इमरान ख़ान का कश्मीर पर मुस्लिम देश भी क्यों साथ नहीं दे रहे?

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- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
इमरान ख़ान लगातार इस बात पर शोक मना रहे हैं कि 'मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी यानी ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन ने कश्मीर मुद्दे पर उनका साथ नहीं दिया.'
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने यह बात मलेशिया में इसी हफ़्ते मंगलवार को कही. इमरान एक मलेशियाई थिंक-टैंक प्रोग्राम में बोल रहे थे.
इस प्रोग्राम के एक सत्र में उन्होंने कहा, ''मैं नहीं चाहता कि मुसलमान आपस में ही लड़ें. मैं चाहता हूँ कि बाक़ी समुदायों की तरह मुसलमान भी अपने हितों की रक्षा एकजुट होकर करें. दुनिया भर में मुसलमानों की आबादी 1.3 अरब है लेकिन आज की तारीख़ में सबसे ज़्यादा पीड़ित मुसलमान ही हैं. लीबिया, सोमालिया, सीरिया, इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में मुसलमान आपस में ही लड़ रहे हैं. हम ओआईसी की मीटिंग में कश्मीर पर भी एकजुटता नहीं दिखा पाए.''
इमरान ख़ान ने कहा कि 'कश्मीर और म्यांमार पर मुसलमानों को एक साथ आना चाहिए.' पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि 'कश्मीर और म्यांमार में मुसलमानों को धर्म के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है.'
तीन फ़रवरी को दो दिवसीय दौरे पर मलेशिया गए इमरान ख़ान कुआलालंपुर में इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड इस्लामिक स्टडीज़ के एक सत्र को संबोधित कर रहे थे.
इस संबोधन में उन्होंने कहा, ''1.2 करोड़ यहूदियों के ख़िलाफ़ पश्चिम के देश एक शब्द भी नहीं बोलते. ऐसा इसलिए है क्योंकि यहूदी एकजुट, मज़बूत और प्रभावी हैं. सऊदी और ईरान दोनों इस्लामिक देश हैं लेकिन दोनों के बीच तनाव चरम पर रहता है. पाकिस्तान ने इस तनाव को कम करने में सकारात्मक भूमिका अदा की है.''

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इमरान का 'शोकगीत'
इमरान ख़ान ने मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद की तारीफ़ करते हुए कहा कि उन्होंने कश्मीर पर भारत के ख़िलाफ़ खुलकर बोला.
इमरान ने कहा कि 'भारत ने पाम तेल का आयात बंद करने की धमकी दी फिर भी महातिर मोहम्मद नहीं झुके.'
वे बोले, ''एक नेता है जो सिस्टम और विचारधारा में भरोसा रखता है और ऐसे ही नेता हैं महातिर मोहम्मद.''
हालांकि इमरान ख़ान के इतना कुछ कहने के बाद भी इसका असर होता नहीं दिख रहा है.
पाकिस्तानी अख़बार डॉन के अनुसार 'सऊदी अरब ने कश्मीर पर ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक को लेकर अनिच्छा जताई है. पाकिस्तान ने इस पर तत्काल बैठक की माँग की थी.'
अख़बार ने लिखा है कि 'पाकिस्तान अब ओआईसी को लेकर ख़ुद को असहज पा रहा है.'
ओआईसी के मंच पर 57 इस्लामिल देश हैं. इसे संयुक्त राष्ट्र संघ के बाद सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मंच कहा जाता है.
पाकिस्तान माँग कर रहा है कि ओआईसी कश्मीर पर भारत के ख़िलाफ़ खुलकर सामने आए.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी लगातार माँग कर रहे हैं कि ओआईसी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक बुलाए और भारत के ख़िलाफ़ कोई प्रस्ताव पास करे.
डॉन अख़बार का कहना है कि 'जब तक सऊदी अरब तैयार नहीं हो जाता, तब तक कश्मीर पर किसी भी तरह की बैठक संभव नहीं है. 57 देशों वाले इस संगठन के तीन अहम देश ही कश्मीर पर भारत के ख़िलाफ़ खुलकर सामने आए हैं. ये हैं- मलेशिया, ईरान और तुर्की.'

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सऊदी भी साथ क्यों नहीं?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को सऊदी अरब ने मलेशिया में 19 दिसंबर को आयोजित इस्लामिक समिट में जाने से रोक दिया था.
इमरान ख़ान ने इस समिट में जाने की हामी भर दी थी फिर भी उन्होंने सऊदी की बात मान ली थी.
पाकिस्तान का कहना था कि 'सऊदी अरब को लगता है कि कुआलालंपुर में इस्लामिक समिट से मुस्लिम दुनिया और विभाजित होगी.' सऊदी को ये भी लगता था कि इस समिट से उसके दबदबे वाला ओआईसी कमज़ोर होगा.
पाकिस्तान में इमरान ख़ान के सऊदी के दबाव में झुकने की ख़ूब आलोचना हुई. इसी बीच सऊदी के विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान इस्लामाबाद आए थे और उन्होंने पाकिस्तान को कश्मीर पर आश्वस्त भी किया था.
पाकिस्तानी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक़ 'सऊदी के विदेश मंत्री ने इसी दौरे में मलेशिया नहीं जाने के एवज में कश्मीर पर ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक की बात कही थी.'
सऊदी के विदेश मंत्री की इस दौरे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी से मुलाक़ात हुई थी.
जब अमरीका ने इराक़ में ईरानी सैन्य कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी को मारा तो सऊदी और ईरान में तनाव बढ़ गए थे.
इसी तनाव को देखते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी सऊदी और ईरान के दौरे पर गए थे.

