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कोरोना वायरसः नियम तोड़ने वालों की शिकायत करना कितना सही?
- Author, फ्रांसेस माओ
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
कोरोना वायरस के चलते पूरी दुनिया तक़रीबन लॉकडाउन में जी रही है. ऐसे में अगर आप किसी को नियमों को तोड़ते हुए देखते हैं तो क्या आप उसकी ख़बर अधिकारियों को देंगे? क्या यह एक नागरिक के तौर पर आपका कर्तव्य है या यह अपने पड़ोसियों पर नज़र रखना है? और इन दोनों के बीच के फ़र्क़ को कैसे तय किया जा सकता है?
जेनी और वेरोनिका ने देखा कि उनके पड़ोस का बार खुला हुआ है.
पाबंदियों के दौर में गुपचुप तरीक़े से होने वाले कामों की तरह से यह बार लोगों को पिछले दरवाज़े से एंट्री दे रहा था और कोरोना के लॉकडाउन में कामकाज कर रहा था.
शिकागो के नियमों को तोड़ रहे इन शराब पीने वालों को देखकर उन्हें तेज़ ग़ुस्सा आया. शिकागो कोरोना वायरस से अमरीका में सबसे बुरी तरह से प्रभावित शहरों में से एक है.
जानकारी देने से मुकर गए
लेकिन, बाद में जब एक अफ़सर ने उनका दरवाज़ा खटखटाकर इस बार के बारे में जानकारी मांगी तो उन्होंने कुछ भी नहीं बताया.
जेनी ने कहा, 'उनके पास एक चांदी का बड़ा चमकदार स्टार बैज था जैसा शेरिफ़ के पास होता है. लेकिन, जब हमारे पास मौक़ा था, हमने उन्हें बार के बारे में कुछ नहीं बताया.'
पूरी दुनिया में लोग घर पर रहने के आदेशों का पालन कर रहे हैं. लेकिन, जेनी और वेरोनिका जैसे कई लोग इस उहापोह में हैं कि नियमों को तोड़ने वालों की जानकारी प्रशासन को दी जाए या न दी जाए. ऐसे लोग दुविधा में हैं कि क्या यह उनका नागरिक कर्तव्य है या उन्हें केवल अपने काम से मतलब रखना चाहिए?
लॉकडाउन तोड़ने वालों के ख़िलाफ़ बने क़ानून
कई देश और शहरों आपातकालीन नियम बनाए हैं और लॉकडाउन के नियमों के उल्लंघन को एक जुर्म बना दिया गया है. इनमें जुर्माने और जेल के प्रावधान किए गए हैं. कुछ देशों ने तो हॉटलाइन भी चालू कर दी हैं ताकि इस बारे में ख़ुफ़िया जानकारी जुटाई जा सके.
ऑस्ट्रेलिया के शहर विक्टोरिया में वीडियो गेम खेलने के लिए इकट्ठा हुए दोस्तों की ख़बर पुलिस को दे दी गई. इसके अलावा, एक 'अवैध' डिनर पार्टी करने वालों पर जुर्माना लगाया गया.
न्यू साउथ वेल्स में संक्रमण के फैलने के बीच लोग सुमुद्र के बीच पर इकट्ठे नजर आ रहे हैं. इसे देखते हुए राज्य की प्रीमियर ग्लेडिस बेरेजिक्लियान ने लोगों से ऐसे लॉकडाउन तोड़ने वालों की ख़बर अधिकारियों को देने के लिए कहा है.
लेकिन, ग़लत और फ़र्ज़ी सूचनाओं का क्या?
इसके बाद के हफ्ते में पुलिस के पास 5,000 से ज़्यादा कॉल्स आईं.
लेकिन, कुछ कॉलर्स ने ग़लत सूचनाएं भी दीं. मसलन, पुलिस को एक कपल की फ़ेसबुक पर हॉलिडे की तस्वीरों की ख़बर दी गई. जब पुलिस उस कपल के दरवाज़े पर पहुंची तो उन्हें बताया गया कि फ़ेसबुक पर पड़ी उनकी तस्वीरें पिछले साल की छुट्टियों के दौरान खींची गई थीं.
सिंगापुर में सम्मिलित ज़िम्मेदारी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर माना जाता है. सिंगापुर में टूटे हुए फ़ुटपाथ जैसी चीज़ों की सूचना देने के लिए बने एक सरकारी एप को अपडेट किया गया है ताकि बाहर घूमने वालों समेत लॉकडाउन तोड़ने वालों की जानकारियां उन्हें मिल सकें.
केवल दो दिनों में ही 700 लोगों ने इस पर सूचनाएं दी हैं. सरकार ने आम लोगों से कहा है कि वे केवल ऐसी चीज़ों के बारे में जानकारियां दें जिसके वे ख़ुद गवाह हैं.
