दुबई के शेख़ मोहम्मद ने बेटियों का अपहरण किया और पत्नी को धमकाया- कोर्ट

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- Author, फ्रैंक गार्डनेर
- पदनाम, बीबीसी सिक्योरिटी संवाददाता
अपहरण, जबरन वापस ले जाने की कोशिश, प्रताड़ना और डराना-धमकाना...
गुरुवार को दुबई के अरबपति शासक शेख़ मोहम्मद बिन राशीद अल-मक़तूम के ख़िलाफ़ उनकी पूर्व पत्नी और राजकुमारी हया बिंत अल-हुसैन द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इन्हें सही पाया. जिसके बाद ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने विस्तार में अपना फ़ैसला सुनाया.
यह हाई-प्रोफ़ाइल केस क़रीब आठ महीने पहले शुरू हुआ था. कोर्ट ने सुनवाई के बाद एक फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग जजमेंट दिया जोकि राजकुमारी हया के पक्ष में है. राजकुमारी हया पिछले साल दुबई छोड़कर लंदन चली गई थीं. जिसका कारण ये बताया गया था कि राजकुमारी हया को अपनी जान का ख़तरा महसूस हो रहा था क्योंकि वो अपने पति के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही थीं.
शेख़ मोहम्मद ने भरपूर कोशिश की कि यह फ़ैसला सार्वजनिक ना हो लेकिन ऐसा हुआ नहीं. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दुबई के शासक को कोर्ट के प्रति ईमानदार नहीं पाया.
कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद एक बयान जारी करके शेख़ मोहम्मद ने कहा कि सरकार के प्रमुख होने के नाते मैं कोर्ट की फ़ैक्ट-फ़ाइन्डिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेने में समर्थ नहीं था. और उसी का परिणाम है कि ये सिर्फ़ और सिर्फ़ एक पक्ष की ही बात करता है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह एक निजी मामला था. उन्होंने कहा, "मैं मीडिया से कहना चाहता हूं कि वो हमारे बच्चों की निजता का सम्मान करें. और यहां ब्रिटेन में उनके जीवन में घुसपैठ ना करें."

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स्वतंत्रता से वंचित युवा महिलाएं
एक लंबी चली प्रक्रिया में कोर्ट ने सारे गवाहों के बयान सुनने के बाद शेख़ मोहम्मद को अपहरण के लिए ज़िम्मेदार ठहराया और अपनी दो बेटियों पर दबाव बनाने का ज़िम्मेदार माना.
दुबई के शासक की बेटी शेख़ लतीफ़ा ने साल 2018 के मार्च महीने में कथित तौर पर भागने की कोशिश की थी. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि उन्हें भारतीय तट के पास एक जहाज़ से जबरन पकड़कर लाया गया है. जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने ऐसी किसी भी रिपोर्ट का खंडन किया था और उनका कहना था कि शहज़ादी अपने घर में, अपने परिवार के साथ रह रही हैं. रिपोर्टों के मुताबिक़ दुबई के शेख़ की बेटी शेख़ लतीफ़ा ने आज़ाद ज़िंदगी जीने के लिए विदेश भागने की कोशिश की थी.
एक पूर्व फ्रांसीसी जासूस हर्व जॉबर्ट ने 33 साल की शहज़ादी को भागने में मदद की थी. रिपोर्टों के मुताबिक़ जिस समय उन्हें पकड़ा गया उनका जहाज़ नोस्ट्रोमो भारतीय तट से 80 किलोमीटर से भी कम दूरी पर था. जॉबर्ट का आरोप है कि शहज़ादी लतीफ़ा को उनकी इच्छा के ख़िलाफ़ ज़बरदस्ती हेलिकॉप्टर में बिठाकर वापस ले जाया गया. जबकि वो विदेश में ही शरण लेना चाहती थीं. जब वो कथित तौर पर ग़ायब हुई थीं, उसी दौरान एक वीडियो जारी हुआ था जिसमें वो अपने भागने के सुनियोजित प्रयास के बारे में बात कर रही थीं.
"अगर आप ये वीडियो देख रहे हैं तो यह बिल्कुल भी अच्छी चीज़ नहीं है. या तो मैं मर चुकी हूं या फिर बहुत बहुत बहुत बुरी स्थिति में हूं."
40 मिनट के वीडियो में वो ये बात बिल्कुल शुरुआत में कहती हैं. इस वीडियो में वो आरोप लगाती हैं कि उनके और उनके परिवार के पास 'चुनने की आज़ादी नहीं है.' इसके अलावा वो ये भी कहती हैं कि उन्होंने 16 साल की उम्र मे भी देश छोड़कर कहीं दूसरी जगह चले जाने की कोशिश की थी.
शेख़ लतीफ़ा के अलावा शेख़ शम्सा भी साल 2000 में ब्रिटेन में छुट्टी मनाने के दौरान भाग गई थीं. लेकिन बाद में शेख़ के एजेंट्स उन्हें क्रैंब्रिजशायर से वापस लाए थे. कथित तौर पर उन्हें जबरन दुबई वापस लाया गया था.
सुनवाई के दौरान जज ने पाया कि शेख़ मोहम्मद अपना 'शासन' बनाए रखना चाहते हैं, जिसकी वजह से दोनों युवा महिलाओं की आज़ादी बाधित हो रही है.

