मोदी की रूहानी से हुई मुलाकात और बात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र के इतर ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से मुलाकात की.
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस दौरान दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग और क्षेत्र की स्थिति पर अपने विचार साझा किए.
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प्रधानमंत्री मोदी ने खाड़ी के क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत की ओर से कूटनीति, संवाद और विश्वास बनाए रखने की प्राथमिकता दोहराई.
ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक दोनों नेताओं ने 2015 में अपनी पहली मुलाकात से लेकर अबतक द्विपक्षीय रिश्तों में हुई प्रगति का आंकलन किया.
प्रधानमंत्री मोदी और रूहानी के बीच विशेष रूप से चाबहार पोर्ट के परिचालन को लेकर बात हुई और दोनों ने ही अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशियाई क्षेत्र के लिए प्रेवश द्वार के रूप में इसके महत्व का ज़िक्र किया.

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कूटनीति रिश्तों की 70वीं वर्षगांठ
दोनों नेताओं के बीच 2020 में कूटनीति रिश्तों की 70वीं वर्षगांठ मनाए जाने को लेकर भी सहमति बनी.
ये मुलाकात ऐसे वक्त में हुई है, जब ईरान दुनियाभर की सुर्खियों के केंद्र में है. सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हुए हमले के लिए सऊदी और अमरीका ने ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया है. हालांकि ईरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है.
ईरान और अमरीका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरान के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि खाड़ी क्षेत्र पतन के मुहाने पर है और वो अमरीका से तबतक कोई बातचीत नहीं करेंगे जबतक वो अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते में वापस लौट नहीं आता.
दरअसल दोनों देशों के बीच ये तनाव अमरीका के इस समझौते के अलग होने के बाद से ही शुरू हुआ था.

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भारत का बहुत कुछ दांव पर
इसके बाद अमरीका ने ईरान पर कई कड़े प्रतिबंध लगा दिए और अपने सहयोगी देशों को भी ईरान से नज़दीकी ना रखने के लिए कहा.
अमरीका ने भारत से भी कहा था कि वो ईरान से तेल लेना बंद कर दे. भारत अपनी तेल ज़रूरतों का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है. इराक़ और सऊदी अरब के बाद ईरान उसका तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था.
भारत अपनी मध्य-पूर्व या पश्चिम एशिया नीति में अभी तक ये कहता रहा है कि भारत स्वतंत्र द्विपक्षीय संबंध बनाने में सक्षम है और इसके लिए किसी पर निर्भर नहीं है.

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विश्लेषकों के मुताबिक भारत के लिए बड़ी दुविधा ये है कि वो ईरान के साथ अपने संबंधों को कैसे संतुलित करे. ईरान के साथ सिर्फ़ तेल का संबंध नहीं है. भारत ने चाबहार बंदरगाह में बड़ा निवेश किया है. चाबहार से भारत मध्य एशिया में मज़बूत होना चाहता है. लेकिन अमरीकी प्रतिबंधों की वजह से भारत-ईरान संबंध उस तरह से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं जिस तरह से भारत चाहता है.
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