कोरोना वायरसः 1918 के स्पैनिश फ़्लू को कैसे रोका गया था?
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इमेज कैप्शन, स्पेनिश फ्लू महामारी के दौरान मास्क पहने एक महिला
कोरोना वायरस और स्पैनिश फ़्लू के बीच बहुत ज़्यादा समानताएं ढूंढना ख़तरनाक होगा. 1918 में फैले स्पैनिश फ़्लू से दुनिया भर में कम से कम पाँच करोड़ लोग मारे गए थे.
कोविड-19 पूरी तरह से एक नई बीमारी है. यह एक ऐसी बीमारी है जिसका उम्रदराज़ लोगों पर कहीं ज़्यादा असर होता है.
1918 में पूरी दुनिया को अपनी जकड़ में लेने वाले इंफ़्लूएंजा ने ऐसे लोगों को अपना ज्यादा शिकार बनाया था जो कि 20-30 साल की उम्र के और मज़बूत इम्यून सिस्टम वाले थे.
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इमेज कैप्शन, मार्च 1919 की इस तस्वीर में अमरीका के बोस्टन में काम कर रहीं रेड क्रास की नर्सें दिख रही हैं.
लेकिन, सरकारों और लोगों के इस इंफ़ेक्शन को रोकने के लिए उठाए गए क़दम कुछ वैसे ही हैं जैसे 1918 की फ़्लू के दौरान दिखाई दिए थे.
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने स्पैनिश फ़्लू के फैलने का अध्ययन किया ताकि कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई में एक आपातकालीन योजना तैयार की जा सके. इसका सबसे अहम सबक यह था कि 1918 के पतझड़ के वक्त पर इस बीमारी की दूसरी लहर पहली के मुक़ाबले ज़्यादा घातक साबित हुई थी.
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इमेज कैप्शन, 1918 के दौरान युद्ध विभाग के साथ काम कर रही ये महिलाएं हर सुबह औरा रात को पंद्रह-पंद्रह मिनट टहलती थीं ताकि वायरस के प्रभाव से बचा जा सके.
मई 1918 में जब फ़्लू से पहली मौत दर्ज हुई उस वक्त इंग्लैंड युद्ध के दौर में था. दूसरी कई सरकारों की तरह से यूके सरकार भी इससे निबटने के लिए तैयार नहीं थी.
माना जाता है कि सरकार ने फ़ैसला किया कि फ़्लू से लोगों को बचाने की बजाय युद्ध पर फोकस करना ज्यादा ज़रूरी है.
भीड़भाड़ वाले सैनिकों के ट्रांसपोर्ट और जंगी सामान बनाने वाली फैक्ट्रियों और बसों और ट्रेनों के जरिए यह बीमारी जंगल की आग की तरह फैल गई. सर आर्थर न्यूजहोम ने रॉयल सोसाइटी ऑफ़ मेडिसिन के लिए 1919 में भेजी अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था.
जुलाई 1918 में उन्होंने एक 'मेमोरेंडम फ़ॉर पब्लिक यूज़' लिखा था. इसमें लोगों को सलाह दी गई थी कि अगर वे बीमार हैं तो घर पर ही रहें और ज़्यादा भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें. इस मेमोरेंडम को सरकार ने रद्दी में फेंक दिया था.
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इमेज कैप्शन, मास्क लगाकर काम करती टाइपिस्ट. साल 1918.
सर आर्थर का तर्क था कि अगर इन नियमों को माना जाता तो कई जानें बचाई जा सकती थीं. लेकिन, उन्होंने कहा, 'राष्ट्रीय परिस्थितियां ऐसी थीं जिनमें भले ही स्वास्थ्य और जीवन का जोखिम बना हुआ था, लेकिन बड़ा कर्तव्य युद्ध को जारी रखना था.'
1918 में इंफ़्लूएंजा का कोई इलाज नहीं था. साथ ही निमोनिया जैसी जटिलताओं का भी इलाज करने के लिए कोई एंटीबायोटिक्स नहीं थी. ऐसे में हॉस्पिटलों में मरीजों की भीड़ लग गई.
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इमेज कैप्शन, संक्रमण से बचने के लिए कपड़े का मास्क पहने महिलाएं
1918 में इंफ़्लूएंजा का कोई इलाज नहीं था. साथ ही निमोनिया जैसी जटिलताओं का भी इलाज करने के लिए कोई एंटीबायोटिक्स नहीं थी. ऐसे में हॉस्पिटलों में मरीजों की भीड़ लग गई.
उस वक्त संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू नहीं किया गया. हालांकि, कुछ मामलों में कई थिएटर, डांस हॉल्स, सिनेमा और चर्च कई महीनों के लिए बंद कर दिए गए थे.
शराबखानों (पब) पर युद्ध के चलते भले ही इनके खुलने के घंटों को लेकर पाबंदियां लगी थीं, लेकिन ये ज्यादातर खुले थे.
