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बिन्यामिन नेतन्याहू की इस 'नक़ली' जीत से कहां जाएगा इसराइल
- Author, टॉम बैटमैन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, जेरुसलम
हालिया चुनावों के बेनतीजा रहने के हफ़्तों बाद बिन्यामिन नेतन्याहू को कुछ वक़्त के लिए क्वारंटीन में जाना पड़ा.
अपने प्रतिस्पर्धियों से चाल में आगे निकलने के लिए उन्हें कुछ वक़्त की ज़रूरत थी. कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई में इसराइल के रेस्पॉन्स की निगरानी कर रहे वहां के स्वास्थ्य मंत्री के कोरोना वायरस से पॉज़ीटिव पाए जाने के बाद उन्हें यह अहम वक़्त मिल गया.
आइसोलेशन में बीबी की ताजपोशी
इसके बाद संकट के बीच में ही 'किंग बीबी' (कई समर्थक उन्हें इस नाम से बुलाते हैं) की एक और ताजपोशी हो गई. पूरे देश के लॉकडाउन में होने के चलते ज़ूम वीडियो कॉल के ज़रिए शपथ हुई और उनके आधिकारिक आवास पर इस पर दस्तख़त किए गए.
बिन्यामिन नेतन्याहू की स्टोरी में अहम घटनाओं की यह एक और कड़ी है.
भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच उन्होंने तीन चुनावों में उनके सामने चुनौती बनकर खड़े रहे राजनीतिक गठजोड़ को तोड़ने में सफलता हासिल कर ली.
उन्होंने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज़ को फ़िलहाल अपना मुख्य सिपहसालार बना लिया है. विरोध प्रदर्शन करने वाले तेल अवीव में सामाजिक दूरी बनाए हुए खड़े दिखाई दिए.
डील ऑफ़ सेंचुरी की तैयारी
दूसरी तरफ़ वह कब्जाए गए वेस्ट बैंक के हिस्सों का विलय करने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तथाकथित 'डील ऑफ़ सेंचुरी' के लिए मंच तैयार करने की मुहिम में जुट गए. इसरायल के दक्षिणपंथियों के लिए यह जोशभरी मांग थी, लेकिन इससे फ़लीस्तीनियों के साथ तनाव बढ़ने की पूरी आशंका है.
लेकिन, इस सबके बावजूद उन्होंने गैंट्ज के साथ जो समझौता किया है वह कम से कम कागज़ों पर ही सही लेकिन नेतन्याहू के दौर को ख़त्म करता दिख रहा है.
इसरायल अपने सबसे लंबे वक़्त तक सत्ता में रहे लीडर को लेकर बड़े पैमाने पर बँटा हुआ है.
पिछले पूरे साल गैंट्ज ने नेतन्याहू को लेकर लोगों में पैदा हो रहे असंतोष की बुनियाद पर एक विपक्षी आंदोलन को खड़ा किया.
कौन हैं गैंट्ज़?
गैंट्ज एक पूर्व सैन्य प्रमुख हैं. गैंट्ज ने दक्षिणपंथी और लिबरल सेंटर की नीतियों को एकसाथ लाकर नेतन्याहू को उखाड़ने में ताक़त लगाई. उन्होंने नेतन्याहू के सुरक्षा के गारंटर की छवि को तोड़ने से लेकर उनके ख़िलाफ़ करप्शन के मामलों को उजागर करने की अप्रोच पर काम किया.
उन्होंने चुनावों में ऐलान किया था कि वह भ्रष्टाचार का सामना कर रहे प्रधानमंत्री के साथ कभी भी मंच साझा नहीं करेंगे. अब गैंट्ज ने अपनी इस शपथ को तोड़ दिया है.
वह अपने क़दम को उचित ठहरा रहे हैं. वह कहते हैं कि कोरोना वायरस की महामारी के वक़्त देश को एक स्थिर सरकार की ज़रूरत है और इसी वजह से वह नेतन्याहू के साथ हाथ मिला रहे हैं.
