You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ब्रिटेन: अभद्र टिप्पणियों के कारण महिला सांसद राजनीति छोड़ने को मजबूर
ब्रिटेन में महिला सांसदों पर अभद्र टिप्पणियों के मामले तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं. कुछ महिला नेताओं का कहना है कि आज तक वो ऐसी टिप्पणियों से उबर नहीं पाई हैं.
'अ हिस्ट्री ऑफ़ विमेन इन पार्लियामेंट' लिखने वाली लेबर पार्टी की सांसद रेचल रिव्स बताती हैं कि पहली महिला सांसद नैनसी एस्टर ने पुरुष सांसदों के बीच एक लंबी कोशिशों के बाद जगह बनाई थी.
लेकिन हालिया वक़्त में महिला सांसदों को बलात्कार और हत्या की धमकियां मिलनी आम होती जा रही हैं. 50 से ज़्यादा सांसदों ने कहा है कि वो 12 दिसंबर को होने वाले आम चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगी. इनमें से 18 महिला सांसद हैं.
इनमें से कई महिलाओं का मानना है कि इस फ़ैसले के पीछे उन पर होने वाली टिप्पणियां सबसे अहम वजह है.
यूके की संस्कृति सचिव निक्की मॉर्गन को कई धमकियां मिलती रही हैं. उन्हें 64 साल के एक शख़्स रॉबर्ट विडलर ने फ़ोन पर धमकी देते हुए कहा था, ''उनके पास गिनती के दिन बचे हैं.'' उस शख़्स को 18 हफ़्तों के लिए जेल की सज़ा मिली.
निक्की कहती हैं कि उनका सांसद होना उनके परिवार पर सीधे प्रभाव डालता है. पिछले एक दशक में लोगों पर की जाने वाली अभद्र टिप्पणियां 'काफ़ी हद तक' बदल गई हैं क्योंकि ऐसे वक़्त में जब देश में ब्रेग्ज़िट पर बहस गरम है, लोगों की राजनीति के वर्तमान परिदृश्य पर एक ख़ास राय है.
लिबरल डेमोक्रेट और पूर्व टॉरी सांसद हेडी एलेन ने भी चुनाव नहीं लड़ने का फ़ैसला किया है. उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी गई थी. ब्रेग्ज़िट को लेकर उनके रुख़ पर 51 साल के शख़्स ने एक फ़ेक ईमेल आईडी से मेल भेजा था. हालांकि इस शख़्स को भी 42 हफ्त़ों के लिए जेल की सज़ा सुनाई गई.
एलेन ने अपने चुनाव क्षेत्र के लोगों को लिखे पत्र में कहा, "किसी भी नौकरी में किसी को भी धमकी, डराने वाले ईमेल, सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी और घर पर पैनिक अलार्म लगाने की ज़रूरत नहीं पड़नी चाहिए. बेशक, सार्वजनिक जांच की उम्मीद की जानी है, लेकिन कई बार लोग तय दायरा पार कर जाते हैं. इसका असर बेहद बुरा और कभी- कभी अमानवीय होता है.''
'इन्हें जीतने मत दो'
ऐसा नहीं है कि उन्हीं को टारगेट किया जा रहा हो जो यूके के ईयू में रहने के पक्षधर हैं.
टोरी नेता और ब्रेग्ज़िट की पक्षधर एंड्रिया जेनकिंस ने ऐसी कई अभद्र टिप्पणियां झेली हैं. उन्हें ना सिर्फ़ धमकियों भरे ईमेल मिले बल्कि उनके चुनावी क्षेत्र में मौजूद उनके दफ़्तर पर आत्महत्या को दर्शाता एक पेंटिंग भी बनाई गई.
उन्होंने बताया कि उन पर कई व्यक्तिगत टिप्पणियां की गईं और उन्हें 'एक बुरी मां' तक कह दिया गया. इसके वाबजूद उन्होंने हार नहीं मानी और वो इस चुनाव में भी मोरली और आउटवुड सीट से चुनाव लड़ेंगी.
वह कहती हैं, ''मैं यहां अपनी नौकरी करने के लिए हूं. मुझे अपने चुनावी क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधित्व करना पसंद है. मैं कई स्थानीय मुद्दों को ख़त्म करने में जुटी हुई हूं और उनमें से एक है बच्चों के शोषण का मुद्दा. ऐसे मुद्दों के लिए लड़ते हुए मैं हमेशा ज़मीन और अपने लोगों से जुड़ी रहती हूं. अगर मैं चुनाव लड़ना छोड़ दूं तो इसका मतलब होगा कि मैंने अपने लोगों को बीच राह में छोड़ दिया.''
लिब्रल डेमोक्रेटिक सांसद सारा वोलास्टन ने जब कंज़र्वेटिव पार्टी छोड़ी तो पुलिस ने उनको अपने निर्वाचन क्षेत्र में सार्वजनिक मुलाक़ात और प्रचार ना करने का सुझाव दिया.
लेकिन, एंड्रिया जेनकिंस ने बीबीसी के रेडियो फ़ोर के एक कार्यक्रम में कहा, ''आप इस तरह सबकुछ छोड़ कर ऐसे लोगों का जवाब नहीं दे सकते. आपको आगे बढ़ते हुए ऐसे लोगों को सबक़ सिखाना होगा.''
एमनेस्टी इंटरनेशनल के एक अध्ययन के मुताबिक़ महिला सांसदों पर होने वाली अभद्र टिप्पणियों में सबसे ज़्यादा टिप्पणियों का शिकार हुई हैं शैडो होम सेक्रेटरी डिएन एब़ट. इन टिप्पणियों का 50 फ़ीसदी हिस्सा उन्हें ट्वीट के ज़रिए मिला. इसके बावजूद वो आने वाले चुनावों में भी अपनी पार्टी की दमदार आवाज़ बनी रहेंगी.
आंकड़े क्या कहते हैं?
2019 के चुनावों से पहले अब तक 57 सांसदों ने कहा है कि वह अब चुनाव नहीं लड़ेंगे. पिछले चुनावों की तुलना में ये आंकड़े कम हैं. साल 2010 में 149 सांसदों ने और 1997 में 117 सांसदों ने चुनाव ना लड़ने का ऐलान किया था. लेकिन इस बार ऐसा करने वालों में महिला सांसदों की संख्या बढ़ी है.
टोरी चेयरमैन जेम्स क्लेवर्ली ने एक ट्वीट को रीट्विट किया. जिसमें बताया जा रहा है कि चुनाव ना लड़ने का फ़ैसला करने वालों में 32% महिला सांसद शामिल हैं. ये आंकड़े सही है क्योंकि कुल 18 महिलाओं ने चुनाव ना लड़ने का ऐलान किया है, प्रतिशत में ये आंकड़ा 31 या 32 फ़ीसदी है.
ब्रितानी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ कॉमंस छोड़ने वाले पुरुष सांसदों की औसत उम्र 63 है वहीं महिलाओं के लिए ये आंकड़ा 59 साल है. एक बेहद दिलचस्प बात ये है कि जिन नेताओं ने इस बार चुनाव नहीं लड़ने का फ़ैसला लिया है उनमें से 89 फ़ीसदी सांसदों ने ईयू के साथ बने रहने के पक्ष में वोट किया था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)