'मैंने अपनी मां से शादी क्यों की?'

ये दो महिलाओं की असाधारण प्रेम काहनी है. फीलीस को उनकी लेस्बियन पार्टनर लीलियान ने गोद ले लिया था ताकि परिवार एक साथ बना रहे. लेकिन ये दो महिलाओं के बीच रोमांस की इस कहानी में आने वाले कई मोड़ में से एक था.

1971 में, महिला मुक्ति आंदोलन के शुरुआती सालों में, कैलिफ़ोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर लीलियान फ़ेडरमैन ने सेंटर की अकादमिक निदेशक फीलीस इर्विन से संपर्क किया.

शुरुआती बातचीत एक नए शिक्षा कार्यक्रम शुरू करने को लेकर हुई. लेकिन ये अगली आधी सदी तक चलने वाली प्रेम कहानी की शुरुआत भी थी. इसमें कई जटिल मोड़ आने वाले थे.

जब लीलियान और फीलीस मिलीं थीं तब कैलिफ़ोर्निया समेत अमरीका के सभी प्रांतों में एलजीबीटीक्यू समुदाय से भेदभाव करने वाले क़ानून थे. कैलिफ़ोर्निया ने साल 1975 में समलैंगिक संबंधों को अनुमति देने वाला क़ानून पारित किया था. अगले साल ही ये लागू भी हो गया था.

लीलियान ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के कार्यक्रम आउटलुक को बताया, "हमें देश के हर हिस्से में अपराधी ही माना जाता था. ज़्यादा लेस्बियन छुपकर रहते थे."

बावजूद इसके वो परिवार को बनाने का सपना देखती थीं.

इन दोनों महिलाओं ने क़ानूनी विडम्बना का अनोखा समाधान निकाला. उस समय पचास साल के आसपास की रहीं फीलीस ने तीस साल के आसपास की रही अपनी पार्टनर को गोद लेकर अपनी बेटी बना लिया.

और फिर बेहद असाधारण स्थिति पैदा हो गई.

साल 2008 में जब कैलिफ़ोर्निया ने समलैंगिक विवाह को अनुमति दी तो लीलियान और फीलीस ने शादी कर ली और मां बेटी जीवनसाथी बन गईं.

लीलियान हंसते हुए कहती हैं, "मुझे लगता है कि पूरी दुनिया में किसी भी दंपती के मुक़ाबले हमारे बीच क़ानूनन रिश्ते ज़्यादा होंगे."

अलग शुरुआत

जब दोनों ने रोमांस करना शुरू किया था तब वो खुले तौर पर समलैंगिक नहीं थीं.

फीलीस कहती हैं, "उस वक़्त हम जानते थे कि हमें ख़ामोश रहना है और अपनी ज़िंदगी जीनी है."

लेकिन जल्द ही यूनिवर्सिटी के सहकर्मियों को पता चल गया कि दोनों के बीच कुछ चल रहा है.

फ़ेडरमैन कहती हैं, "वो हमें फ़ीलियन एंड लीलीस कहते थे क्योंकि हम हमेशा साथ दिखती थीं."

"जब मैंने महिलाओं में समलैंगिकता के इतिहास पर किताबें लिखनी शुरू कीं तो सबको पता चल गया कि हम साथ-साथ हैं."

मातृत्व

1974 में दोनों ने तय किया कि वो बच्चा पैदा करेंगी. लीलियान फर्टीलिटी क्लीनिक गईं.

उस दौर में कृत्रिम गर्भाधारण कराना असामान्य बात थी. ख़ासकर सिंगल मानी जाने वाली महिलाओं के लिए.

लेकिन लीलियान ने डॉक्टर को अपनी मदद करने के लिए मना ही लिया.

वो उस वक़्त को याद करते हुए कहती हैं, "डॉक्टर ने मुझसे पूछा था कि अगर मैं बच्चा चाहती हूं तो फिर शादी क्यों नहीं कर रही."

मैंने जवाब दिया, "मैं 34 साल की हूं, डॉक्ट्रेट की डिग्री है और यूनिवर्सिटी में अकादमिक मामलों की उपाध्यक्ष हूं. बहुत से पुरुषों को मेरे इस रुतबे से दिक्क़त हो सकती है."

इसके बाद डॉक्टर ने कृत्रिम गर्भाधारण करवाया जो कामयाब रहा.

तीन लोगों का परिवार

1975 में लीलियान ने एक बेटे को जन्म दिया. जिसका नाम एवरोम रखा गया. ये दंपती का अकेला बच्चा है.

जल्द ही उन्हें अपने रिश्ते की क़ानूनी सीमाओं का अंदाज़ा हो गया.

लीलियान कहती हैं, "हम इस बात को लेकर चिंतित थे कि हमारे बीच कोई क़ानूनी रिश्ता नहीं है."

"सबसे ज़्यादा चिंता की बात ये थी कि अगर एवरोम बीमार पड़ जाए और फीलीस को उसे डॉक्टर के पास ले जाना पड़े तो वो क़ानूनी तौर पर उसकी अभिभावक नहीं थीं."

