'22 करोड़ अवाम पर रहम खाएं इमरान ख़ान' - उर्दू प्रेस रिव्यू

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इस हफ़्ते पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में नवाज़ शरीफ़ का इलाज के लिए लंदन जाने और सीपेक (चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर) से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग (नून) के नेता नवाज़ शरीफ़ इलाज के लिए लंदन गए हैं. लेकिन उनके लंदन जाने पर पाकिस्तान में ख़ूब सियासत हो रही है.
नवाज़ शरीफ़ भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी पाए गए हैं लेकिन इन दिनों वो ज़मानत पर हैं. इसी बीच उनकी तबीयत भी ख़राब है जिसके कारण वो कई दिनों से अस्पताल में थे.
उनकी पार्टी ने कहा कि उन्हें इलाज के लिए बाहर जाने की ज़रूरत है. इमरान ख़ान की सरकार ने उन्हें जाने की इजाज़त तो दे दी लेकिन साथ ही ये शर्त भी रखी कि उन्हें सात अरब पाकिस्तानी रुपये का बॉन्ड भरना होगा.
नवाज़ शरीफ़ ने सरकार की इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया और इसके ख़िलाफ़ लाहौर हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
अदालत से उन्हें राहत मिली और बिना बॉन्ड भरे इलाज के लिए देश से बाहर जाने की इजाज़त मिल गई.
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'जहाज़ देखकर ठीक हो गए नवाज़ शरीफ़?'
अख़बार 'दुनिया' के मुताबिक़ इमरान ख़ान ने उनकी बीमारी और मेडिकल सर्टिफ़िकेट पर ही सवाल उठा दिए हैं.
अख़बार ने शीर्षक लगाया है, ''नवाज़ शरीफ़ ठीक कैसे, जाँच की ज़रूरत: इमरान ख़ान''.
अख़बार आगे लिखता है, इमरान ख़ान ने कहा कि 'नवाज़ शरीफ़ को जहाज़ की सीढ़ियां चढ़ते देखा तो डॉक्टरों की रिपोर्ट सामने रखी, लिखा था मरीज़ किसी भी वक़्त मर सकता है.'
अख़बार 'जंग' ने लिखा है कि इमरान ख़ान पूछ रहे हैं कि उन्हें तो बताया गया था कि नवाज़ शरीफ़ का इलाज पाकिस्तान में नहीं हो सकता है फिर मरीज़ क्या हवाई जहाज़ को देखकर ठीक हो गया या लंदन की हवा लगने से, इसकी जाँच होनी चाहिए.
इमरान ख़ान के इस बयान का मुस्लिम लीग (नून) ने जमकर जवाब दिया है.
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'दिमाग़ी मरीज़ बन गए हैं इमरान ख़ान'
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार मुस्लिम लीग(नून) ने कहा है कि 'सियासी बदला लेने के चक्कर में प्रधानमंत्री( इमरान ख़ान) दिमाग़ी मरीज़ बन गए हैं. नफ़रत फ़ैलाने वाले भाषणों पर मुक़दमा चलना चाहिए.'
मुस्लिम लीग की प्रवक्ता मरियम औरंगज़ेब ने कहा है कि साबित हो गया है कि प्रधानमंत्री का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, उनका मेडिकल चेकअप होना चाहिए क्योंकि प्रधानमंत्री जब कुछ बोल रहे होते हैं तो पूरी दुनिया सुनती है.
अख़बार दुनिया के अनुसार मुस्लिम लीग ने कहा, ''वो वज़ीर-ए-आज़म हैं या नाग़ाफ़िल-ए-आज़म, नवाज़ शरीफ़ को एम्बूलिफ़्ट से जहाज़ में पहुँचाया गया.''
लीग के वरिष्ठ नेता और पार्टी महासचिव अहसन इक़बाल ने इमरान ख़ान पर जमकर हमला बोला और कहा, ''इमरान ख़ान नवाज़ शरीफ़ फ़ोबिया से बाहर आ जाएं. 22 करोड़ अवाम पर रहम खाएं जो आपके झूठ और अनुभवहीनता का ख़मियाज़ा भुगत रहे हैं.''
अख़बार के अनुसार अहसन इक़बाल ने इमरान ख़ान को 'प्राइम डिसइन्फ़ॉर्मर' क़रार दिया.

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चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर पर हंगामा
चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपेक) को लेकर पाकिस्तान और अमरीका में मतभेद हो गए हैं. अख़बार 'जंग' ने इसका शीर्षक दिया, ''सीपेक पर पाकिस्तान अमरीका आमने-सामने, अमरीका ने कहा पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था पर बोझ, चीन को फ़ायदा''.
अख़बार 'जंग' के अनुसार दक्षिण एशिया मामलों की अमरीकी उपविदेश मंत्री एलिस वेल्स ने कहा है कि सीपेक से चीन को फ़ायदा पहुंचेगा लेकिन इससे पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को नुक़सान होगा.
अमरीकी मंत्री के अनुसार चीनी क़र्ज़ों की शर्तें पाकिस्तान पर बहुत सख़्त हैं और पाकिस्तान को इसे चुकाने में काफ़ी परेशानी होगी.
एलिस वेल्स ने कहा कि पाकिस्तान को इस परियोजना के बारे में चीन से सख़्त सवाल पूछने चाहिए. उपमंत्री ने सीपेक में भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए.
उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने के लिए अमरीका के पास इससे बेहतर मॉडल है.
चीन ने अमरीका के इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.
पाकिस्तान में चीनी राजदूत ज़ाउजिंग ने कहा कि जानकारी नहीं हो तो भ्रष्टाचार की बात करना सबसे आसान होता है.
उन्होंने अमरीका का नाम लिए बग़ैर कहा कि कुछ ताक़तें चीन और पाकिस्तान की दोस्ती में दरार डालना चाहती हैं और सीपेक को सफल होते हुए नहीं देखना चाहती हैं.
चीनी राजदूत ने एक बड़ा एलान करते हुए कहा कि पाकिस्तान को ज़रूरत पड़ी तो क़र्ज़ वापस नहीं मांगेगे. सीपेक के तहत चीन ने पाकिस्तान में 46 अरब डॉलर के निवेश का समझौता किया है.

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कश्मीर से जुड़ी क्या ख़बरें हैं?
पाकिस्तान के अख़बारों में भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी ख़बरें अब उस तरह से सुर्ख़ियां नहीं बटोर रही हैं जितना पहले हुआ करती थीं, लेकिन अभी भी इससे जुड़ी कोई न कोई ख़बर ज़रूर रहती है.
अख़बार 'दुनिया' के अनुसार कश्मीर में कथित भारतीय ज़ुल्म के ख़िलाफ़ अमरीकी संसद में बिल पेश हो गया है.
अख़बार लिखता है कि अमरीकी संसद के निचले सदन में संसद सदस्य रशीदा तलीब ने बिल पेश किया.
बिल में कश्मीर घाटी में 110 दिनों से जारी लॉकडाउन ख़त्म करने के लिए भारत से अपील की गई है.
बिल में कहा गया है कि भारत कश्मीरियों के ख़िलाफ़ बल का प्रयोग कर रहा है. बिल में ये भी मांग की गई है कि संयुक्त राष्ट्र की टीम को भारत प्रशासित कश्मीर तक जाने की इजाज़त दी जाए.
'दुनिया' के अनुसार ब्रिटेन में वकीलों के एक समूह ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ख़त लिखकर पांच अगस्त के बाद वकीलों समेत तीन हज़ार लोगों की गिरफ़्तारी पर चिंता व्यक्त की है.
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