क्या है सरकार चलाने का फ़ॉर्मूला?
नेतन्याहू के समर्थक लगातार उनके आर्थिक प्रबंधन का गुणगान करते रहे. वे उनकी 'मिस्टर सिक्योरिटी-ओनली बीबी' की इमेज और नारों को पूरे कैंपेन के दौरान चिल्लाते रहे.
एक विश्लेषक बताते हैं कि इसरायल में एक सरकार है, लेकिन वह अपनी 'पहचान के संकट' से उबर नहीं पाई है.
इस जोड़ी ने एक रोटेशन एग्रीमेंट किया है. इसके मुताबिक़, अगले 18 महीने तक नेतन्याहू पीएम रहेंगे और गैंट्ज 'वैकल्पिक प्रधानमंत्री' के तौर पर होंगे. शुरुआत में रिटायर्ड जनरल गैंट्ज डिफ़ेंस मिनिस्टर के तौर पर सेवाएं देंगे, बाद में अगले साल वह प्रधानमंत्री बन जाएंगे.
एक राजनीतिक संकट के परिप्रेक्ष्य में इन गर्मियों में नेतन्याहू फ्रॉड, रिश्वत और विश्वास भंग करने को लेकर देरी से शुरू हुए ट्रायल्स का सामना कर रहे हैं. वह इन आरोपों को ख़ारिज करते हैं और उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए एक राजनीतिक साज़िश करार देते हैं.
सोमवार रात को अपनी मीटिंग के बाद इन दोनों नेताओं ने कहा कि वे एक 'राष्ट्रीय आपात सरकार' बनाने के लिए सहमत हो गए हैं.
नेतन्याहू ने कहा कि इस गठबंधन डील से लोगों की 'ज़िंदगियां और रोज़गार' बचाने में मदद मिलेगी.
असलियत यह है कि यह एग्रीमेंट देरी से हुआ है. अधिकारियों का मानना है कि वे सफलतापूर्वक देश में कोरोना वायरस की लहर को रोकने में कामयाब रहे हैं. लेकिन, अब एक आर्थिक आपातकाल जैसे हालात पैदा हो रहे हैं. देश की करीब एक-चौथाई वर्क फ़ोर्स यानी 10 लाख से ज्यादा लोग बेरोज़गारी का शिकार हो गए हैं.
एक-दूसरे को गारंटी
14 पन्नों वाला गठबंधन दस्तावेज़ सरकार को अगले तीन साल तक चलाने का मैकेनिज्म बताता है. साथ ही इसमें दोनों लोगों को गारंटी दी गई है कि वे दूसरे को सत्ता पर कब्जा करने से रोकेंगे.
इसमें इस तरह के उपाय हैं जो नेतन्याहू को एक और चुनाव कराने से रोकते हैं. साथ ही इसके जरिए गैंट्ज भी नेतन्याहू को पद से हटाने के लिए उन पर लगे आरोपों पर कोर्ट से दोषी पाए जाने और अपील होने तक सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाएंगे.
राजनीतिक विश्लेषक योहानन प्लेसनेर के मुताबिक, यह डील एक 'लोकतांत्रिक युद्धविराम' जैसी है. योहानन इज़राइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट थिंक टैंक की अगुवाई करते हैं.
वह उन लोगों में भी हैं जो यह मानते हैं कि नेतन्याहू और उनके सहयोगियों के अपनी कानूनी समस्याओं से निकलने के लिए राजनीतिक दफ्तर का इस्तेमाल करने की कोशिशों के चलते इज़राइल आंशिक रूप से बैठ गया है.
वह कहते हैं, 'एंटी-डेमोक्रेटिक कानून निकट भविष्य में नहीं आने वाला.' वह इसके लिए ब्लू एंड व्हाइट पार्टी के जस्टिस मिनिस्ट्री और कानूनों पर नियंत्रण करने वाली कमेटी पर कंट्रोल को वजह बताते हैं.
यह किस तरह की सरकार होगी?
