कोरोना से लड़ रहे पाकिस्तान के डॉक्टर पीपीई किट को लेकर सरकार से नाराज़ हैं

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    • Author, एम इलियास ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद

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स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉक्टर आरिफ़ अल्वी ने हाल ही में आधिकारियों के साथ बैठक की एक तस्वीर ट्वीट की जिसमें वो फ़ेस मास्क पहने दिख रहे हैं.

हालांकि ये केवल एक साधारण तस्वीर ही होनी चाहिए थी लेकिन इस तस्वीर के कारण पाकिस्तान में उनकी आलोचना हो रही है.

मामला ये है कि तस्वीर में राष्ट्रपति डॉक्टर अल्वी ने एन-95 मास्क पहना हुआ है जिसका आम तौर पर स्वास्थ्यकर्मी इस्तेमाल करते हैं. इस तस्वीर के कारण अब पाकिस्तान सरकार और कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहे स्वास्थ्यकर्मियों के बीच तनाव पैदा हो गया है.

पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन ने कहा है, "एक तरफ़ जहां राजनेता और आला अधिकारी अक्सर बैठकों में और दौरों के दौरान एन-95 मास्क पहने दिखते हैं तो दूसरी तरफ़ स्वास्थ्यकर्मी इन मास्क और पीपीई किट (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) की कमी से जूझ रहे हैं."

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कोविड 19 के दौर में जहां दुनिया के कई हिस्सों में स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई में उनके योगदान के लिए सराहना मिल रही है वहीं पाकिस्तान के एक शहर में 25 डॉक्टर कोरोना संक्रमित पाए गए हैं.

यहां पुलिस और डॉक्टरों के बीच झड़पों की ख़बरें मिल रही हैं और पीपीई किट की कमी के मुद्दे पर विरोध कर रहे डॉक्टरों को गिरफ़्तार भी किया गया है.

मामला तूल पकड़ने के बाद डॉ अल्वी ने स्पष्ट किया कि ये मास्क उनके हाल के चीन दौरे के दौरान उन्हें दिया गया था, इसके धागे टूट जाने के कारण इसे फिर से सिल कर वो इस्तेमाल कर रहे हैं. इस मामले के बाद से वो साधारण मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं.

लेकिन डॉक्टर उनसे इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं.

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इमेज कैप्शन, 10 अप्रैल 2020 को पाकिस्तान के क्वेटा में ली गई इस तस्वीर में विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले एक डॉक्टर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

बीते महीने जब से कोरोना वायरस महामारी ने पाकिस्तान की दहलीज में क़दम रखा है तब से ही यहां ख़बरों में पीपीई किट की कमी का मुद्दा छाया हुआ है. देश के लिए न केवल ये अभूतपूर्व स्थिति है बल्कि महामारी के कारण मास्क की मांग अचानक बढ़ जाएगी इसका सही आकलन भी नहीं किया गया था.

छह महीने पहले पाकिस्तान सरकार ने देश में स्वास्थ्यकर्मियों के नियामक संगठन पाकिस्तान मेडिकल एंड डेन्टल काउंसिल (पीएमडीसी) को ख़त्म करने का फ़ैसला लिया था. सरकार का फ़ैसला यहां के दो लाख डॉक्टरों के लिए आश्चर्यजनक था.

पीएमडीसी से जुड़े एक स्रोत के अनुसार इस फ़ैसले के कारण देश में क़रीब 15 हज़ार मेडिकल ग्रेजुएट को ज़रूरी सर्टिफ़िकेशन नहीं मिल पाया. साथ ही देश और विदेश में प्रैक्टिस जारी रखने के लिए हर पाँच साल में अपना रजिस्ट्रेशन रीन्यू करवाना बाध्यकारी हो जाने से कई डॉक्टरों को अपनी प्रैक्टिस बंद करनी पड़ी. अब भी क़रीब 30 हज़ार डॉक्टर अपना रजिस्ट्रेशन रीन्यू होने का इंतज़ार कर रहे हैं.

ऐसे में सीमित संख्या में काम कर रहे डॉक्टरों का समुदाय पीपीई किट की भारी कमी से भी जूझ रहा है और देश भर में स्वास्थ्यकर्मी विरोध प्रदर्शनों और हड़ताल कर रहे हैं.

लेकिन क्वेटा में हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने जिस तरह हिंसक रूप लिया वैसा देश के किसी और हिस्से में नहीं हुआ. हालांकि इसके पीछे कारण भी है.

