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कोरोना वायरस: इटली के बाद स्पेन बना संक्रमण का दूसरा बड़ा केंद्र
चीन के बाद यूरोप कोरोना वायरस के संक्रमण का केंद्र बन गया है.
यूरोप में इटली के बाद स्पेन में सबसे ज़्यादा गंभीर हालत बनी हुई है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, रविवार तक स्पेन में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 1720 तक पहुंच चुकी है.
यहां एक दिन में 394 मौतें हुई हैं.
स्पेन में कोरोना वायरस के 28,572 मामले आ चुके हैं.
इनमें से 2575 लोग ठीक हो चुके हैं और 1785 मरीजों को इंटेसिव केयर यूनिट्स में रखा गया है.
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने शनिवार को कहा था कि इस महामारी से लड़ने के लिए जो भी ज़रूरी होगा वो सरकार करेगी.
उन्होंने लोगों को आगाह करते हुए कहा, ''अभी और बुरा दौर आना बाक़ी है.''
स्पेन में आपातकाल
स्पेन में कोरोना वायरस से निपटने के लिए आपातकाल लगा दिया गया था.
15 मार्च को लगाए गए इस आपातकाल को और आगे बढ़ाने की योजना है.
स्पेन की राजधानी मैड्रिड इस महामारी का केंद्र बन गई है.
प्रधानमंत्री के मुताबिक़ शहर में बने पुराने घरों को सेना सैनिटाइज़ करने का काम करेगी.
इटली में बनी ख़तरनाक स्थिति के बाद अब स्पेन भी उसकी तरह बचाव के उपाय अपना रहा है.
इसके लिए लोगों को सार्वजनिक स्थानों से दूर रखने के लिए कड़े क़ानून अपनाए जा रहे हैं.
मरीज़ों की संख्या को देखते हुए देशभर में इमरजेंसी अस्पताल बनाए जा रहे हैं.
लोगों को घरों के अंदर रहने के लिए कहा गया है.
सूनी गलियां और सड़कें
स्पेन की गलियां अब सुनसान हैं और बाज़ार खाली पड़े हैं.
मैड्रिड की वो सड़कें, जहाँ कभी चहल-पहल होती थीं वो आज ख़ाली पड़ी हैं.
पेट्रोलिंग और ड्रोन के ज़रिए सड़कों पर नज़र रखी जा रही है ताकि बाहर निकलने वालों को रोका जा सके.
पुलिस लोगों को घर के अंदर रहने के लिए बोल रही है.
लोगों को कहा गया है कि वो सिर्फ़ खाने-पीने की चीज़ें ही ख़रीदने के लिए बाहर निकलें या फिर कोई आपातकाल की स्थिति हो.
मरीज़ों की बढ़ती संख्या के साथ ही स्पेन में स्वास्थ्य संबंधी उपकरणों की ज़रूरत भी बढ़ गई है.
इसलिए मास्क और वेंटिलेटर्स का राष्ट्रीय स्तर पर प्रोडक्शन किया जा रहा है.
क्यों बिगड़े हालात
क़रीब पांच लाख वर्ग किलोमीटर में फैले स्पेन की जनसंख्या चार करोड़ 67 लाख है.
स्पेन की आबादी में 65 साल से ज़्यादा उम्र वाले लोगों की संख्या 17 प्रतिशत है.
स्पेन में कोरोना वायरस से संक्रमण का पहला मामला 31 जनवरी को आया था.
फरवरी में मामले बहुत तेज़ी से नहीं बढ़े थे. लेकिन इसके बाद स्पेन में मामले बहुत तेज़ी से बढ़ते गए.
एक कारण ये भी है कि स्पेन की सीमा से सटे देशों में भी कोरोना वायरस का संक्रमण तेज़ी से फैला है.
स्पेन की सीमा फ्रांस से लगती है और फ्रांस इटली के साथ सीमाएं साझा करता है.
फ्रांस भी इस वायरस से अछूता नहीं है. यहां 12500 लोगो कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं और संक्रमण से 562 मौतें हो चुकी हैं.
वहीं, इटली की बात करें तो यहां शनिवार को कोरोना वायरस के 800 नए मामले सामने आए हैं.
यहां मौत का आंकड़ा चीन से भी आगे निकल गया है.
इटली में 5500 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जो कोरोना वायरस से संक्रमित किसी भी देश में सबसे ज़्यादा है.
लॉम्बार्डी यहां सबसे प्रभावित क्षेत्र है.
इसके अलावा ये भी बताया जाता है कि कोरोना वायरस के ख़तरे के बावजूद भी स्पेन में समय रहते सभाओं, रैलियों और लोगों के इकट्ठा होने पर रोक नहीं लगाई गई.
आठ मार्च को ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर स्पेन में हज़ारों लोगों ने मार्च निकाला था.
हालांकि, जानकारों ये भी कहते है कि सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद भी स्पेन के लोगों ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया और आवाजाही में कमी नहीं की.
इसके बाद सरकार को और कड़े क़दम उठाने पड़े.
जब बीबीसी ने स्पेन में रह रहे लोगों से बात की तो उनका कहना था कि सावधानियों और नियमों को पहले ही लागू कर देना चाहिए था.
हम इटली के नज़दीकी देश हैं तो ये कैसे मुमकिन है कि यहां संक्रमण फैलेगा ही नहीं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना वायरस दुनिया के 186 देशों को अपनी चपेट में ले चुका है.
दुनिया भर में तीन लाख तीस हज़ार से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं.
मरने वालों की संख्या 14,600 हज़ार के पार पहुंच चुकी है.
वहीं, क़रीब 98 हज़ार लोग बीमारी से पूरी तरह ठीक हुए हैं.
इंडियन मेडिकल रिसर्च एसोसिएशन के मुताबिक 23 मार्च को दिन 10 बजे तक भारत में 415 मामलों की पुष्टि हुई है.
बीते 24 घंटे में 19 नए मामलों का पता चला है.
कोरोना के संक्रमण के चलते अब तक भारत में सात लोगों की मौत हो चुकी है.
एसोसिएशन के मुताबिक़ अभी तक 17,493 लोगों का टेस्ट किया जा चुका है.
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