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यौन हिंसा की शिकायत की क्या क़ीमत चुकाती हैं औरतें
- Author, ईवा ओंटिवेरोस
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
ऐसा हो सकता है कि किसी औरत ने रेप की शिकायत की हो और उसके मामले में कार्रवाई भी हुई हो जिसके बाद उसे न्याय भी मिल गया हो, लेकिन ऐसे मामलों की भी कमी नहीं है जिनमें जब किसी औरत ने अपने साथ हुए रेप की शिकायत की तो उसकी ज़िंदगी हमेशा के लिए तबाह हो गई.
अगर आपको ये लगता है कि ऐसा सिर्फ़ भारत में होता है, तो ऐसा नहीं है.
चेतावनी : हो सकता है कि यह लेख आपको विचलित करे
क्या रेप की शिकायत करने के साथ ही औरत की ज़िंदगी बर्बाद हो जाती है? इस बात पर एकतरफ़ा कुछ भी नहीं कहा जा सकता. क्योंकि ये सच है कि कुछ औरतों को न्याय मिलता है लेकिन इस सच को भी नकारा नहीं जा सकता कि कुछ औरतों को अपनी बात रखने की भारी क़ीमत चुकानी पड़ती है.
बीते कुछ सालों में रेप से जुड़े मामलों को लेकर जागरुकता बढ़ी है. कई तो ऐसे मामलों भी सामने आए जिन पर यक़ीन करना मुश्किल होता है. प्रोड्यूसर हार्वे विंस्टन का मामला हो या फिर अभिनेता बिल कोस्बी का केस. इन हाई प्रोफ़ाइल मामलों ने रेप और यौन हिंसा जैसे मामलों को सुर्खियों में ला दिया है.
भारत में हुए गैंग रेप के मामलों और स्पेन में भी हुई ऐसी घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने व्यापक रूप से प्रकाशित किया.
#MeToo
इन सबका एक नतीजा ये हुआ कि #MeToo जैसे आंदोलन पूरी दुनिया में शुरू हो गए. द रेपिस्ट इज़ यू जैसे गाने पूरी दुनिया में छा गए.
लेकिन सिर्फ़ जागरुकता ही पर्याप्त नहीं है. पीड़ित को न्याय भी तो मिले- रेप पीड़ितों के लिए अभियान चलाने वालों का कहना है कि अपनी शिकायतें लेकर आने वाली महिलाओं की संख्या निश्चित तौर पर बढ़ी है लेकिन इससे किसी भी तरह रेप के मामले नहीं घटे हैं.
अकेले ब्रिटेन में साल 2019 के आंकड़े अपने निम्नतम स्तर पर रहे. इंग्लैंड और वेल्स में पुलिस द्वारा दर्ज किए गए रेप केस के हर सौ मामलों में से सिर्फ़ तीन मामलों में ही अभियुक्तों को सज़ा मिली. जबकि दस साल पहले रेप के अभियुक्त को कोर्ट से सज़ा मिलना आज की तुलना में काफी आसान था.
साइप्रस का न्याय और शर्मिंदगी
इसी सप्ताह एक बेहद घबराई-परेशान ब्रिटिश किशोरी अपने घर लौटी. साइप्रस की क़ानूनी कार्रवाई के चलते यह किशोरी बीते छह महीने से हिरसात में थी.
" साइप्रस का न्याय- धिक्कार है! महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली कार्यकर्ताओं के लिए यह नारा बन गया. इन प्रदर्शनों में वो औरतें भी शामिल थीं जो इसरायल से थीं, वे कोर्ट के बाहर खड़ी होकर ये नारे बार-बार दोहरा रही थीं. "
वे उस किशोरी के समर्थन में खड़ी थीं जिसे रेप का झूठा आरोप लगाने को लेकर सज़ा सुनाई गई थी.
साइप्रस के सांसद कोउकोउमा ने बीबीसी से कहा "कुछ लोग कह सकते हैं कि यह राहत की ख़बर हो सकती है, उस लड़की के लिए भी."
"लेकिन इस सारे मामले की कार्रवाई और इस सामले को जिस तरह से आगे बढ़ाया गया वो बिल्कुल भी ठीक नहीं था. बहुत से सवाल थे जिनका जवाब मिलना बाकी था."
यह केस जुलाई 2019 का है. जब एक किशोरी ने पुलिस से कहा कि 12 इसरायली मर्द उसके कमरे में धमक पड़े. उस वक़्त वो उनके एक दोस्त के साथ आपसी सहमति से सेक्स कर रही थी. उसका कहना था कि वो कमरे में धमक पड़े और उन्होंने उसका रेप किया. उन मर्दों को गिरफ़्तार किया गया लेकिन गवाही की ज़रूरत नहीं समझी गई.