फुटबॉल लीग और एफए कप को युद्ध के चलते रद्द कर दिया गया, लेकिन अन्य मैचों को रद्द करने या भीड़ को कम करने की कोई कोशिश नहीं हुई. पुरुषों की टीमों के क्षेत्रीय टूर्नामेंट्स, महिलाओं के फुटबॉल मैचों में बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा हुए. यह सब महामारी के दौरान चलता रहा.
कुछ शहरों और कस्बों में सड़कों पर डिसइनफ़ेक्टेंट छिड़के गए और कुछ लोगों ने एंटी-जर्म मास्क भी पहनना शुरू कर दिया.
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इमेज कैप्शन, चेहरा ढंक कर काम करती एक टेलीफ़ोन ऑपरेटर
लोगों को स्वास्थ्य संबंधी निर्देश साफ़ नहीं थे. आज की ही तरह तब भी कई तरह की फ़र्जी खबरें और षड्यंत्र वाली कहानियां घूम रही थीं. हालांकि, स्वस्थ लाइफस्टाइल को लेकर आम उपेक्षा का भी आलम था.
कुछ फैक्टरियों में, नो-स्मोकिंग नियमों में ढील दे दी गई. तब ऐसा माना जाता था कि सिगरेट्स से संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी.
महामारी पर हुई एक कॉमन्स (ब्रिटेन की संसद का निचला सदन) की डिबेट में कंज़र्वेटिव एमपी क्लाउड लूथर ने पूछा, 'क्या यह सत्य है कि इंफ्लूएंजा से बचने के लिए दिन में तीन बार कोको लिया जाना चाहिए?'
पब्लिसिटी कैंपेनों और लीफ़लेट्स में कफ़ और छींक से बीमारी के फैलने की चेतावनी दी गई थी.
नवंबर 1918 में न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड में अपने पाठकों को सलाह दी गई, 'हर रात और सुबह अपनी नाक को साबुन और पानी से धोएं. रात और सुबह जबरदस्ती छींकें और फिर गहरी सांस लें. मफ़लर न पहनें, नियमित रूप से वॉक करें और दफ्तर से घर पैदल जाएं और खूब खिचड़ी खाएं.'
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इमेज कैप्शन, लोगों में फैली भ्रांतियों पर डेली मिरर में प्रकाशित एक कार्टून
1918 की महामारी से कोई देश अछूता नहीं था. हालांकि, इसके असर और अपने लोगों को बचाने की सरकारों की कोशिशों में बड़ा अंतर था.
यूनाइटेड स्टेटस में कुछ राज्यों ने अपने नागरिकों पर क्वारंटीन लागू कर दिया. इसके मिलेजुले नतीजे रहे. कुछ राज्यों ने फ़ेस मास्क पहनना अनिवार्य बनाने की कोशिश की. सिनेमा, थिएटर्स और अन्य मनोरंजन की जगहें पूरे देश में बंद कर दी गईं.
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इमेज कैप्शन, नाई भी संक्रमण को रोकने के लिए सावधानियां बरत रहे थे
दूसरे कई शहरों के मुकाबले न्यू यॉर्क इस महामारी से निबटने के लिए ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार था. टीबी के खिलाफ़ 20 साल से लड़ी जा रही लड़ाई के चलते न्यू यॉर्क इस महामारी से अच्छे से निबट पाया और यहां मृत्यु दर कम थी.
इसके बावजूद शहर के स्वास्थ्य कमिश्नर पर कारोबारियों का अपने काम-धंधे खुले रखने का प्रेशर था. खासतौर पर मूवी थिएटर और मनोरंजन के ठिकाने खुले रखने की मांग थी.
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इमेज कैप्शन, 1918 में न्यू यॉर्क की सड़क पर मास्क पहनकर काम करता सफ़ाईकर्मी.
तब भी आज की तरह से ही ताज़ी हवा को संक्रमण को फैलने से रोकने में मददगार माना गया था.
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इमेज कैप्शन, सैन फ्रांसिस्को में खुले पार्क में लगी अदालत. तस्वीर 1918 की है.
लेकिन, अमरीका के बड़े शहरों में बड़ी तादाद में लोगों के इकट्ठा होने को रोक पाना नामुमकिन रहा, ख़ासकर धर्मस्थलों पर.
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इमेज कैप्शन, कैलिफ़ोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में महामारी के दौरान सैंट मैरी ऑफ़ द असंपशन चर्च के बाहर प्रार्थना सभा के लिए लगी भीड़.
महामारी के अंत में, ब्रिटेन में 2,28,000 लोग मर चुके थे. साथ देश की करीब एक-चौथाई आबादी इससे संक्रमित हो चुकी थी.
कुछ वक्त तक वायरस को मारने की कोशिशें जारी रहीं और लोग सीजनल इंफ्लूएंजा के संभावित घातक असर से कहीं ज्यादा सतर्क हो गए थे.
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इमेज कैप्शन, मार्च 1920 में लंदन की बस को सेनेटाइज़ करता एक कर्मचारी.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.