संयुक्त राष्ट्र में इमरान ख़ान: भारत बड़ा बाज़ार है, इसलिए दुनिया ख़ामोश

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में आरोप लगाया कि भारत ने उनकी तरफ से की गई शांति की सभी कोशिशों को नकार दिया.
इमरान ख़ान ने क़रीब 50 मिनट के अपने भाषण में दुनिया को आगाह किया कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच जंग होती है तो 'कुछ भी हो सकता है.'
उन्होंने कहा,"जब आकार में सात गुना छोटे देश के सामने ये विकल्प हो कि वो सरेंडर कर दे या फिर मौत तक संघर्ष करे. तब हम आख़िर तक लड़ेंगे और जब जंग का अंत होगा तो इसके नतीजे सीमा के परे तक होंगे. ये धमकी नहीं है. ये एक स्वाभाविक चिंता है."

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भारत ने नहीं दिया सकारात्मक जवाब
इमरान ख़ान ने शांति के लिए की गईं अपने कोशिशों का ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, "जब हम सत्ता में आए तो मेरी प्रथामिकता पाकिस्तान को ऐसा देश बनाने की थी जो शांति स्थापित करने में आगे हो. 9/11 के बाद हम आतंकवाद के ख़िलाफ जंग में शामिल हुए."
इमरान ख़ान ने दावा किया कि उन्होंने भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने के लिए लगातार कोशिश की.
उन्होंने कहा, "हमने पहली चीज़ ये की कि हमने भारत से संपर्क बनाने की कोशिश की. मैंने मोदी से कहा कि हमारी समस्याएं एक सी हैं. गरीबी और जलवायु परिवर्तन. चलिए हम भरोसे पर आधारित रिश्ते बनाते हैं. चलिए हम आगे बढ़ते हैं."
इमरान ख़ान ने दावा किया कि उन्हें भारत की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला.
उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से उन्होंने प्रगति के लिए कोई क़दम नहीं बढ़ाया. हमने सोचा कि चुनाव का वक़्त है और वो पाकिस्तान के साथ क़रीबी रिश्ते नहीं बनाना चाहते."

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ख़ास एजेंडे पर बढ़ी मोदी सरकार
"उसके बाद एक 20 साल के लड़के ने खुद को पुलवामा में उड़ा लिया. उनके पिता ने कहा कि वो कट्टवादी ताक़तों के असर में था. मैंने भारत से कहा कि वो हमें सबूत दें. सबूत देने के बजाए उन्होंने विमान भेज दिए. हमने दो को गिरा दिया. एक पायलट को पकड़ा लेकिन उन्हें वापस कर दिया."
इमरान ख़ान ने आगे कहा,"इसे शांति की पहल मानने के बजाए मोदी ने पाकिस्तान के ख़िलाफ चुनाव अभियान चलाया."
इमरान ने कहा कि जब भारत ने पाँच अगस्त को कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किया और 80 लाख लोगों पर हर तरह की पाबंदी लगा दी तो उन्हें समझ में आया कि दरअसल इसके पीछे मोदी सरकार का ख़ास एजेंडा है.
उन्होंने कहा कि भारत ने शिमला समझौते और अपने ही संविधान के ख़िलाफ़ ये क़दम उठाया है.

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'कश्मीर में क़त्ले-आम होगा'
उन्होंने कहा कि जब भारत प्रशासित कश्मीर में पाबंदी हटेगी तो वहां क़त्ले-आम होने की आशंका है. इमरान ने कहा कि 80 लाख कश्मीरी जानवरों की तरह ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत प्रशासित कश्मीर में हो रही कथित ज़्यादतियों पर दुनिया इसलिए ख़ामोश है क्योंकि भारत एक बड़ा बाज़ार है.
इमरान ने कहा कि इस बात की बहुत आशंका है कि भारत में कश्मीरी युवक किसी हिंसा में शामिल हों और भारत इसके लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराए.
उन्होंने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान में जंग होगी तो एक छोटा देश होने के नाते पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार के इस्तेमाल के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं होगा.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन के ज़रिए पूरी दुनिया को ख़बरदार किया कि अगर ऐसा होता है तो इसका असर सिर्फ़ भारत-पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान आज वहीं खड़े हैं जहां 1939 में यूरोप खड़ा था.
उन्होंने कहा कि 1939 में यूरोप ने हिटलर का तुष्टिकरण किया जिसका नतीजा ये हुआ कि दुनिया को दूसरे विश्व युद्ध से गुज़रना पड़ा. उन्होंने दुनिया से अपील की कि आज कश्मीर में यही हालात हैं और दुनिया को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए.

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संयुक्त राष्ट्र निभाए ज़िम्मेदारी
इमरान ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस संगठन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के आजीवन सदस्य हैं, वो हिटलर और मुसोलीनी को अपना आइडियल मानते हैं. इमरान के मुताबिक़ आरएसएस की विचारधारा ने ही महात्मा गांधी की हत्या की थी.
इमरान ख़ान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अपनी ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए और उसे कश्मीर के मामले में अपने ही प्रस्तावों को लागू करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र समेत पूरी दुनिया को इस बात के लिए भारत पर दबाव डालना चाहिए कि भारत सबसे पहले कश्मीर में लगी पाबंदी हटाए. इमरान ने कहा कि कश्मीरी राजनेता और हज़ारों बच्चे और नौजवान जो हिरासत में हैं उनको फ़ौरन रिहा किया जाए. उन्होंने कहा कि कश्मीरियों को आत्म-निर्णय का अधिकार मिलना ही चाहिए.
इमरान ख़ान ने तक़रीबन 50 मिनट का लंबा भाषण दिया. उन्होंने कश्मीर के अलावा जलवायु परिवर्तन, दुनिया में बढ़ती ग़रीबी और इस्लामोफ़ोबिया का ज़िक्र किया.
इससे पहले इमरान ख़ान ने कहा कि आतंकवाद का किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं है. शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि 9/11 की घटना के बाद इस्लामोफ़ोबिया में बढ़ोत्तरी हुई है और इसका ख़ात्मा होना चाहिए.
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