दावे पीछे रह गए
हालांकि उस किशोरी से घंटों तक पूछताछ की गई. और जिस वक़्त पुलिस उससे पूछताछ कर रही थी वहां उसके साथ कोई वक़ील नहीं था. और अंत में वो अपने ही किए दावों से पीछे हट गई.
सभी 12 इसरायली आज़ाद कर दिए गए और वे घर लौट गए लेकिन इस लड़की को जेल भेज दिया गया. उनकी मां का कहना था कि उनकी बेटी अपने साथ हुए रेप की शिकायत कराने बतौर पीड़ित गई थी लेकिन...
उनकी मां ने बीबीसी से कहा, "उससे एक दूसरा बयान दर्ज कराने को कहा गया और उसने बताया कि उसे इस झूठा बयान को देने के लिए मजबूर किया गया."
"उसने मुझे बताया कि जिस वक़्त ये सारा कुछ हो रहा था वो बुरी तरह से डर हुई थी."
"गिरफ़्तारी का डर"
'उन्होंने कहा कि वो उसे गिरफ़्तार कर लेंगे. उन्होंने कहा कि अगर उसने इस नए बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए तो वे उसके ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय वारंट लेकर आएंगे और उसे गिरफ़्तार कर लेंगे. और अगर वो उनके दिए बयान पर हस्ताक्षर कर देती है तो वे उसे जाने देंगे. और उस समय वो सिर्फ़ और सिर्फ़ वहां से निकलना चाहती थी."
उस किशोरी की वक़ील लेविस पावर क्यूसी ने बताया, "यह बेहद परेशान करने वाला और चिंता में डालने वाला था."
"वो क़रीब साढ़े चार हफ़्ते के लिए हिरासत में थी. वो एक ऐसी जेल में थी जहां पहले से ही आठ औरतें थीं. उसकी ज़मानत की शर्ते भी बेहद कठोर थीं. "
लेकिन अब वो आज़ाद है और अपने घर जा सकती है लेकिन उसका नाम पुलिस की लिस्ट में आ चुका है. उनकी मां का कहना है कि उनकी बेटी अब भी उस बुरे वक़्त के सदमे से बाहर नहीं आ सकी है. किशोरी का कहना है कि पुलिस ने उसे उसकी बात से पलटने के लिए मजबूर किया. उस पर झूठ बोलने के लिए दबाव डाला.
उनकी वक़ील का कहना है कि उनकी लीगल टीम यूरोपियन कोर्ट ऑफ़ ह्यूमन राइट्स जाने के लिए विचार कर रही है.
"यह केस अभी तक ख़त्म नहीं हुआ है."
लड़कियों की इज़्ज़त को दांव पर लगाने जैसा है ये
भले ही कोई रेप केस अमरीका में हुआ हो, स्पेन में हुआ हो, भारत में हुआ हो, साइप्रस में हुआ हो या फिर ब्रिटेन में, इस बात से इनक़ार नहीं किया जा सकता है कि रेप के मामले में महिला को ही सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है.
बहुत से मामलों में पीड़ित को लग सकता है कि अभियुक्त के बजाय पुलिस, मीडिया और न्याय व्यवस्था और लोगों द्वारा उन्हें ही कठघरे में खड़ा कर दिया गया है.
चैरिटी संस्था रेप क्राइसिस इंग्लैंड एंड वेल्स की प्रवक्ता कैटी रसेल का कहना है कि भले ही एक लंबी न्याय प्रक्रिया के बाद रेप पीड़िता को न्याय मिल भी जाए तो भी इस दौरान उनके साथ जिस तरह का व्यवहार होता है वो मनोबल तोड़ने के लिए काफी होता है.
"इन सबके पीछे लिंग भेद और गलत भावना निहित होती है. महिलाओं के लिए ऐसा मान लिया जाता है कि उनका उन्हीं के शरीर पर अधिकार नहीं है क्योंकि वो पुरुषों की तुलना में उतनी महत्वपूर्ण नहीं."
मेरे साथ भी बलात्कार हुआ
एक ओर जहां साइप्रस की रेप पीड़िता अपने घर लौट चुकी है वहीं बहुत सी औरतें हैं जिन्होंने ये स्वीकार किया है कि साइप्रस में उनके साथ भी बलात्कार हुआ.