लीलियान कहती हैं, "इससे भी बड़ी चिंता की बात ये थी कि अगर मुझे कुछ हो जाए तो उनका बच्चे पर कोई क़ानूनी अधिकार नहीं था."

उस दौर में समलैंगिक दंपतियों के पास गोद लेने या कृत्रिम गर्भाधारण कराने का अधिकार भी नहीं था.

मां और बेटी

फिर उन्होंने कैलिफ़ोर्निया के उस क़ानून का फ़ायदा उठाया जिसके तहत उम्र में दस वर्ष का अंतराल होने पर एक वयस्क दूसरे वयस्क को गोद ले सकता था.

और फिर फीलीस क़ानूनी तौर पर एवरोम की दादी बन गईं.

दोनों ने ये फ़ैसला लेने में कोई देर नहीं की थी.

फीलीस कहती हैं, "मैंने इसे एवरोम के साथ क़ानूनी रिश्ता स्थापित करने के रास्ते के तौर पर देखा था."

बीबीसी को दिए साक्षात्कार में वो हंसते हुए कहती हैं, "हम दोनों के बीच का रिश्ता व्यभिचार था."

लीलियान चीज़ों को और गंभीरता से समझाते हुए कहती हैं, "हमने कभी भी इसे अजीब नहीं माना क्योंकि हमने कभी भी एक दूसरे को मां-बेटी की तरह नहीं देखा. हमने ऐसा क़ानून का फ़ायदा उठाने के लिए किया था."

मामा फीलीस

लेकिन दोनों महिलाओं ने इस काल्पनिक रिश्ते का इस्तेमाल क़ानूनी ज़रूरतों से भी आगे बढ़कर किया.

लीलियन कहती हैं, "एवरोम जिस दौर में पैदा हुए थे उस समय ऐसे बहुत से बच्चे नहीं थे जो समलैंगिक परिजनों की संतान हों, लेकिन वो फीलीस को अपनी दादी का परिचय अपनी दादी के रूप में सहजता से दे सकते थे."

"ऐसा करना एवरोम के लिए आसान था लेकिन वो अच्छी तरह जानता था कि फीलीस उसकी दूसरी मां हैं."

वो हमेशा ही उन्हें मामा फीलीस कहते थे. एवरोम अब पैंतालीस साल के हैं और अब भी फीलीस को यही कहते हैं.

साल 2008 में जब कैलिफ़ोर्निया ने समलैंगिक शादियों को अनुमति दी, लीलियान और फीलीस ने क़ानून पारित होने के अगले दिन ही शादी कर ली.

लेकिन उन्होंने गोद लिए जाने को क़ानूनी तौर पर रद्द नहीं किया था और वो मां-बेटी के साथ ही दंपती भी बन गईं.

लीलियान कहती हैं, "हमारे लिए गोद लिया जाना सिर्फ़ काग़ज़ी कार्रवाई थी इसलिए हमने इस बारे में बहुत ज़्यादा नहीं सोचा."

और फिर हुई हैरानी

लेकिन, बाद में उन्हें पता चला कि गोद लेने की कार्रवाई को रद्द न करने की वजह से उनका विवाह क़ानूनन नहीं हो पाया था.

और अगर गोद लिए जाने को रद्द किए बिना वो कई अन्य अमरीकी प्रांतों में जाती हैं तो उन पर क़ानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.

और जब साल 2015 में अमरीका के सभी प्रांतों में समलैंगिक विवाहों को मंज़ूरी मिल गई तो एक वकील ने उन्हें गोद लिए जाने को क़ानूनी तौर पर रद्द करने और फिर दोबारा शादी करने की सलाह दी.

उन दोनों ने ऐसा ही किया. और इसके बाद उनके बेटे एवरोम ने भी अपनी इच्छा प्रकट की.

जब फीलीस ने उनसे संबंध ख़त्म कर लिया तो उन्हें लगा कि वो क़ानूनी तौर पर उनके बेटे नहीं रह गए हैं. एवरोम ने फीलीस से कहा कि वो उन्हें बेटे के रूप में गोद ले लें.

फिर से गोद लिए गए एवरोम

जब एवरोम को फीलीस ने क़ानूनी तौर पर गोद लिया तो वो इस परिवार के लिए ख़ूबसूरत पल था जिसमें एवरोम अपनी पत्नी और बेटे के साथ शामिल हुए.

वो कहते हैं, "ये बेहद ख़ास था, कि वो बेटा जिसे मैंने बचपन से पाला था, जिसे मैंने तब लोरियां सुनाई थी जब वो पेट में ही था, वो चाहता था कि मैं उसकी क़ानूनन मां बन जाऊं."

और अंततः कई क़ानूनी उतार चढ़ावों के बाद इस ख़ास परिवार को वो दर्जा मिल ही गया जिसे वो हमेशा से चाहते थे.

2003 में फ़ीडरमैन ने अपनी कहानी पर आत्मकथा लिखी थी. इसका नाम था 'नेकेड इन द प्रोमिस्ड लैंड'

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