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तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन के एक क़दम से यूरोप में खलबली
तुर्की और सीरिया के बीच संघर्ष तेज़ होने के बाद अब यूरोप में एक नया संकट उभरता नज़र आ रहा है.
तुर्की ने अपने यहां रह रहे सीरियाई शरणार्थियों के लिए यूरोप में दाख़िल होने के 'द्वार खोल दिए हैं.' इस कारण तुर्की के पड़ोसी देश और यूरोपीय संघ के 'प्रवेश द्वार' ग्रीस को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
ग्रीक सरकार ने कहा है कि उसने अपने यहां शरण देने के लिए आवेदन देना बंद कर दिया है और ग़ैर-क़ानूनी ढंग से प्रवेश करने वालों से सख़्ती से निपटा जाएगा.
पिछले 24 घंटों में ग्रीस ने 10 हज़ार के लगभग प्रवासियों अपने यहां आने से रोका है. इस दौरान प्रवासियों ने ग्रीक बॉर्डर गार्ड पर पथराव किया. बॉर्डर गार्ड को आंसू गैस इस्तेमाल करने पड़ी.
अब यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष ग्रीस की तुर्की के साथ लगती सीमा का मुआयना करने वाले हैं.
तुर्की में इस समय 37 लाख के क़रीब शरणार्थी हैं. अब वो इन्हें यूरोप की ओर जाने दे रहा है. तुर्की ने यह फ़ैसला इदलिब प्रांत में सीरियाई हवाई हमले में अपने 33 सैनिकों की मौत के बाद लिया था.
क्या है मामला
सीरिया के साथ तुर्की की लंबी सीमा लगती है. गृहयुद्ध से जूझ रहे सीरिया से विस्थापित लोगों ने बड़ी संख्या में तुर्की में शरण ली है. इस समय तुर्की में 37 लाख सीरियाई शरणार्थी हैं. इसके अलावा अफ़ग़ानिस्तान और अन्य जगहों से आए प्रवासी भी बड़ी संख्या में हैं.
यूरोपीय संघ के साथ 2016 में हुए समझौते के तहत तुर्की ने इन्हें यूरोप में दाख़िल होने से रोका हुआ था. मगर अर्दोआन का आरोप है कि यूरोपीय संघ ने इस समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया है. समय-समय पर अर्दोआन इन इस मामले पर यूरोपीय संघ पर दबाव बनाते रहे हैं.
अब, इदलिब में अपने सैनिकों की मौत के बाद राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा था कि तुर्की के 'दरवाज़े खोलने' के बाद सीमा से 18,000 प्रवासी यूरोप में गए हैं. उनका कहना था कि आने वाले दिनों में यह संख्या 25,000 से 30,000 हो सकती है.
तुर्की के इस फ़ैसले के कारण उसके पड़ोसी देश और यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा वाले देश ग्रीस को मुश्किलें आना शुरू हो गई हैं. ग्रीक प्रधानमंत्री ने कहा है कि सीमा पर सुरक्षा को बेहद कड़ी कर दी गई है. उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीस ने अगले महीने के लिए शरण के आवेदन लेना बंद कर दिया है.
प्रधानमंत्री ने एलान किया कि ग्रीस ने यूरोपीय संघ समझौते के एक आपातकालीन प्रावधान को लागू किया है. उन्होंने कहा, "ग्रीस की सीमाएं यूरोप की बाहरी सीमाएं हैं. हम उनकी रक्षा करेंगे. एक बार फिर कहता हूं, ग्रीस में ग़ैर-क़ानूनी ढंग से प्रवेश की कोशिश न करें, आपको लौटा दिया जाएगा."
ग्रीक सरकार ने 24 घंटों में 10 हज़ार प्रवासियों को अपने यहां आने से रोकने का दावा किया है. उसका कहना है कि कम से कम 500 लोगों ने नावों के ज़रिए उसके अलग-अलग द्वीपों पर पहुंचने की कोशिश भी की थी.
ग्रीस ने आरोप लगाया है कि तुर्की इन प्रवासियों को यूरोप में घुसने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. यहां के उप-रक्षामंत्री एल्किवियादिस ने कहा, "न सिर्फ़ वे उन्हें रोक नहीं रहे बल्कि उनकी मदद भी कर रहे हैं."
ग्रीस के प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर लिखा है कि वह मंगलवार को यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल के साथ तुर्की के साथ लगती सीमा का मुआयना करेंगे.
यूरोपीय संघ ने कहा है कि वह अपने नियमों के अनुसार, ग्रीस और बुल्गारिया की मदद कर रहा है. बुल्गारिया की सीमा भी तुर्की के साथ लगती है.