उन्होंने माना कि उन्होंने अपने साथ हुए यौन दुर्व्यवहार की शिकायत नहीं दर्ज कराई. उन्होंने माना कि इसके पीछे एक ही वजह थी और वो था उनका डर. सोफ़ी(बदला हुआ नाम) छुट्टियां बिताने साइप्रस गई थीं. उन्होंने बीबीसी से कहा "जो हुआ, वह देखना बेहद दुखद था."
"मैं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही थी. वहां ऐसा लग रहा था कि वहां मौजूद मर्द मुझे उनकी मर्ज़ी से छूने के लिए आज़ाद हैं."
सोफ़ी बताती हैं कि वो एक बीच पार्टी में थीं और तभी एक शख़्स उनके लिए एक ड्रिंक लेकर आया.
"मैं यह समझ पा रही थी कि मैं धीरे-धीरे अब अचेत हो रही हूं और उसके बाद मैं एक बात समझ गई थी कि कोई मेरे साथ यौन हिंसा कर रहा है."
अगली सुबह जब सोफ़ी टॉयलेट गईं तो उन्हें उनकी वजाइना से कंडोम मिला. जिससे पुष्टि हो गई कि उनके साथ रेप हुआ.
सोफ़ी कहती हैं कि वो शिकायत करना चाहती थीं लेकिन उन्हें किसी से समर्थन नहीं मिला.
हालांकि अब वो अपने उस फ़ैसले को लेकर खुश ही हैं कि उन्होंने शिकायत नहीं की वरना उन्हें भी उस किशोरी की तरह बहुत कुछ झेलना पड़ता.
हमें बदलाव की ज़रूरत है
एक बड़ी समस्या यह है कि हर संस्कृति क़ानून के तहत सहमति को अपने तरीके से समझती है.
कुछ देशों जैसे ब्रिटेन में, अगर सहमति से सेक्स नहीं किया है तो यह रेप की श्रेणी में आता है. साल 2018 के स्वीडन के क़ानून के तहत निष्क्रिय होना सेक्स के लिए सहमति देने का संकेत नहीं है. लेकिन हर जगह ऐसे नियम नहीं हैं.
केटी रसेल कहती हैं, "अगर हम चाहते हैं कि चीज़ें सुधरें तो सिर्फ़ क़ानून बनाना ही काफी नहीं है." बात अगर भारत की करें तो यहां रेप अभियुक्तों के ख़िलाफ़ कोर्ट जा रही एक महिला को उसके अभियुक्तों ने ही जला दिया.
मान्यताओं को बदलने की ज़रूरत है
हमें एक तरह के सांस्कृतिक बदलाव की ज़रूरत है जो रुढ़ियों और ग़लत विचारों से परे हो. इसरायल में रेप क्राइसिस सेंटर एसोसिएशन के प्रमुख ओरित सोलिट्ज़ेनू ने बताया कि वो किशोरी के परीक्षण के लिए साइप्रस गए थे. उन्होंने बीबीसी को बताया कि बलात्कार के बारे में झूठ बोलेने की सज़ा चौंकाने वाली थी.
"उन्होंने मुझे सज़ा के बारे में जो बताया वो पूरी तरह से एक पिछड़ी सोच को दिखाने वाला था. साफ़ समझ आ रहा था कि उन्हें बलात्कार की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं. वहां के जज को यह अवश्य समझना चाहिए कि क्या होता है जब एक लड़की कहती है कि उसके साथ रेप हुआ है."
रेप पीड़िता, सोशल मीडिया और बदले की भावना
बहुत बार ऐसा भी होता है कि रेप पीड़िता और उसके परिवार को सोशल मीडिया पर लोगों के भद्दे कमेंट्स झेलने पड़ते हैं और बहुत बार ऐसा भी होता है कि उन्हें बदले की भावना का भी शिकार होना पड़ता है. कई बार 'रीवेंज पॉर्न' का.
साइप्रस अटैक के घंटों बाद एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें बहुत से आदमी एक ब्रिटिश औरत के साथ सेक्स करते दिख रहे थे.
स्पेन में जिस महिला के साथ गैंग रेप हुआ उसने भी इस बात की पुष्टि की कि उसके साथ रेप करने वालों ने उसका वीडियो बनाया था. जिसे बाद में बहुत से ग्रुप में शेयर भी किया गया.
रेप के झूठे आरोप लगाए जाते हैं लेकिन ये बहुत कम मामलों में होता है. शायद एक प्रतिशत से भी कम मामलों में ऐसा होता है.
और कोई ऐसा करे भी क्यों...कौन इस तरह सामने आना चाहेगा और अपनी ज़िंदगी को तमाशा बनाना चाहेगा?
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