यमन के हूती विद्रोहियों का दावा : हज़ारों सऊदी सैनिक पकड़े

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यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने बड़ी संख्या में सऊदी अरब के सैनिकों को पकड़ लिया है.
हूती विद्रोहियों के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि सऊदी अरब के नाजरान शहर के क़रीब सऊदी अरब की तीन ब्रिगेड ने आत्मसमर्पण कर दिया.
प्रवक्ता ने बताया कि पकड़े गए सैनिकों की संख्या हज़ारों हैं. उन्होंने दावा किया कि हूती विद्रोहियों के तीन दिन के अभियान में सऊदी अरब गठबंधन सेना के कई अन्य सैनिक मारे गए हैं.
सऊदी अरब के अधिकारियों ने हूती विद्रोहियों के इस दावे की पुष्टि नहीं की है.
टीवी पर कराएंगे परेड
हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता कर्नल याहिया सारिया ने बताया कि जब से यमन में संघर्ष की शुरुआत हुई है, तब से ये अपनी तरह का सबसे बड़ा अभियान था.
कर्नल याहिया सारिया ने बताया कि सऊदी सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया. उन्हें 'बड़े पैमाने पर जनहानि और युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हथियारों और मशीनों का नुकसान उठाना पड़ा है.'
उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों को पकड़ा गया है, उनकी रविवार को हूती नियंत्रण वाले अल मसीराह टीवी नेटवर्क पर परेड कराई जाएगी.

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2015 से जारी संघर्ष
हूती विद्रोहियों ने इसके पहले सऊदी अरब के दो तेल संयंत्रों पर हमला करने का दावा किया था. ये हमला 14 सितंबर को हुआ था. इसे विश्व स्तर पर तेल मार्केट प्रभावित हुई थी.
लेकिन सऊदी अरब और अमरीका ने इस हमले के लिए ईरान को ज़िम्मेदार बताया था. ईरान ने इन आरोपों को ग़लत बताया था. माना जाता है कि ईरान हूती विद्रोहियों का समर्थन करता है.
यमन में साल 2015 से संघर्ष जारी है. तब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्ज़ा कर लिया था और राष्ट्रपति अब्दरबू मंसूर हादी को देश छोड़कर भागना पड़ा था. हूती विद्रोहियों का उत्तरी यमन के ज़्यादातर हिस्से पर कब्ज़ा है.

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सऊदी अरब राष्ट्रपति हादी के समर्थन में है. सऊदी अरब के अगुवाई वाले गठबंधन ने साल 2015 में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ हवाई हमले शुरू किए थे. ये गठबंधन आज भी लगभग हर दिन हवाई हमले कर रहा है. हूती विद्रोही भी सऊदी अरब पर मिसाइल हमले करते रहे हैं.
गृह युद्ध की वजह से यमन गहरे मानवीय संकट में फंस गया है. देश की क़रीब अस्सी फ़ीसदी आबादी यानी करीब दो करोड़ 40 लाख लोगों को मानवीय मदद की जरूरत है. करीब एक करोड़ लोग भुखमरी की कगार पर हैं.
संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक साल 2016 से संघर्ष की वजह से 70 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
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