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इमेज कैप्शन, क्वेटा में 6 अप्रैल 2020 को डॉक्टरों ने विरोध प्रद्रशन किया था. इस दौरान पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हुई थी.

बलूचिस्तान प्रांत पहले ही सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है. यहां केवल दो बड़े अस्पताल हैं और दोनों ही राजधानी क्वेटा में मौजूद हैं. राजनीतिक तौर पर भी इस इलाक़े को नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है. यहां बीते दो दशक से सत्ता विरोधी ताक़तें भी उभरने की कोशिशें कर रही हैं हालांकि अब तक वो कमज़ोर ही रही हैं.

पाकिस्तान में यही वो प्रांत है जहां कोरोना वायरस ने सबसे पहले क़दम रखा. ये वायरस फ़रवरी और मार्च में ईरान की तरफ़ से आए श्रद्धालुओं के साथ पाकिस्तान आया.

वायरस का पता चलते ही सरकार ने ताफ्तान में सीमा के नज़दीक एक क्वारंटीन कैंप की व्यवस्था की. लेकिन यंग डॉक्टर्स एसोसिएशन के बलूचिस्तान अध्याय के अध्यक्ष डॉक्टर यासिर ख़ान कहते हैं, "यहां न केवल सुविधाएं नाकाफ़ी थीं बल्कि यहां अव्यवस्था भी थी."

वो कहते हैं, "ज़्यादा लोगों को टेंट में एक साथ रखा गया जिससे जिन लोगों में वायरस संक्रमण नहीं था वो भी संक्रमण की चपेट में आ गए."

चिंता तब और बढ़ गई जब क़रीब दो सप्ताह पहले क्वेटा में 96 लोगों के कोरोना टेस्ट में 40 ऐसे लोगों टेस्ट पॉज़िटिव आया जो हाल में विदेश नहीं गए थे. इससे ये संकेत मिला कि वायरस का कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरू हो चुका है.

प्रोटेक्टिव इक्विप्मेंट की डॉक्टरों की मांग मानते हुए प्रांतीय सरकार ने सामान की व्यवस्था की और अस्पतालों से N-95 मिलने की रसीद पर हस्ताक्षर भी करवाए गए.

लेकिन सप्लाई में जो मास्क मिले वो K-95 मास्क थे. डॉक्टर यासिर ख़ान कहते हैं कि अमूमन नाई और ब्युटीशियन इस मास्क का इस्तेमाल करते हैं.

अब तक क्वेटा में कम से कम 17 डॉक्टर और पांच स्वास्थ्यकर्मी कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं.

डॉक्टर ख़ान कहते हैं कि गंभीर चिंता का कारण ये है कि इनमें से कोई स्वास्थ्यकर्मी सीधे तौर पर कोरोना संक्रमित मरीज़ों के संपर्क में नहीं आए थे.

यंग डॉक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार केवल बलूचिस्तान में ही नहीं बल्कि दूसरे इलाक़ों में सावास्थ्यकर्मियों के कोरोना पॉज़िटिव होने की ख़बरें मिल रही हैं. ख़ैबर पख़्तूख़्वाह में 16 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके हैं, गिलगित-बाल्टिस्तान में दो स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो चुकी है और कराची में भी ,स्वास्थ्यकर्मियों के कोरोना की चपेट में आने की ख़बरें हैं.

स्वास्थ्यकर्मियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि के लिए बीबीसी ने प्रांत के स्वास्थ्य मंत्रालय से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन वहां से कोई उत्तर नहीं मिला.

बुधवार को सरकार और डॉक्टरों के बीच तनाव चरम तक पहुंच गया. देश के सैंकड़ों डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने हड़ताल कर दी. वो क्वेटा की सिविल अस्पताल के सामने एकत्र हुए और वहां से उन्होंने मुख्यमंत्री के आवास की तरफ मार्च करना शुरू किया.

आधे रास्ते में ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया और जब स्वास्थ्यकर्मी घेरा तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे तो उन पर हमला किया गया और लाठी-डंडों से उन्हें पीटा गया.

हादसे में कई लोग घायल हुए और दो दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया.

इन डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को अब रिहा किया जा चुका है और उन्होंने अपनी हड़ताल को ख़त्म करने का फैसला किया है.

लेकिन पीपीई किट की कमी को लेकर उनका विरोध अभी जारी है. सरकार ने दावा किया है कि उन्होंने ज़रूरी किट भेज दिए हैं लेकिन डॉक्टरों को अभी इनके मिलने का इंतज़ार है.

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