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कोरोना: प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने माना, पाकिस्तान के पास पर्याप्त साधन नहीं -उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते भी सबसे ज़्यादा कोरोना वायरस से जुड़ीं ख़बरें ही रहीं.
पाकिस्तान में कोरोना वायरस से शनिवार (11 अप्रैल) रात बारह बजे तक 86 लोगों की मौत हो चुकी है और 5,031 लोग इससे संक्रमित हैं. इस वायरस के शिकार 786 लोग ठीक हो चुके हैं. यहां सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य पंजाब है जहां 2,425 लोग अब तक संक्रमित हुए हैं. हालांकि मरने वालों की संख्या सबसे ज़्यादा सिंध में है. पंजाब में अब तक 19 लोग मारे गए हैं.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्त साधन नहीं होने की बात स्वीकार की है. इमरान ख़ान ने कहा कि जो मुल्क एटम बम बना सकता है क्या वो वेंटिलेटर और जाँच के लिए टेस्टिंग किट नहीं बना सकता.
कोर्ट ने मांगा तैयारियों का हिसाब
अख़बार जंग के अनुसार सरकारी टेलीवीज़न पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए पाक प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा, "हमारे लिए मास्क या किट बनाना मुश्किल नहीं, हमें हर चीज़ आयात करने की आदत पड़ी हुई है. मैं एकदम और पूर्ण लॉकडाउन का समर्थक नहीं. ग़रीबी और बेरोज़गारी में इज़ाफ़ा हुआ. हमारे देश का मसला ये है कि यहाँ एक छोटे से अमीर तबक़े की फ़िक्र की जाती है, इसीलिए हम महान देश कभी नहीं बन सके."
इमरान ख़ान ने कहा कि अगर कोरोना के मरीज़ बढ़ते गए तो पाकिस्तान की स्वास्थ्य सेवा इसका बोझ नहीं उठा सकेगी.
उन्होंने कहा, "कोरोना से जंग न तो केंद्र सरकार, न राज्य सरकार और न ही विदेशी मदद से जीती जा सकती है. पूरे राष्ट्र को मिलकर ये जंग जीतनी होगी."
इस बीच पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने कोरोना से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों का सरकार से हिसाब माँगा है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुलज़ार अहमद ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार से पूछा है कि कोरोनो से निपटने के लिए अब तक क्या क़दम उठाए गए हैं और अस्पतालों में क्या सुविधाएं दी जा रही हैं.
अख़बार के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल, केंद्रीय स्वास्थ्य और गृह सचिव, चारों प्रांतों के मुख्य सचिव को अदालत में हाज़िर होने के आदेश दिए हैं. सोमवार को चीफ़ जस्टिस की अध्यक्षता में पाँच जजों की बेंच इस पर सुनवाई करेगी.
भारत में कोरोना वायरस को मुसलमानों से जोड़ने और कथित तौर पर उनको निशाना बनाने से जुड़ी ख़बरें भी पाकिस्तानी अख़बारों में ख़ूब सुर्ख़ियां बटोर रही हैं.
तब्लीग़ी जमात पर चर्चा
अख़बार नवा-ए-वक़्त ने लिखा है कि भारत में कोरोना को मुसलमानों से जोड़ने पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है.
अख़बार लिखता है कि कोरोना को लेकर भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ जो कथित नफ़रत भरे और हिंसा को उकसाने वाले बयान दिए जा रहे हैं, उस पर संयुक्त राष्ट्र चिंतित है और भारत को इसका नोटिस लेना चाहिए. भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़िडेंट संयोजक रेनाटा लोक डेज़ालियन ने कहा कि कोविड-19 को लेकर एक ख़ास समुदाय के लोगों को 'कलंक' कहे जाने के ख़िलाफ़ और पलायन कर रहे मज़दूरों के हित में भारत सरकार को तुरंत क़दम उठाने चाहिए.
अख़बार के अनुसार इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी भारत में कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई को सांप्रदायिक रंग देने के कथित प्रयासों की आलोचना की थी.
इससे पहले भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी एक एडवाइज़री जारी कर किसी समुदाय को कोरोना फैलाने के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराने की अपील की थी. भारत की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी अपनी पार्टी के नेताओं से कहा था कि वो कोविड-19 के प्रकोप पर कोई भी सांप्रदायिक बयान देने से बचें.
दरअसल भारत में मुसलमानों की एक संस्था तब्लीग़ी जमात ने मार्च में अपने दिल्ली स्थित मुख्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित किया था जिसमें दो-तीन हज़ार लोग जमा हुए थे. इनमें कई लोग विदेश से भी आए थे.
मीडिया में ये ख़बर आने के बाद सरकार ने जमात से जुड़े सैकड़ों लोगों की कोरोना जाँच करवाई और उन्हें क्वारंटीन में रखा. उनमें से कई पॉज़िटिव पाए गए और कोरोना के मामलों में उछाल आ गया. उसके बाद से मुसलमानों के ख़िलाफ़ बयान आने शुरू हो गए. भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया में भी मुसलमानों को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाने लगा. हालांकि जमात का कहना है कि उसने किसी क़ानून का कोई उल्लंघन नहीं किया है.
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