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किस देश से आती हैं राजकुमारी हया?
राजकुमारी हया का जन्म मई 1974 में हुआ है. उनके पिता जॉर्डन के किंग हुसैन थे जबकि मां महारानी आलिया अल-हुसैन थीं.
जब राजकुमारी हया सिर्फ़ तीन साल की थीं तब एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मां की मौत हो गई थी.
राजकुमारी हया ने अपना बचपन ब्रिटेन में बिताया. उन्होंने दो प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई पूरी की. इनमें ब्रिस्टल का बैडमिंटन स्कूल और डोरसेट का ब्रयानस्टन स्कूल शामिल हैं.
इसके बाद उन्होंने ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी से राजनीति, दर्शन और अर्थशास्त्र में पढ़ाई की.
राजकुमारी हया को घुड़सवारी का भी शौक़ है और जब वो 20 साल की थीं तो उन्होंने घुड़सवारी को अपने करियर के तौर पर चुना था.
घुड़सवारी में राजकुमारी हया ने साल 2000 के ओलंपिक खेलों में जॉर्डन का प्रतिनिधित्व भी किया था, वो उस ओलंपिक खेलों में अपने देश की ध्वजवाहक भी थीं.

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10 अप्रैल 2004 को राजकुमारी हया ने दुबई के शासक और संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख़ मोहम्मद के साथ निकाह किया. दोनों के बीच क़रीब 25 साल उम्र का फ़ासला है. हया 45 साल की हैं और शेख़ मोहम्मद 70 साल के.
राजकुमारी हया उनकी सबसे छोटी और छठीं पत्नी हैं. इन दोनों के दो बच्चे हैं. एक सात साल का और एक 11 का.
शादी के बाद राजकुमारी हया ने कई बार शेख़ मोहम्मद के साथ अपने रिश्तों के बारे में बताया कि वो बहुत ख़ुश हैं. दोनों ने अपनी ख़ुशहाल ज़िंदगी को दर्शाने वाली पेंटिंग भी बनवाई.
अमीरात वुमेन मैगज़ीन के 2016 के अंक में राजकुमारी हया ने शेख़ मोहम्मद के बारे में कहा था, ''वो जो कुछ भी करते हैं तो अद्भुत होता है. मैं हर रोज़ ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करती हूं कि मैं उनके इतना क़रीब हूं.''
इसी मैगज़ीन में राजकुमारी हया और शेख़ मोहम्मद को एक परफ़ेक्ट जोड़े को तौर पर पेश करते हुए भी आर्टिकल प्रकाशित किया गया था.

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क्यों आई रिश्ते में दरार?
पिछले साल जब शेख़ मोहम्मद की एक बेटी शेख़ा लतीफ़ा ने देश से भागने की कोशिश की तो राजकुमारी हया और शेख़ मोहम्मद के बीच भी दरार पैदा हो गई.
दुनिया भर में एक वीडियो फैल गया था जिसमें 33 साल की राजकुमारी शेख़ लतीफ़ा दावा कर रही थीं कि उनके परिवार में किसी को आज़ादी से अपनी पसंद चुनने का अधिकार नहीं है.
मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि शेख़ लतीफ़ा समुद्र के रास्ते संयुक्त अरब अमीरात से भागने में कामयाब रहीं. इसमें उनकी मदद फ़्रांस के एक आदमी ने की. लेकिन भारत की समुद्री सीमा के पास सेना के लोगों ने उन्हें रोक लिया और दोबारा दुबई भेज दिया.
दिसंबर में उनकी कुछ तस्वीरें जारी हुईं जिसमें वो अमीरात में आयरलैंड के पूर्व राष्ट्रपति मैरी रोबिनसन के साथ बैठी हुई दिख रही थीं.
उस समय दुबई के प्रशासन ने कहा था कि घर छोड़कर भागी शेख़ लतीफ़ा दूसरे देश में उत्पीड़न की शिकार हो सकती थीं और अब वो दुबई में सुरक्षित हैं.

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बताया जाता है कि इस घटना के बाद राजकुमारी हया को इस संबंध में कई नई बातें पता चलीं और उनके पति ने उन पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया.
राजकुमारी हया के क़रीबी सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद शेख़ लतीफ़ा पर भी दबाव पड़ने लगा था. राजकुमारी हया ब्रिटेन पहुंचने से पहले जर्मनी भी गई थीं.
राजकुमारी हया के क़रीबियों का कहना है कि अपने पति को छोड़कर जाने के बाद से उन्हें अपनी जान का डर है.

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एक बड़ी शर्मिंदगी
कोर्ट का ये फ़ैसला और शेख़ मोहम्मद को ज़िम्मेदार ठहराना निश्चित तौर पर शेख़ मोहम्मद के लिए व्यक्तिगत शर्मिंदगी है. ऐसे में इस बात पर ज़्यादा ताज्जुब नहीं होता है कि उनकी क़ानूनी सलाहकारों की टीम ने इस मामले को पब्लिक डोमेन में ना आने देने के लिए इतनी कोशिश क्यों की.
शेख़ मोहम्मद के ब्रिटेन के साथ गहरे रिश्ते रहे हैं. वह ब्रिटेन की मशहूर सैन्य अकादमी सैंडहर्स्ट से स्नातक हैं. महारानी एलिज़ाबेथ की तरह ही उन्हें भी घोड़ों से प्यार है और ब्रिटेन के घुड़सवार उद्योग की वह ताक़तवर शख़्सियत हैं.
उनके और उनके परिवार की ब्रिटेन में कई संपत्तियां हैं. उनके नेतृत्व के दौरान ही दुबई एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र और पर्यटन स्थल बना.
लेकिन लंदन में चली इस क़ानूनी रस्साकशी के बीच उन्हें अपने घर दुबई में राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है.
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