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ओआईसी की इच्छा?
इस दौरे में भी क़ुरैशी ने सऊदी अरब में कश्मीर पर ओआईसी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की माँग की थी लेकिन कोई सकारात्मक रुख़ नहीं दिखा था.
सऊदी से लौटने के बाद क़ुरैशी ने कहा था कि 'पाकिस्तान को उम्मीद है कि सऊदी निराश नहीं करेगा.'
जेद्दा में रविवार यानी नौ फ़रवरी को ओआईसी के विदेश मंत्रियों की काउसिंल की 47वीं बैठक होने वाली है.
उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक के प्रस्ताव में अगले एजेंडा के तौर पर कश्मीर को शामिल किया जा सकता है लेकिन ख़ास तौर पर कश्मीर को लेकर किसी बैठक पर सहमति अब तक नहीं बन पाई है.
इमरान ख़ान के बार-बार मुस्लिम देशों के एक होने की बात पर डॉन ने एक संपादकीय लिखा है. डॉन ने लिखा है कि 'जब इमरान ख़ान बार-बार एक मुस्लिम आवाज़ नहीं होने का शोकगीत गाते हैं तो लगता है कि इस पर एक गंभीर विश्लेषण होना चाहिए.'
डॉन ने अपनी संपादकीय में लिखा है, ''हम मुस्लिम दुनिया में एकता की बात तब कर रहे हैं जब आपस में ही इस्लामिक देश युद्ध कर रहे हैं. सीरिया, यमन और लीबिया में मुसलमान एक दूसरे के ख़ून के प्यासे हैं. इन देशों में हज़ारों लोग मारे गए हैं. घायलों और बेघरों की कोई गिनती नहीं है. इस त्रासदी में कुछ ग़ैर-मुस्लिम मुल्क भी हैं लेकिन इनकी भूमिका सीमित है. इन तीनों देशों में लड़ने वाले मुसलमान ही हैं. यमन में दो बड़े मुस्लिम देश सऊदी अरब और ईरान पिछले चार सालों से लड़ रहे हैं.''

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आपस में ही लड़ रहे मुसलमान
डॉन ने लिखा है, ''हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के मध्य-पूर्व के शांति योजना पर जेद्दा में ओआईसी की बैठक हुई तो इसमें ईरानी प्रतिनिधिमंडल को आने से रोक दिया गया. भारत ने पिछले साल पाँच अगस्त को कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किया तो मलेशिया और तुर्की के अलावा कोई मुस्लिम देश खुलकर सामने नहीं आया. खाड़ी के एक देश ने तो कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है. यहां तक कि पिछले साल यूएई में आयोजित ओआईसी की बैठक में भारत के विदेश मंत्री को मेहमान के तौर पर बुलाया गया था. आज की तारीख़ में मुसलमानों की बड़ी आबादी औद्योगिकीकरण से पहले के वक़्त में रह रही है. दूसरी तरफ़ तीसरी दुनिया के ज़्यादातर देश अपने संसाधनों का इस्तेमाल अंतरिक्ष और डिज़िटल विकास में कर रहे हैं.''
डॉन ने लिखा है कि 'मुस्लिम देशों के पास बेशुमार पैसे हैं लेकिन ये साइंस और शिक्षा में निवेश नहीं कर रहे.'
इस संपादकीय में लिखा है, ''गिन-चुने मुसलमान हैं जिन्हें नोबेल सम्मान मिला है. दूसरी तरफ़ मामूली आबादी वाले यहूदियों को 200 के क़रीब नोबेल सम्मान मिले हैं. दुनिया की कुल आबादी में यहूदी मामूली हैं लेकिन अब तक मिले कुल नोबेल सम्मान में यहूदियों को 20 फ़ीसदी नोबेल मिले हैं. इसमें इसराइल को कुल 12 नोबेल सम्मान मिले हैं. अगर हम चाहते हैं कि मुस्लिम दुनिया से एक आवाज़ आए तो पहले अपने घरों को ठीक करना होगा.''
इमरान ख़ान से मलेशिया में पत्रकारों ने जब पूछा कि 'क्या वे अगले साल कुआलालंपुर के इस्लामिक समिट में आएंगे?' तो उन्होंने जवाब में हाँ कहा था.
शायद इमरान ख़ान ने सऊदी को संदेश देने की कोशिश की है कि अब वो कश्मीर को लेकर सऊकी के कहे पर भरोसा नहीं करेगा.

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