हारतेज़ के जर्नलिस्ट चेमी शालेव के मुताबिक, गैंट्ज़ का ज्यादातर सरकार पर नियंत्रण सेंटर की ओर शिफ़्ट दिखाता है. शालेव कहते हैं कि यह धार्मिक राष्ट्रवाद या अल्ट्रा-राइट नीतियों पर टिकी इसरायल की राजनीति में यह एक महत्वपूर्ण और सार्थक बदलाव है.
वह कहते हैं, 'अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियों और लॉबीज का असीमित प्रभाव भी इससे खत्म हो जाएगा.'
फ़लीस्तीनी नेता और अरब इसरायली पार्टियां एग्रीमेंट में मौजूद एक क्लॉज की आलोचना कर रहे हैं जिसमें कहा गया है कि कब्ज़ाए गए वेस्ट बैंक में यहूदी सेटलमेंट्स और दूसरे इलाकों पर इसरायली सार्वभौमिकता लागू करने वाले कैबिनेट के फैसले 1 जुलाई से लागू हो सकते हैं.
यह प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रंप के इस इलाके में शांति की योजना को दर्शाते हैं. यह योजना भारी तौर पर इसरायल की तरफ झुकी हुई है और फ़लीस्तीनी इसे ख़ारिज कर चुके हैं.
अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक़ ये सेटलमेंट्स अवैध हैं, हालांकि, इसरायल इस पर आपत्ति जताता है.
फ़लीस्तीनी प्रतिक्रिया
फ़लीस्तीनी प्रधानमंत्री मुहम्मद शतायेह ने इस गठबंधन डील को 'इसरायली एनेक्सेशन गवर्नमेंट'का आधार बताया है.
उन्होंने कहा है, 'इसका मतलब है दो देशों के समाधान का अंत और अंतरराष्ट्रीय कानूनों और प्रस्तावों के तहत स्थापित फ़लीस्तीनियों के अधिकारों का खीत्मा.'
डील के मुताबिक, किसी भी एनेक्सेशन (विलय) प्रस्ताव को अमरीकी सपोर्ट की जरूरत होगी.
प्लेसनेर कहते हैं कि इस डील में ईजिप्ट और जॉर्डन जैसे देशों के साथ मौजूदा एग्रीमेंट्स कायम रखने की बात कही गई है. प्लेसनेर मानते हैं कि इस डील में यह मसला एजेंडे में तो है मगर यह साफ़ नहीं है कि इसे किया कैसे जाएगा.
गैंट्ज पर धोखा देने के लग रहे आरोप
वह कहते हैं, 'गैंट्ज ब्रेक तो लगा सकते हैं लेकिन वह साथ में हैंडब्रेक भी खींच दें ऐसा नहीं हो सकता.'
दूसरी ओर, गैंट्ज के कुछ पूर्व सहयोगी उन पर धोखा देने का आरोप लगा रहे हैं.
ब्लू एंड व्हाइट के एक पूर्व को-लीडर याइर लैपिड कहते हैं, 'यह इस देश का सबसे बुरा फ्रॉड है. मुझे यकीन नहीं था कि वे आपके वोट चुराकर इसे नेतन्याहू को दे देंगे.'
गैंट्ज को सरकार बनाने में पहले समर्थन दे चुके एक और एमपी ने उन पर एक 'अपराधी का पायदान' बन जाने का आरोप लगाया.
ब्लू एंड व्हाइट की गाड़ी पटरी से उतर गई थी. वे अपने बूते सरकार बनाने में नाकाम थे क्योंकि उनके पास संसद में बहुमत नहीं था. या फिर उन्हें ऐसे समूहों के साथ गठजोड़ करना था जो उनके कट्टर विरोधी थे.
इसरायली लोग तीन बार नेतन्याहू के भाग्य का फैसला करने में नाकाम रहे. अब नेतन्याहू ने उनके भाग्य का फैसला खुद कर दिया है. कम से कम फ़िलहाल तो ऐसा ही है.
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