डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर पाकिस्तानी मीडिया में क्या चल रहा है?

    • Author, हारून रशीद
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए, इस्लामाबाद से

पाकिस्तानी मीडिया चाहे सरकारी हो या प्राइवेट, कभी कोई अच्छी ख़बर सुनने या देखने को नहीं मिलती. यहां सरकारी ख़्वाहिश के मुताबिक़ ही इस पर अघोषित पाबंदी है. इस समय भी ट्विटर पर "india hiding crono virus" ट्रेंड कर रहा है. #TrumpinIndia का ट्रेंड इसके बाद आ रहा है.

ट्विटर ट्रोल ये समाचार फैला रहे हैं कि भारत कोरोना वायरस को छुपा रहा है, और उसने इसकी ख़बरों पर पाबंदी लगा रखी है. एक शख़्स शफ़ीक़ चौधरी ने तो इसे सीधे-सीधे धार्मिक रंग देते हुए कहा कि "कोरोना प्रभावितों को ग़ैर-हिंदू जगहों पर रखा जा रहा है."

ऐसा मालूम होता है कि पाकिस्तान में कुछ लोग कम-से-कम सोशल मीडिया की हद तक अमरीकी प्रेसिडेंट के दौरे को कोरोना से मार देना चाह रहे हैं. पाकिस्तान में आजकल वैसे भी पीएसएल का बुख़ार चढ़ा हुआ है तो सियासत पर कम ही तवज्जो दी जा रही है. वैसे ट्रंप के अफ़ग़ानिस्तान के दौरे भी पाकिस्तान में कभी ज़्यादा कवरेज हासिल नहीं कर सके.

ट्रंप के भारत के दौरे को यहां एक ही आदत और सोच के शख्सियत के दौरे के तौर पर देखा जा रहा है. सानिया सईद ने लिखा कि अगर 'मोदी एक मांस खाने वाले को गले लगा सकते हैं तो आप क्यों नहीं?'

एक और ने ट्रंप और उनकी बेटी इवांका के साथ तस्वीर को लेकर लिखा कि 'अगर मफ़लर और मूंछों वाला कोई व्यक्ति हाथ मिलाने आता है तो अपना हैंड सैनिटाइज़र तैयार रखें.'

सरकारी स्तर पर तो बात हो रही है कि ट्रंप को भारत में क्या करना चाहिए, लेकिन इस दौरे की अहमियत या पाकिस्तान के लिए इसके महत्व पर बात नहीं हो रही.

पाकिस्तान की उम्मीद ट्रंप कश्मीर का मुद्दा उठाएंगे

पीटीवी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के संयुक्त राष्ट्र में तक़रीर को इस वक़्त भी चला रहा है जिसमें इमरान भारत के साथ परमाणु युद्ध के ख़तरे से दुनिया को डरा रहे हैं. इमरान ख़ान का आख़िरी ट्वीट भी भारत प्रशासित कश्मीर की महिलाओं के बारे में हैं लेकिन इससे पहले पाकिस्तान ने इस उम्मीद का इज़हार किया था कि ट्रंप भारत में कश्मीर का मुद्दा उठाएंगे. पाकिस्तान के विदेशी मंत्रालय की प्रवक्ता आयशा फ़ारूक़ी ने एक ब्रिफ़िग में ये कहा.

ये बात अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कही थी, जिसे पाकिस्तान में काफ़ी कवरेज मिली. तमाम मीडिया ने इसे हेडलाइन बनाया. पाकिस्तान अगर ट्रंप के दौरे से कुछ चाहता है तो वो यही है कि ट्रंप कश्मीर का मुद्दा ज़बरदस्त अंदाज़ में उठाएं.

ये बात इमरान ख़ान ट्रंप से तीन मुलाक़ातों में कर चुके हैं और पाकिस्तान का तमाम ज़ोर इसी पर है. पाकिस्तान समझता है कि अमरीका का दबाव ही भारत को दोबारा बातचीत करने पर मजबूर कर सकता है. और कोई दूसरा हल पाकिस्तान को दिखाई नहीं देता. इस वक्त भारत की अर्थव्यवस्था मुश्किल में है इसलिए शायद मोदी के लिए ट्रंप की बात से इनकार करना मुश्किल हो सकता है. यहां सब लोग समझते हैं कि ट्रंप कितना दबाव डालेंगे ये सबसे अहम है.

ट्रंप के दौरे के बाद क्या होगी भारत-पाक बातचीत?

ज़ाहिर है इसी साल अमरीका में चुनाव हैं जिसकी वजह से ट्रंप को बड़ी उपलब्धियां चाहिए. वो अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के साथ शांति समझौते को भी अपने चुनाव में भुनाना चाहेंगे. हालांकि ये बात इस पर निर्भर करती है कि अफ़ग़ानिस्तान शांति समझौता जिसमें पाकिस्तान ने भी अमरीका की मदद की है, कब तक चल पाता है.

क्या अफ़ग़ानिस्तान में 29 फ़रवरी के बात मुकम्मल तौर पर अमन आ जाएगा? कुछ कहना मुश्किल है. अगर भारत, पाकिस्तान से बातचीत के लिए तैयार होता है तो यह ट्रंप विदेश नीति की दूसरी बड़ी कामयाबी होगी.

मशहूर अमरीकी बुद्धिजीवी नॉम चॉम्स्की कहते हैं कि ट्रंप की नज़र नोबेल पुरस्कार पर है. तो क्या मोदी ट्रंप की इस सिलसिले में मदद करेंगे? पाकिस्तान यही देखने की कोशिश कर रहा है. लेकिन पाकिस्तान को एक बड़ी चिंता ये है कि कहीं ट्रंप के दौरे से कश्मीर पर उसके ख़िलाफ़ उठने वाली आलोचना की आवाज़ें कमज़ोर न पड़ जाएं?

पाकिस्तान की कोशिशों से अमरीकी सिनेटर लिंडसी ग्राहम ने तीन दूसरे सिनेटरों के साथ मिलकर बीते दिनों विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को ख़त लिखा कि वो भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघनों का संज्ञान लें. लेकिन ट्रंप की ओर से कश्मीर पर बात न करने से पाकिस्तान और इन सिनेटरों की कोशिशें बेकार साबित होंगी.

भारत इस दौरे के ज़रिए दुनिया को अपने तरीक़े और अहमदाबाद स्टेडियम जैसे मंसूबे शो-केस करना चाहता है हालांकि पाकिस्तानी मीडिया में इस पर कोई ख़ास कवरेज नहीं है.

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