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मिसाइल जिसके कारण भारत पर लग सकता है अमरीकी प्रतिबंध
- Author, गुरप्रीत सैनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अमरीका भारत पर प्रतिबंध लगा सकता है, वो भी एक मिसाइल की वजह से.
दरअसल, भारत रूस से एक मिसाइल सिस्टम ख़रीदने वाला है - जिसका नाम है एस-400. लेकिन अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि अगर भारत ने ये ख़रीदारी की, तो उस पर अमरीकी प्रतिबंध लगने का ख़तरा है.
इसका मतलब ये है कि अमरीका और रूस के बीच की तनातनी का ख़ामियाज़ा भारत को भुगतना पड़ सकता है.
हालांकि अमरीका दौरे पर गए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि उन्हें लगता है कि वो इस सौदे के लिए अमरीका को मना लेंगे, लेकिन उसी दिन अमरीकी विदेश मंत्रालय ने द हिंदू अख़बार को ईमेल के ज़रिए बताया कि ऐसा कोई भी सौदा भारत के लिए मुसीबत बन सकता है और अमरीका उस पर प्रतिबंध लगा सकता है.
इस ईमेल में अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने लिखा, "हम अपने सहयोगियों से अपील करते हैं कि वो रूस के साथ कोई भी ऐसा सौदा करने से बचें, जिसकी वजह से उन पर काउंटरिंग अमरीकाज़ अडवर्सरीज थ्रु सैंक्शंस एक्ट के तहत प्रतिबंध लगने का ख़तरा हो."
काउंटरिंग अमरीकाज़ अडवर्सरीज थ्रु सैंक्शंस एक्ट (CAATSA) क्या है?
ऐसा नहीं है कि अमरीका और भारत के रिश्तों में कोई तनाव आ गया है या ये प्रतिबंध ख़ास तौर पर भारत के लिए है. दरअसल, ये प्रतिबंध हर उस देश पर लागू होंगे जो अमरीका के काटसा क़ानून का उल्लंघन करेगा.
जैसा कि इस क़ानून के नाम से ही समझ आता है कि अमरीका इस क़ानून के ज़रिए अपने विरोधियों पर दबाव बनाता है और उनके सौदे तुड़वाने की कोशिश करता है. अमरीका के घोषित विरोधी हैं रूस, ईरान और उत्तर कोरिया.
रूस के मामले में अमरीका का यह क़ानून उन देशों को रोकता है जो रूस के साथ हथियारों का सौदा करते हैं.
डोनल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद अमरीकी संसद ने 2017 में इस क़ानून को पास किया था.
2 अगस्त 2017 को जब से ये क़ानून लागू हुआ है तब से ही भारत में ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि इससे भारत रूस के रक्षा संबंधों, ख़ास तौर पर एस-400 मिसाइल सिस्टम की संभावित ख़रीद पर क्या असर पड़ेगा.
इससे पहले अमरीका ने इस क़ानून के तहत चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमिशन के इक्विपमेंट डेवेलपमेंट डिपार्टमेंट और उसके निदेशकों पर प्रतिबंध लगा दिया था. चीन पर ये प्रतिबंध इसलिए लगाए गए थे, क्योंकि उसने रूस से एसयू-35 एयरक्राफ्ट and एस-400 सिस्टम ख़रीदा था.
एस-400 मिसाइस डिफेंस सिस्टम
रूस में बनने वाले 'एस-400: लॉन्ग रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम' को भारत सरकार ख़रीदना चाहती है. ये मिसाइल ज़मीन से हवा में मार कर सकती है.
एस-400 को दुनिया का सबसे प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है. इसमें कई ख़ूबियां हैं.
जैसे एस-400 एक साथ 36 जगहों पर निशाना लगा सकता है. इसके अलावा इसमें स्टैंड-ऑफ़ जैमर एयरक्राफ्ट, एयरबोर्न वॉर्निंग और कंट्रोल सिस्टम एयरक्राफ्ट है. यह बैलिस्टिक और क्रूज़ दोनों मिसाइलों को गिरने से पहले रास्ते में ही नष्ट कर देगा. एस-400 को सड़क के रास्ते कहीं भी ले जाया जा सकता है और इसके बारे में कहा जाता है कि पांच से 10 मिनट के भीतर इसे तैनात किया जा सकता है.