सीरिया में तनाव बढ़ा
उधर, तुर्की ने उत्तरी सीरिया में अपना सैन्य अभियान तेज़ करते हुए रविवार को सीरिया के दो लड़ाकू विमानों को मार गिराया.
दोनों विमानों के पायलट पैराशूट के ज़रिए इदलिब प्रांत में सुरक्षित उतरने में सफल रहे. इस इलाक़े में तुर्की के सैनिकों और विद्रोहियों का सीरिया सरकार के बलों के साथ संघर्ष चल रहा है.
तुर्की ने ये दावा भी किया है कि उसने सीरिया के एयर डिफ़ेंस सिस्टमों और दर्जनों टैंकों को भी निशाना बनाया है.
इदलिब प्रांत में पिछले हफ़्ते एक हवाई हमले में तुर्की के 33 सैनिकों की मौत हो गई थी. इस कारण तुर्की और सीरिया के मुख्य सैन्य सहयोगी रूस से तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई थी.
मगर रविवार को तुर्की के विदेश मंत्री हुलुसू अकार ने कहा कि उनका देश रूस के साथ किसी तरह का संघर्ष नहीं चाहता. टीवी पर प्रसारित बयान में उन्होंने कहा, "हम रूस से उम्मीद करते हैं कि वो सीरिया की ओर से हो रहे हमलों को रोकेगा. हमारा रूस के साथ उलझने का कोई इरादा नहीं है."
अकार ने यह भी कहा कि 'स्प्रिंग शील्ड' नाम के ऑपरेशन के तहत सीरिया का एक ड्रोन, आठ हेलिकॉप्टर, 103 टैंक, कई सारे रॉकेट लॉन्चर और अन्य सैन्य उपकरण नष्ट किए गए.
उन्होंने कहा कि सीरियाई बलों के 2,212 सदस्य न्यूट्रलाइज़ किए गए. न्यूट्रलाइज़ का मतलब मारना, घायल करना या पकड़ना होता है.
मगर सीरिया में मौजूद ब्रितानी पर्यवेक्षक 'सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फ़ॉर ह्यूमन राइट्स' का कहना है कि 27 फ़रवरी के बाद अब तक 74 सरकारी सैनिक और सरकार समर्थक लड़ाके मारे गए हैं.
उत्तरी सीरिया में सीरियाई सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान का रूस पूरी तरह समर्थन करता है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने यहां युद्धविराम की अपील की थी मगर रूस ने इसे ख़ारिज करते हुए कहा था कि जब तक इस इलाक़े से 'आतंकवादियों' को ख़त्म नहीं किया जाता,तब तक समस्या का हल नहीं होगा.
शुक्रवार को तुर्की और रूस के राष्ट्रपतियों की फ़ोन पर बात हुई थी और दोनों ने हालात को सामान्य करने के लिए अतिरिक्त क़दम उठाने जाने की ज़रूरत बताई थी.
सीरिया में क्यों है तुर्की का दख़ल
सीरियाई सरकार इदलिब प्रांत को जिहादी और तुर्की समर्थित विद्रोही धड़ों से वापस अपने नियंत्रण में लेना चाहती है. इदलिब सीरिया का इकलौता ऐसा प्रांत बचा है जहां पर सीरियाई विद्रोही काफ़ी प्रभावी स्थिति में हैं.
सीरियाई सरकार पर अपने अभियानों के दौरान आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगता रहा है. सीरियाई सरकार कहती है कि वह इदलिब को 'आतंकवाद' से मुक्त करवाने का अभियान चला रही है.
सीरियाई सरकार की कार्रवाई के कारण इस इलाक़े से लगभग 10 लाख लोग विस्थापित हुए हैं और तुर्की के सीमावर्ती इलाक़ों में चले गए हैं. तुर्की का कहना है कि वह पहले से ही लाखों शरणार्थियों को अपने यहां रख रहा है और उसके पास और के लिए जगह नहीं है.
तुर्की सीरियाई सरकार के ख़िलाफ़ लड़ रहे धड़ों का समर्थन करता है क्योंकि वह नहीं चाहता कि उसकी सीमा के साथ लगते इलाक़े में सीरियाई कुर्द समुदाय का प्रभाव बढ़े.
उसे डर है कि ऐसा हुआ तो तुर्की में रह रहे कुर्दों में अलगाववाद बढ़ेगा. इस कारण सीमावर्ती इलाक़े में सेफ़ ज़ोन बनाने के इरादे से उन्होंने हवाई हमले भी किए थे. तुर्की चाहता है कि इस इलाक़े में सीरियाई शरणार्थियों को बसाया जाए.
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