ञान के डिप्टी डायरेक्टर यांग झान्की ने ग्लोबल टाइम्स अख़बार से कहा, "वुहान बाक़ी साठ से 80 लाख लोगों की टेस्टिंग दस दिनों में करने में सक्षम है.

अगर वास्तव में साठ से 80 लाखा लोगों की ही टेस्टिंग करनी है तब भी दस दिनों में पूरी टेस्टिंग करने के लिए हर रोज़ छह से आठ लाख लोगों की टेस्टिंग करनी होगी और यह एक चुनौती होगी.

22 अप्रैल को हुबेई की प्रांतीय सरकार ने यह बताया था कि हर रोज़ 89,000 लोगों की टेस्टिंग की जा रही है. इसमें हुबेई की राजधानी वुहान में होने वाली टेस्टिंग भी शामिल थी. यहाँ एक दिन में 63,000 लोगों की टेस्टिंग की जा रही थीं. अधिकारियों के मुताबिक़ 10 मई को वुहान में सिर्फ़ 40,000 टेस्ट हुए थे.

इतनी जल्दी लाखों लोगों की टेस्टिंग हो सकती है?

कुछ आशावादी लोगों का कहना है कि अगर चीन की सरकार ठान ले तो यह संभव है. 13 मई को चीनी मीडिया ने वुहान के अधिकारियों के हवाले से कहा है कि बड़े पैमाने पर टेस्टिंग का काम मुख्य तौर पर थर्ड पार्टी कंपनी की मदद से किया जाता है. स्थानीय अस्पताल अपने लोगों को भेज कर सैंपल इकट्ठा करने का काम करते हैं.

अधिकारियों के मुताबिक थर्ड पार्टी की टेस्टिंग क्षमता एक लाख प्रति दिन होती है और इसलिए यह संभव है कि इतने कम समय में इतने बड़े पैमाने पर टेस्टिंग के लक्ष्य को हासिल किया जा सके.

"इसलिए टेस्टिंग चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. मतलब कि कुछ ज़िलों में 12 मई से शुरू होंगी तो कुछ में 17 मई से और सभी ज़िलों में दस दिनों के अंदर में टेस्टिंग की प्रक्रिया ख़त्म कर ली जाएगी."

चीन के उद्योग मंत्री ने पिछले महीने कहा था कि चीन हर रोज़ पचास लाख टेस्ट किट्स तैयार कर सकता है और अधिक टेस्टिंग सेंटर्स और लैब्स तैयार किए जा रहे हैं ताकि सैंपल इकट्ठा कर उनकी टेस्टिंग की जा सके.

प्रोफेसर यांग कहते हैं कि अगर किसी के पड़ोस में कोई मामला नहीं है तो फिर एक-एक व्यक्ति की जांच करनी ज़रूरी नहीं है.

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उन्होंने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में कहा, "एक बार निगेटिव आने के बाद भी कोई संक्रमित हो सकता है, इस तरह से आप कभी नहीं जान पाएंगे. इसलिए ज़रूरी है कि मौजूदा हालात की स्थिति जानने के लिए महामारी के विज्ञान का सहारा लेना जरूरी है."

दूसरे दौर के संक्रमण का ख़तरा

जहाँ एक ओर कई देशों ने अपने यहाँ लॉकडाउन में छूट देनी शुरू कर दी है तो वहीं इसके साथ दूसरे दौर के संक्रमण का ख़तरा अधिकारियों के लिए सिरदर्द बना हुआ है.

वुहान में आठ अप्रैल को 11 हफ्ते के सख़्त लॉकडाउन के बाद छूट मिली थी. लेकिन अब इन नए मामलों के सामने आने के बाद दूसरे दौर के संक्रमण का ख़तरा बढ़ गया है.

चीन के दूसरे शहरों में भी ऐहतियाती क़दम उठाए जा रहे हैं. ट्रेन और बस सेवाएं रद्द कर दी गई हैं. सिनेमा, जिम और इंटरनेट कैफ़े सब बंद कर दिए गए हैं.

चीनी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के चीफ़ एपिडॉमॉलिजिस्ट वू जुनयो का कहना है कि निगेटिव टेस्ट आने के बाद फिर से नए मामलों के आने के बाद सरकार हाई अलर्ट पर है. उन्होंने सरकारी मीडिया सीसीटीवी से कहा, "वाक़ई में वुहान में एक से ज़्यादा ऐसे मामले मिले हैं जिनमें संक्रमण की अवधि 30 से 50 दिनों तक है. वायरस कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में ज़्यादा दिनों तक अपना प्रभाव कायम रख सकता है."

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उन्होंने आगे यह भी कहा कि वुहान में हर किसी की टेस्टिंग की ज़रूरत नहीं है. जिनके पड़ोस में कोई मामला नहीं है उनकी टेस्ट करवाने की ज़रूरत नहीं है.

ख़र्चीला काम

प्रोफ़ेसर हुआंग का कहना है कि वुहान की पूरी आबादी का टेस्ट करवाना एक 'बहुत ख़र्चीला' काम है.

उन्होंने कहा, "लेकिन दिमाग़ में यह बात रख लीजिए यह चीन है. जिस तरह से यहाँ लॉकडाउन लागू किया गया वो भी कम ख़र्चीला नहीं था. लेकिन मक़सद है कि किसी भी क़ीमत पर अधिकतम सुरक्षा प्रदान करना है."

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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