सरकारी हॉटलाइन्स से अलग हज़ारों लोग नियमों को तोड़ने वालों की निंदा करने वाले ऑनलाइन फोरमों से जुड़े हुए हैं. सिंगापुर का ऐसा सबसे बड़ा फोरम फ़ेसबुक पर बना 'कोविडियट' ग्रुप है. इसमें 26,000 से ज्यादा मेंबर हैं. इसमें नियमों के कथित उल्लंघनों की धुंधली तस्वीरों की भरमार है जो कि आमतौर पर अपने अपार्टमेंट की बॉलकनी में बैठे हुए दूर से खींची गई हैं.
क्या दूसरों की जानकारी देने की घटनाएं असमान्य हैं?
सिडनी यूनिवर्सिटी की मोरल फ़िलोसॉफ़र प्रोफ़ेसर हन्ना टियरनी कहती हैं, 'सुपरमार्केट हो या पार्क हो लोग अपनी रोज़ाना की ज़िंदगी में इस जद्दोजहद का सामना कर रहे हैं. मुझे पता है कि बातचीत करने की कितनी बेताबी होती है, ख़ासतौर पर ऐसे हालात में. लेकिन, जब तक कोई वैक्सीन या इलाज नहीं आ जाता, लोगों के सुरक्षित रहने का एकमात्र ज़रिया सामाजिक दूरी ही है.'
'भले ही लोगों की आबादी का एक मामूली हिस्सा भी सामाजिक दूरी का पालन करने में नाकाम रहता है तो यह सभी की कोशिशों को ख़त्म कर सकता है.'
वह कहती हैं कि अगर लोग यह देखते हैं कि कोई नियमों को नहीं मान रहा है और इस तरह से सभी को जोखिम में डाल रहा है तो उन्हें ग़ुस्सा आना लाज़मी है.
सामुदायिक चेतना है वजह
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर में साइकोलॉजी के शोधार्थी मिनझेंग होउ और उनके सहयोगी असिस्टेंट प्रोफ़ेसर लिले जिया इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि किस वजह से लोग अपने दोस्तों और परिवारों के अपराधों की ख़बर अधिकारियों को देते हैं.
उन्होंने पाया है कि इसके पीछे मज़बूत सामुदायिक चेतना एक बड़ी वजह होती है. असिस्टेंट प्रोफ़ेसर जिया कहती हैं, 'ऐसा नहीं है कि ये सभी बेकार लोग हैं जो कि घरों पर बैठे हैं और क्वारंटीन में बोर हो रहे हैं और इस वजह से वे किसी दूसरे को दिक्क़त में डालना चाहते हैं.'
वह कहती हैं, 'बड़े पैमाने पर ऐसे लोग जो कि नियम तोड़ने वालों की शिकायत करते हैं वे सही चीज़ें करना चाहते हैं.'
ऑस्ट्रेलियाई छुट्टियां मनाने वाले कपल की झूठी शिकायत वाली कहानी की तरह से ही इस बात के भी काफी आसार हैं कि जब आपको असलियत की जानकारी न हो तब आप किसी पर ग़लत आरोप भी लगा सकते हैं.
इसी वजह से जेनी और वेरोनिका ने भी शिकागो के बार की शिकायत नहीं करने की सोची. उन्हें ठीक से यह पता नहीं था कि वास्तव में वहां क्या हो रहा था.
पुलिस को मिल जाता है मनमर्जी करने का अधिकार
न्यू यॉर्क से लेकर सिडनी तक अपराध के आंकड़े बता रहे हैं कि ज्यादा ग़रीब इलाक़ों में कहीं ज्यादा जुर्माने वसूले जा रहे हैं.
प्रोफ़ेसर टियरनी कहती हैं कि ऐसे सिस्टम वहां हैं जहां पुलिस को अपनी मनमर्जी से काम करने की इजाज़त है.
किन चीज़ों की इजाज़त है किन चीजों की नहीं, इसे लेकर यूके में एक ज़बरदस्त बहस छिड़ी हुई है. पुलिस ने लोगों से उल्लंघन करने वालों की ख़बर देने को कहा है, लेकिन लॉकडाउन के क़ानूनों के चलते भी गड़बड़ियां पैदा हो रही हैं.
कुछ हफ्तों तक चली बहस के बाद पुलिस के अधिकारियों ने साफ़ किया है कि लोग छोटी दूरी तक वॉक करने के लिए गाड़ी ड्राइव कर जा सकते हैं.
लेकिन, एक नीति के तौर पर यह कितना सही है कि लोगों को एक दूसरे की सूचनाएं देने के लिए सरकार इस्तेमाल करे?
न्यू यॉर्क शहर को ही लीजिए. यह अमरीका में कोरोना वायरस का गढ़ बन गया है. यहां हॉटलाइन खुलने के बाद से ही कॉल्स की भरमार का शिकार है. लेकिन, इनमें शिकायतों के मुक़ाबले प्रैंक कॉल्स और मज़ाक़ उड़ाने जैसी चीज़ों की अधिकता है.
डॉ. टियरनी कहती हैं, 'नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को सज़ा देना नियमों का पालन कराने का एक ज़रिया है. लेकिन, हमारे टूलबॉक्स में एक यही औज़ार नहीं होना चाहिए.'
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