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि एस-400 के आने से भारतीय सेना की ताक़त बढ़ेगी.
भारतीय वायु सेना के लिए भारत सरकार ने रूस से पांच एस-400 सिस्टम मांगे हैं. एस-400 सिस्टम की आपूर्ति के लिए कॉन्ट्रेक्ट हो चुका है.
इस डिफेंस सिस्टम के लिए भारत को कितनी क़ीमत चुकानी होगी, इसकी कोई आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है. लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि भारत को इसके लिए 5.4 अरब डॉलर से अधिक ख़र्च करने होंगे.
जैसे ही इस मिसाइल सिस्टम की पहली किश्त चुकाई जाएगी, वैसे ही भारत पर अमरीका के प्रतिबंध लागू हो सकते हैं.
इन प्रतिबंधों से बचने का एक तरीक़ा है, वो ये कि अमरीका के राष्ट्रपति भारत को इससे छूट दे दें.
लेकिन अमरीकी अधिकारी लगातार ये कहते रहे हैं कि भारत को ये नहीं सोचना चाहिए कि उसे तो ये छूट अपने-आप ही मिल जाएगी. अमरीका ये तय करेगा कि क्या करना है.
क्या है प्रतिबंध का मतलब?
काटसा की धारा 235 में 12 तरह के प्रतिबंधों का ज़िक्र है. अगर भारत रूस के साथ लेन-देन करता है तो अमरीका के राष्ट्रपति इनमें से पांच या उससे ज़्यादा प्रतिबंध भारत पर लगा सकते हैं. जैसे -
- जिस पर प्रतिबंध लगा है, उसे लोन नहीं दिया जाएगा
- जिस पर प्रतिबंध लगा है, वहां कोई सामान एक्सपोर्ट करने के लिए एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक से सहायता नहीं मिलेगी.
- जिस पर प्रतिबंध लगा है, अमरीकी सरकार वहां से कोई सामान या सेवा नहीं लेगी.
- उससे क़रीब से जुड़े किसी व्यक्ति को वीज़ा नहीं दिया जाएगा.
इनमें से दस प्रतिबंधों का तो भारत-अमरीका और भारत-रूस संबंधों पर ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ेगा. लेकिन दो प्रतिबंध आपसी रिश्तों पर बड़ा असर डाल सकते हैं.
इनमें से एक है कि 'बैंकिग ट्रांसेक्शन्स पर प्रतिबंध' लगा दिया जाएगा. जिससे भारत एस-400 के लिए रूस को अमरीकी डॉलर में भुगतान नहीं कर पाएगा.
दूसरे प्रतिबंध का भारत-अमरीका रिश्तों पर गहरा असर होगा. इसके तहत 'एक्सपोर्ट यानी निर्यात पर प्रतिबंध' लगा दिया जाएगा. मतलब जिस पर प्रतिबंध लगा है, अमरीका उससे किसी चीज़ का आयात नहीं करेगा और ना ही इसके लिए लाइसेंस देगा.
इन दो प्रतिबंधों की वजह से भारत और अमरीका के बीच की रणनीतिक और रक्षा साझेदारी बुरी तरह प्रभावित होगी.
दिलचस्प बात ये है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इस क़ानून से ज़्यादा इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते हैं. उन्होंने अपनी ख़ुशी से इस क़ानून पर हस्ताक्षर नहीं किए थे. बल्कि उन्होंने ये भी कहा था कि इस क़ानून में कई गड़बड़ियां हैं.
डोनल्ड ट्रंप ने ये आशंका जताई थी कि काटसा के प्रभाव में आने से अमरीकी कंपनियों के साथ-साथ उनके सहयोगी देशों का भी नुक़सान होगा.
यहां ग़ौर करने वाली बात ये है कि इस क़दम से अमरीका का भी नुक़सान होगा क्योंकि अमरीका भी भारत को बड़ी मात्रा में सैनिक साजोसामान की सप्लाई करता है.
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